भागलपुर. खगड़िया के पसराहा के थानेदार आशीष सिंह हत्याकांड (SHO Ashish Singh Murder Case) का मुख्य आरोपी दिनेश मुनि पुलिस मुठभेड़ में मारा गया है. सुरा और सुन्दरी के शौकीन दिनेश मुनि (Dinesh Muni Encounter) को इसी शौक ने भवानीपुर के नारायणपुर दियारा में पुलिससिया मुठभेड़ में ढ़ेर करवा दिया. एनकाउंटर के बाद मौके से मिले दो कारर्बाइन और एक दोनाली बंदूक के साथ 14 बुलेट, चार कार्बाइन की गोली और खाली खोखा के साथ एक गैलन में तीन लीटर के करीब ताड़ी मिला. साथ ही मौका-ए-वारदात पर गिलास में बना नशा का पैग और चखना के अवशेष स्पष्ट बता रहे हैं कि बीती रात को जमा हुए कुख्यात दिनेश मुनि ने अपने साथियों के साथ दियारा में हथियार के साथ अय्याशी की थी.
कई दिनों से पुलिस ने बिछा रखा था जाल
वो अपने साथियों के साथ पुलिसिया कार्रवाई से बेखबर होकर अपराध की कोई योजना बना रहा थाजबकि पटना से आयी एसटीएफ की टीम कई दिनों से गुप्त सूचना पर लगातार उनके गतिविधियों पर नजर बनाये हुई थी. अंतत: रात के करीबन डेढ़ बजे स्थानीय पुलिस के साथ एसटीएफ की टीम ने नारायणपुर दियारा में धावा बोल दिया जिसके बाद अपने गुर्गों के साथ दिनेश मुनि ने पुलिस पर फायरिंग करना शुरू कर दिया. पुलिस की ओर से भी जवाबी हमला किया गया और इसमें दिनेश मुनि ढ़ेर हो गये वहीं उसके दो अन्य साथियों के गोली लगने की बात कही जा रही है जो रात के अंधेरे का फायदा उठाकर फरार होने में कामयाब रहे.
दियारा में आतंक का दूसरा नाम था दिनेशग्रामीणों की मानें तो दिनेश मुनि गिरोह का नवगछिया के नारायणपुर समेत खगड़िया के दियारा इलाके में खौफ था और वह दियारा इलाके में ही आतंकराज स्थापित किये हुए था. मांस-मदिरा के साथ कई ग्रामीण महिलाओं के साथ उसके अंतरंग संबंध होने की भी चर्चा जोरों पर है. कहा जाता है कि बीती रात भी एक घर में वो साथियों के साथ रूका हुआ था.
थानेदार की हत्या में थी एसटीएफ को तलाश
12 अक्टूबर 2018 को दियारा इलाके में अपराधियों के जमावड़े की सूचना पर खगड़िया पसराहा के थानेदार आशीष सिंह पुलिस बलों के साथ मुठभेड़ करते हुए नारायणपुर के दुधैला दियारा पहुंच गये थे जहां बदमाश श्रवण यादव को मार गिराने के बाद दिनेश मुनि की गोली का शिकार होकर शहीद हो गए थे. इस मुठभेड़ में एक सिपाही दुर्गेश यादव भी गोली लगने से घायल हो गया था.
दो सालों से थी एसटीएफ को तलाश
पुलिस दो सालों से लगातार दिनेश की गिरफ्तारी को लेकर अभियान चलाये हुए थी लेकिन ऐन वक्त पर पुलिस को गच्चा देकर वो फरार होने में कामयाब रहता था. कहा जाता है कि दियारा इलाके में उसने अपना मजबत नेटवर्क बना रखा था और पुलिसिया कार्रवाई की भनक लगते ही सुरक्षित ठिकानों पर चला जाता था. बहरहाल थानेदार आशीष सिंह हत्याकांड के मुख्य आरोपी का ढेर होना पुलिस के लिए एक बड़ी कामयाबी मानी जा सकती है.
वो अपने साथियों के साथ पुलिसिया कार्रवाई से बेखबर होकर अपराध की कोई योजना बना रहा थाजबकि पटना से आयी एसटीएफ की टीम कई दिनों से गुप्त सूचना पर लगातार उनके गतिविधियों पर नजर बनाये हुई थी. अंतत: रात के करीबन डेढ़ बजे स्थानीय पुलिस के साथ एसटीएफ की टीम ने नारायणपुर दियारा में धावा बोल दिया जिसके बाद अपने गुर्गों के साथ दिनेश मुनि ने पुलिस पर फायरिंग करना शुरू कर दिया. पुलिस की ओर से भी जवाबी हमला किया गया और इसमें दिनेश मुनि ढ़ेर हो गये वहीं उसके दो अन्य साथियों के गोली लगने की बात कही जा रही है जो रात के अंधेरे का फायदा उठाकर फरार होने में कामयाब रहे.
दियारा में आतंक का दूसरा नाम था दिनेशग्रामीणों की मानें तो दिनेश मुनि गिरोह का नवगछिया के नारायणपुर समेत खगड़िया के दियारा इलाके में खौफ था और वह दियारा इलाके में ही आतंकराज स्थापित किये हुए था. मांस-मदिरा के साथ कई ग्रामीण महिलाओं के साथ उसके अंतरंग संबंध होने की भी चर्चा जोरों पर है. कहा जाता है कि बीती रात भी एक घर में वो साथियों के साथ रूका हुआ था.
थानेदार की हत्या में थी एसटीएफ को तलाश
12 अक्टूबर 2018 को दियारा इलाके में अपराधियों के जमावड़े की सूचना पर खगड़िया पसराहा के थानेदार आशीष सिंह पुलिस बलों के साथ मुठभेड़ करते हुए नारायणपुर के दुधैला दियारा पहुंच गये थे जहां बदमाश श्रवण यादव को मार गिराने के बाद दिनेश मुनि की गोली का शिकार होकर शहीद हो गए थे. इस मुठभेड़ में एक सिपाही दुर्गेश यादव भी गोली लगने से घायल हो गया था.
दो सालों से थी एसटीएफ को तलाश
पुलिस दो सालों से लगातार दिनेश की गिरफ्तारी को लेकर अभियान चलाये हुए थी लेकिन ऐन वक्त पर पुलिस को गच्चा देकर वो फरार होने में कामयाब रहता था. कहा जाता है कि दियारा इलाके में उसने अपना मजबत नेटवर्क बना रखा था और पुलिसिया कार्रवाई की भनक लगते ही सुरक्षित ठिकानों पर चला जाता था. बहरहाल थानेदार आशीष सिंह हत्याकांड के मुख्य आरोपी का ढेर होना पुलिस के लिए एक बड़ी कामयाबी मानी जा सकती है.
