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Saturday, September 26, 2020

बिहार विधानसभा चुनाव: दिवाली से पहले जलेगी लालू की लालटेन या नीतीश फिर करेंगे धमाका? तीन चरणों में वोटिंग, 10 नवंबर को नतीजे

बिहार विधासभा चुनाव 2020 के लिए तारीखों का ऐलान हो गया है। इसके साथ ही राज्य में चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने शुक्रवार को मतदान और मतगणना की तारीखों का ऐलान किया। सीईसी ने बताया कि बिहार में तीन चरणों में वोटिंग होगी। 28 अक्टूबर, 3 और 7 नवंबर को वोट डाले जाएंगे और 10 नवंबर को मतगणना होगी यानी उस दिन पता चल जाएगा कि 14 नवंबर को कौन पटाखे जलाएगा और किसकी बत्ती गुल रहेगी।

बिहार में दशहरे से दिवाली के बीच लोकतंत्र का पर्व भी मनाया जाएगा। तीन चरणों में वोटिंग के जरिए 7 करोड़ से अधिक मतदाता यह तय करेंगे के कि अगले पांच साल तक बिहार की बागडोर किसके हाथों में होगी। 15 साल से सत्ता में काबिज नीतीश कुमार क्या एक बार फिर जीत हासिल कर पाएंगे या आरजेडी का 15 साल का बनवास खत्म हो पाएगा यह 10 नवंबर को साफ हो जाएगा।

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मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने बिहार विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान करते हुए कहा कि ये चुनाव बेहद असाधारण परिस्थितियों में कराये जा रहे हैं और इन परिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था के साथ साथ स्वास्थ्य संबंधी प्रोटोकोल के संबंध में व्यापक इंतजाम किये गए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि बिहार चुनाव तीन चरणों में होंगे, पहले चरण में 71 विधानसभा क्षेत्रों में मत पड़ेंगे, दूसरे चरण में 94 सीटों के लिए और तीसरे चरण में 78 सीटों पर मतदान होगा। बिहार चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान 28 अक्टूबर को होगा, दूसरे चरण का मतदान 3 नवंबर को और तीसरे चरण का 7 नवंबर को होगा। तीनों चरण के लिए मतगणना 10 नवंबर को होगी: चुनाव आयोग।

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उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण के कारण क्वारंटाइन में रहने वाले मतदाता या तो पोस्टल बैलट से मतदान कर सकते हैं या फिर वे अंतिम चरण के चुनाव के दिन अपने अपने मतदान केंद्रों में स्वास्थ्य अधिकारियों की देख रेख में मतदान करेंगे। बिहार विधानसभा चुनाव में मतदान एक घंटा अधिक यानी शाम छह बजे तक चलेगा, कोविड-19 रोगी आखिरी घंटे में मतदान कर सकते हैं।  

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मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव के लिए 7 लाख हैंड सैनिटाइजर, 46 लाख मास्क, 6 लाख पीपीई किट, 6.7 लाख फेस शील्ड और 23 लाख जोड़ी दस्तानों की व्यवस्था कर ली गई है। कोविड-19 के साए में होने जा रहे बिहार चुनाव के दौरान जहां भी जरूरत होगी और आग्रह किया जाएगा, वहां डाक मतदान की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।

एनडीए और महागठबंधन के बीच मुकाबला
बिहार विधानसभा चुनाव में एक तरफ नीतीश कुमार की अगुआई में जेडीयू, बीजेपी, हम जैसे दल हैं तो महागठबंधन की अगुआई लालू यादव के बेटे तेजस्वी संभाले हुए हैं। महागठबंधन में आरजेडी के साथ कांग्रेस है। एनडीए में लोजपा तो महागठबंधन से रालोसपा की खटपट चल रही है। एक तरफ नीतीश अपने 15 साल के कामकाज के आधार पर वोट मांगने जनता के बीच जाएंगे तो अपने पोस्टरों से लालू यादव को हटा चुके तेजस्वी यादव जनता का भरोसा जीतने को पूरा दमखम लगाएंगे। नीतीश कुमार को जहां बीजेपी के संगठन और पीएम मोदी की लोकप्रियता का फायदा मिलने की उम्मीद होगी तो आरजेडी को अपने परंपरागत वोटर्स को मजबूती से जोड़े रखना होगा।

किसके सामने क्या चुनौती?
नीतीश कुमार को 15 साल के एंटी-इनकंबेंसी का मुकाबला करना होगा तो तेजस्वी के लिए लालू की अनुपस्थिति में होने जा रहे चुनाव में लोगों का भरोसा जीतना है। उन्हें एक तरफ अपनी पार्टी को एकजुट करना होगा तो दूसरी तरफ गठबंधन सहयोगियों को सीट शेयरिंग में भी साधना होगा। इस बार चुनाव प्रचार भी केवल वुर्चुअल होगा, ऐसे में राजनीतिक दलों को मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने में काफी मशक्कत करनी होगी। इसके लिए एनडीए ने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी थी और बिहार में कई वर्चुअल रैलियां हो चुकी हैं। आरजेडी के कोर वोटर्स तकनीक और स्मार्टफोन की दुनिया से दूर माने जाते हैं। ऐसे में पार्टी को घर-घर चुनाव प्रचार पर फोकस करना होगा।

2015 में किस पार्टी को कितनी सीटें? 
पिछले विधासनभा चुनाव में आरजेडी, जेडीयू और कांग्रेस ने साथ चुनाव लड़ा था, जिसे महागठबंधन का नाम दिया गया था। महागठबंधन का सीधा मुकाबला बीजेपी, एलजेपी और हम गठबंधन के साथ था। चुनाव में 178 सीटों के साथ महागठबंधन ने बड़ी जीत हासिल की थी तो एनडीए 58 सीटों पर सिमट गया। दलगत देखें तो सबसे अधिक 80 सीटें आरजेडी ने जीतीं तो जेडीयू को 71 और कांग्रेस को 27 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। बीजेपी को 53, एलजेपी और आरएलएसपी को 2-2 और हम को एक सीट पर जीत मिली थी।