- वैशाली जिले के राघोपुर पूर्वी पंचायत में ठनका की चपेट में आकर चार लोगों की मौत हुई
- मौसम विभाग ने रोहतास, कैमूर, शेखपुरा, नवादा, सारण और बक्सर में बिजली गिरने की संभावना जताई है
मंगलवार को वैशाली, सारण, भोजपुर, गोपालगंज, बेगूसराय, सुपौल, कैमूर और अररिया में बिजली गिरने से 14 लोगों की मौत हो गई। सबसे अधिक मौत वैशाली जिले के राघोपुर में हुई है। राघोपुर पूर्वी पंचायत में ठनका की चपेट में आकर चार लोगों की मौत हुई। सारण जिले के पानापुर में बिजली गिरने से दो बच्चियों की मौत हो गई। भोजपुर जिले के उदवंत नगर में दो लोगों की मौत हुई। मृतकों में एक छात्रा शामिल है। वह कॉलेज से घर लौट रही थी तभी उस पर बिजली गिर गई।
गोपालगंज के भोरे में ठनका गिरने से दो बच्चों की मौत हो गई। बेगूसराय जिले के डंडारी थाना क्षेत्र में ठनका गिरने से एक महिला की मौत हो गई। वहीं, अररिया जिले के फारबिसगंज प्रखंड के पुरवारी झिरवा में वज्रपात की चपेट में आने से मो. सदरूल की मौत हो गई। सुपौल जिले के बसंतपुर प्रखंड के कोचगामा में ठनका गिरने से 37 साल के मोहम्मद नासिर की मौत हो गई। कैमूर जिले के चैनपुर के लोहरा गांव में ठनका गिरने से एक किशोर की मौत हो गई।
मौसम विभाग ने जारी किया भारी बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट
मौसम विभाग ने बिहार के कई जिलों में भारी बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। विभाग ने कहा है कि अगले छह घंटे तक उत्तर बिहार में भारी बारिश की संभावना है। विभाग ने लोगों से इस दौरान ऐहतियात बरतने की अपील की है।
विभाग ने रोहतास, कैमूर, शेखपुरा, नवादा, सारण और बक्सर में बिजली गिरने की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी से हवा नमी लेकर उत्तर बिहार की ओर बढ़ रही है, जिसके चलते उत्तर बिहार में भारी बारिश हो सकती है। आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
पटना में भी बदला मौसम
राजधानी पटना का मौसम मंगलवार को चंद घंटे में बदल गया। सुबह से दोपहर तक उमस और गर्मी थी। दोपहर में आसमान में काले बादल छा गए। हल्की हवा चली इसके बाद भारी बारिश हुई। करीब दो घंटे हुई बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिली है।

औसतन 300 मौतें हर साल, जानकारी के अभाव में मौत का औसत पार
बिहार में औसतन हर साल 300 मौतों बिजली गिरने के कारण होती रही है, लेकिन इस साल यह आंकड़ा इस औसत को पार कर चुका है। बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग की बैठकों में सलाह के लिए बुलाए जाने वाले वज्रपात सुरक्षित भारत अभियान के संयोजक कर्नल संजय श्रीवास्तव के अनुसार आकाशीय बिजली से बचने के उपायों की जानकारी लोगों तक नहीं पहुंच रही है, जिसके कारण शहरों की अपेक्षा बिहार की ग्रामीण आबादी इसकी शिकार ज्यादा हो रही है।
शहरों में ज्यादातर भवनों पर तड़ित रोधक (लाइटनिंग अरेस्टर) और तड़ित चालक (लाइटनिंग कंडक्टर) लगे रहते हैं, इसलिए वह बिजली को खींचकर अर्थिंग के जरिए जमीन तक भेज देते हैं, जबकि गांवों में खुले खेतों में पड़े लोहे-तांबे के सामान, जलस्रोत, ऊंचे पेड़ आकाशीय बिजली को आकर्षित कर लेते हैं। इसके आसपास रहे लोगों की आकाशीय बिजली के करंट या तेज आवाज से धड़कन रुक जाती है या जलकर मौत हो जाती है।
बचना है तो क्या करें, न करें...यह जान लीजिए
- खुले में हैं तो किसी पक्के मकान तक पहुंच सकते हैं तो पहुंचें
- खुले में ही हैं तो दोनों पैर सटा चुक्कू-मुक्कू बैठ कान बंद कर लें
- लोहे के खंभों, ऊंचे पेड़ों, तालाब-जलाशय आदि से खुद को दूर करें
- सूखी लकड़ी, प्लास्टिक, बोरा या सूखे पत्ते पर खड़े हो सकते हैं
