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Thursday, September 17, 2020

BIHAR:तालीम की आड़ में सीमांचल में सियासत, बिहार मदरसा बोर्ड के चेयरमैन के खिलाफ लगे 'गो बैक' के नारे

पूर्णिया. बिहार मदरसा बोर्ड ( Bihar Madrasa Board) से तालीम देने की आड़ में वोट की सियासत होती है और पैसों के वारे न्यारे होते हैं. ये बात पूर्णिया में मदरसा शिक्षा से जुड़े लोगों की जमात ने ही खोल दी है. बुधवार को जिस तरह मदरसा तालीम से जुड़े लोगों ने मदरसा बोर्ड के चेयरमैन अब्दुल कयूम अंसारी (Abdul Qayoom Ansari) को बोर्ड के रीजनल ऑफिस में जलील किया उससे तालीम की आड़ में वोट की सियासत की बात खुलेआम हो चुकी है. अल्पसंख्यक बहुल इलाके में बोर्ड के चैयरमैन जदयू के पिछलग्गू बताये जा रहे हैं और काम के नाम पर उनके दौरे को महज वोट बैंक तैयार करने का आरोप लग रहा है. जलालत झेलने के बाद बोर्ड के अध्यक्ष तो वापस हो गए, लेकिन तालीम के नाम पर सियासत की बातें चर्चा में आ चुकी है.

बिहार मदरसा बोर्ड के चेयरमैन का हुआ विरोध

पूर्णिया के मदरसा बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचे बिहार मदरसा बोर्ड के चेयरमैन अब्दुल कयूम अंसारी का लोगों ने जमकर विरोध किया, तो इसके पीछे की दो वजहें खास थीं. एक तो मदरसा तालीम के अंदर की गड़बड़ियां और दूसरा जदयू के साथ मुस्लिम समाज को मदरसा तालीम के माध्यम से करीब लाने की सियासत पर नाराजगी का झलक जाना. मदरसा से जुड़े लोगों ने ही जमकर हंगामा किया और बोर्ड के चेयरमैन की गाड़ी को घेरकर गो बैक के नारे लगाये. लोगों ने चेयरमैन पर जदयू के इशारे पर अंदर अंदर मुस्लिम समाज में प्रचार करने सहित कई गंभीर आरोप भी लगाये. मदरसा शिक्षक अभ्यर्थी हिजबुर रहमान ने कहा कि मदरसा में थर्ड और फोर्थ ग्रेड के बहाली में जमकर धांधली हुई है. उन्होंने आरोप लगाते हुये कहा कि मदरसा बोर्ड के चेयरमैन और सचिव ने अपने रिश्तेदारों की बहाली कर दी है. वहीं मदरसा संख्या 989 चपहरी के भूमिदाता कमरुज्जमा ने कहा कि उसने अपने गांव के मदरसा में जमीन दी थी. इसके बावजूद उनको उस कमिटी से हटा दिया गया और दूसरे से रुपया लेकर उन लोगों की नई कमेटी बना दी. चमीडिया ने चेयरमैन से कहा कि उनका पक्ष जानना चाहा तो पहले तो वे मुलाकात किये बिना पुलिस कवर का मौका मिलते ही भाग उठे.

साहित्यकार चंद्रशेखर मिश्र ने कही ये बात

मदरसो के शिक्षक मनौव्वर ईमान,कुतुबुद्दीन अंसारी जैसे दर्जनों लोगों का वेतन बाकी है और उनका कहना है कि पैसा रहने के बाद भी उन्हें बोर्ड भुगतान नहीं कर रहा है. इधर चैयरमैन जदयू का चुनाव प्रचार करने निकल पड़े हैं. कल के हाल पर सीमांचल के वामपंथी नेता इस्लामुद्दीन कहते हैं कि मदरसों की तालीम मुस्लिम समाज के लिए छलावा है और इस पर जदयू अपनी सियासत करने में जुटी है जिसका मोहरा मदरसा बोर्ड के चैयरमैन को बनाया है. इसी मामले में दूसरी ओर इलाके के साहित्यकार चंद्रशेखर मिश्र कहते हैं कि चाहे मदरसा बोर्ड हो चाहे संस्कृत शिक्षा बोर्ड बाकी दिन सिर्फ अंदरखाने में गड़बड़झाला तालीम या शिक्षा पूरी तरह नदारद है. जबकि चुनाव के दिन आने पर इन संस्थाओं के माध्यम से सत्ता पक्ष की पार्टियां सियासत जमाने से करती आ रही हैं. जनता इन चोंचलों को खूब समझती है.