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Saturday, August 29, 2020

मधेपुरा/बीएनएमयू में अतिथि शिक्षकों की बहाली में गड़बड़ी का हुआ पर्दाफाश

मधेपुरा। बीएन मंडल विवि में कर्मचारी नियुक्ति में धांधली का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ कि अतिथि शिक्षक की बहाली में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की बात सामने आई है। यह पर्दाफाश तब हुआ जब मानदेय भुगतान को लेकर राज्य सरकार से राशि आवंटित होने के बावजूद अधिकांश अतिथि शिक्षकों के भुगतान पर सवाल खड़े हो गये है। अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में धांधली उजागर होने के बाद अब विवि प्रशासन यूजीसी के मापदंडों को पूरा नहीं करने वाले शिक्षकों के मानदेय भुगतान को रोकने की बात कह रही है।

विवि ने कहा कि कदापि ऐसे शिक्षकों का भुगतान नहीं होगा। साथ ही नियम-परिनियम के तहत बहाल अतिथि शिक्षकों का भुगतान विवि जल्द से जल्द करेगी। इसके लिए विवि ने चार सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया है। कमेटी तय करेगी कौन सही है और कौन गलत। बहरहाल कर्मचारी नियुक्ति ने फजीहत झेल रही विवि प्रशासन अब कोई भी कदम नियम संगत उठाने के पक्ष में है। नियुक्ति में यूजीसी के मापदंडों का नहीं किया गया पालन इतिहास गवाह है कि यहां नियम परिनियन को ताक पर रख कर कार्य किया जाता है। इसका ज्वलंत उदाहरण अतिथि शिक्षकों की बहाली है। बताया जाता है कि विवि में 196 अतिथि शिक्षकों की बहाली की गई। इसमें पहले उर्दू विषय में सीट नहीं रहने के बावजूद अतिरिक्त शिक्षकों की बहाली की गई, जिन्हें बाद में विवि द्वारा हटाया गया और 5 शिक्षक को अनुपस्थिति के कारण हटना पड़ा। शेष 186 में अधिकांश शिक्षक यूजीसी के मापदंडों को पूरा नहीं कर रहे हैं। इसमें कहा गया कि अभ्यार्थी के रिसर्च का एक पेपर यूजीसी से मान्यता प्राप्त जनरल में होना चाहिए। साथ ही 5 प्वाइंट में एक प्वांइट यूजीसी का नहीं होने पर वैसे अभ्यार्थी अयोग्य होंगे। इसके बावजूद यूजीसी के इन मानकों को पूरा नहीं करने वाले अतिथि शिक्षकों की थोक भाव में विवि बहाली कर दी।

आवंटन 180 पर भुगतान योग्य 150 भी नहीं, संशय में विवि अतिथि शिक्षकों के योगदान के 10 महीने बाद राज्य सरकार ने चार माह के मानदेय भुगतान की राशि विवि को आवंटित की। राशि आवंटन के साथ ही गड़बडी की कलई खुलने लगी। सबसे कॉलेजों ने अतिथि शिक्षकों के मानदेय भुगतान के लिए वर्गवार विवरणी विवि भेजी। उसी आधार पर विवि सरकार राशि आवंटन की मांग की। लेकिन भुगतान के समय यह खुलासा हुआ कि इनमें कई शिक्षक पूर्व से विभिन्न कॉलेजों में कार्यरत हैं और कई शोधार्थी हैं। अब सवाल उठता है ना तो इनसे बहाली के समय अवैतनिक अवकाश, त्याग पत्र या इससे संबंधित शपथ पत्र लिया गया और ना ही योगदान के समय। विवि सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार सरकार से आवंटन तो 180 अतिथि शिक्षकों का मिल गया है। परंतु इसमें भुगतान योग्य 150 शिक्षक भी नहीं हैं। यह अब जांच का विषय बन गया है।

केवाइपी जमा करने में असमर्थ हो रहे अतिथि शिक्षक बीएन मंडल विवि में भुगतान के बाबत कई शिक्षक केवाइपी जमा करने में असमर्थ हो रहे हैं। बताया जाता है कि इन अतिथि सहायक प्राध्यापकों को बहाल हुए 10 माह बीत चुका है। इनलोगों को पहली भुगतान होना है। जबकि विश्वविद्यालय कर्मियों का वेतन केवाईपी के माध्यम से खाता में भेज जाता है। लेकिन विश्वविद्यालय के कई अतिथि सहायक प्राध्यापकों ने अभी तक अपना केवाईपी फॉर्म अपने महाविद्यालय के द्वारा विश्वविद्यालय को नहीं भेजा है।

कोट यूजीसी के मापदंडों को पूरा नहीं करने वाले अतिथि सहायक शिक्षकों का मानदेय भुगतान विवि प्रशासन कदापि नहीं करेगी। इसके लिए विवि ने चार सदस्यीय कमेटी बना दी है। -डॉ कपिलदेव प्रसाद, कुलसचिव बीएनएमयू

यूजीसी के गाइडलाइन के अनुसार बहाली निकाली गई थी। यूजीसी के मापदंडों को पूरा नहीं करने वाले कुछ अतिथि शिक्षकों का भुगतान स्थगित रखा जाएगा। जांच कमेटी द्वारा जांच के बाद विवि न्यायसंगत निर्णय लेगी। -डॉ. आरकेपी रमण, निदेशक नियुक्ति कोषांग, बीएनएमयू