- जिन चीजों में करंट आ सकता है, उन्हें तुरंत अपने से दूर कर दें
- समूह में सटकर खड़े न हों, दूरी बनाकर रहें और जमीन पर न सोएं
- घर में हों तो नल, फ्रिज या ऐसे करंट वाले उपकरणों को नहीं छुएं
स्थायी उपाय भी कर सकते हैं
आकाशीय बिजली से बचाने के लिए बिहार में कुछ संस्थाएं नो प्रॉफिट, नो लॉस पर लाइटनिंग अरेस्टर और लाइटनिंग कंडक्टर भी उपलब्ध करा रही हैं। लाइटनिंग कंडक्टर 54 हजार रुपए में मिल रहा है। यह जिस ऊंचाई पर लगाया जाता है, उससे 45 डिग्री की छाया में वज्रपात को रोकता है। यानी, खेत में 40 फीट ऊंचाई पर इसे लगा दें तो उस जगह से 45 डिग्री का कोण बनाने पर जितनी परिधि होगी, उतनी दूर तक बिजली नहीं गिरेगी। लाइटनिंग अरेस्टर इससे करीब तीन गुणा कीमत पर 1.42 लाख रुपए में उपलब्ध है। यह जहां लगाया जाता है, उसके 1.4 वर्ग किमी के दायरे के आकाश में बिजली बननी शुरू होते ही उसे खींचकर जमीन में डाल देता है। मतलब, यह 1.4 वर्ग किमी के दायरे में बिजली से बचाने वाला छाता है। बिजली न गिरेगी और न आवाज होगी।
बिहार में वज्रपात से मौत
15 अप्रैल: 2 की मौत
| मुंगेर | 2 |
26 अप्रैल: 12 की मौत
| छपरा | 9 |
| जमुई | 2 |
| भोजपुर | 1 |
1 मई: 4 की मौत
| जमुई | 2 |
| पूर्वी चंपारण | 1 |
| नवादा | 1 |
5 मई: 21 की मौत
| पटना | 1 |
| समस्तीपुर | 3 |
| जहानाबाद | 2 |
| कटिहार | 2 |
| सीतामढ़ी | 2 |
| अरवल | 1 |
| सीवान | 1 |
| मुजफ्फरपुर | 1 |
| बांका | 1 |
| जमुई | 1 |
| नवादा | 1 |
| शेखपुरा | 1 |
| बेगूसराय | 1 |
| नालंदा | 1 |
19 मई-5 की मौत
| पूर्णिया | 5 |
25 जून: 100 मौतें
| गोपालगंज | 13 |
| पूर्णिया | 09 |
| सीवान | 08 |
| मधुबनी | 08 |
| नवादा | 08 |
| औरंगाबाद | 08 |
| भागलपुर | 08 |
| मोतिहारी | 05 |
| दरभंगा | 05 |
| बांका | 05 |
| खगड़िया | 03 |
| जमुई | 03 |
| बेतिया | 02 |
| समस्तीपुर | 02 |
| सीतामढ़ी | 02 |
| सुपौल | 02 |
| जहानाबाद | 02 |
| शिवहर | 01 |
| किशनगंज | 01 |
| सहरसा | 01 |
| मधेपुरा | 01 |
| अररिया | 01 |
| बक्सर | 01 |
| छपरा | 01 |
30 जून: 11 की मौत
| सारण | 5 |
| पटना | 2 |
| नवादा | 2 |
| लखीसराय | 1 |
| जमुई | 1 |
2 जुलाई: 29 मौतें
| समस्तीपुर | 8 |
| पटना | 6 |
| मोतिहारी | 4 |
| शिवहर | 3 |
| कटिहार | 3 |
| मधेपुरा | 2 |
| पूर्णिया | 1 |
| सासाराम | 1 |
| बेतिया | 1 |
3 जुलाई: 8 की मौत
| समस्तीपुर | 3 |
| लखीसराय | 2 |
| गया | 1 |
| बांका | 1 |
| जमुई | 1 |
4 जुलाई: 29 मौतें
| भोजपुर | 9 |
| सारण | 5 |
| रोहतास | 4 |
| पटना | 2 |
| कैमूर | 2 |
| जहानाबाद | 2 |
| औरंगाबाद | 2 |
| बक्सर | 2 |
| सहरसा | 1 |
7 जुलाई: 7 की मौत
| बेगूसराय | 3 |
| भागलपुर | 1 |
| मुंगेर | 1 |
| कैमूर | 1 |
| जमुई | 1 |
8 जुलाई: 12 की मौत
| बेगूसराय | 7 |
| भागलपुर | 1 |
| मुंगेर | 1 |
| कैमूर | 1 |
| गया | 1 |
| जमुई | 1 |
9 जुलाई: 5 की मौत
| बांका | 2 |
| भोजपुर | 2 |
| कटिहार | 1 |
10 जुलाई: 7 की मौत
| भोजपुर | 2 |
| मुंगेर | 2 |
| सुपौल | 1 |
| कैमूर | 1 |
| बांका | 1 |
11 जुलाई: 16 की मौत
| अररिया | 5 |
| किशनगंज | 3 |
| पूर्णिया | 2 |
| कटिहार | 2 |
| सासाराम | 1 |
| औरंगाबाद | 2 |
| बांका | 1 |
19 जुलाई: 18 की मौत
| गया | 5 |
| पूर्णिया | 4 |
| बेगूसराय | 2 |
| जमुई | 2 |
| पटना | 1 |
| सहरसा | 1 |
| पूर्वी चंपारण | 1 |
| मधेपुरा | 1 |
| दरभंगा | 1 |
21 जुलाई: 17 की मौत
| बांका | 7 |
| नालंदा | 4 |
| जमुई | 3 |
| बेगूसराय | 1 |
| मोतिहारी | 1 |
| लखीसराय | 1 |
30 जुलाई: 8 की मौत
| शेखपुरा | 3 |
| जमुई | 3 |
| सीवान | 1 |
| बेगूसराय |