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Friday, May 8, 2020

खबरें जरा हटके।लौंडा बेरोजगार हो गए, कोरोना तेरे कारण..


कोरोना महामारी से आज हर कोई परेशान है। लोक परंपराओं से संबंध रखने वालों के सामने भी विकराल स्थिति उत्पन्न हो गई है। ऐसे में भोजपुरी अंचल की लोक संस्कृति की पहचान 'लौंडा नाच' के नर्तकों की घुंघरुओं की आवाज भी 'लॉक' हो गई है। कोरोना संकट के कारण सामाजिक समारोह ठप होने से कलाकार बेरोजगार हो गए हैं। शादी-विवाह में बैंड-बाजे की धुन पर थिरकने वाले लौंडों के पांव फिलवक्त पूरी तरह से थम गए हैं। इसी की बदौलत इनके परिवार की आजीविका चलती थी। लेकिन इस वर्ष लॉकडाउन की वजह से इनकी वर्षभर की कमाई चली गई। मार्च, अप्रैल व मई महीनों की लग्न में शादियां न होने से इन्हें बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है।

भोजपुरी के शेक्सपियर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर व महेंद्र मिसिर के सामा-चकेबा, झिझिया, पावरियां, लोरिकायन, गौड़ऊ, झूमर जैसे लोक नृत्यों के साथ भोजपुरी संस्कृति व सामाजिक लोक परंपराओं से जुड़े लौंडा नाच के कलाकार अब मानसिक परेशानियां झेलने को अभिशप्त हैं। बड़ी समस्या उन कलाकारों के समक्ष उत्पन्न हुई है, जो यूपी, बंगाल या झारखंड से लग्न शुरू होने के पहले ही यहां आ गए थे। इन कलाकारों के साथ स्थानीय नर्तकियों के सामने भी भुखमरी के हालात हो गए हैं। लॉकडाउन खत्म होने की आस में इन कलाकारों ने अबतक कोई दूसरा धंधा भी नहीं अपनाया है। कभी नहीं आया था ऐसा दुर्दिन :

लौंडा नाच के पुराने कलाकारों की मानें तो उनके जीवन में कभी ऐसा दुर्दिन नहीं आया था। डिलियां निवासी कलाकार 72 वर्षीय उमाराम कहते हैं, 35 वर्षो तक नर्तक रहा। फिलहाल, 16-17 वर्षो से बैंड पार्टी चला रहे हैं, पर ऐसा बुरा वक्त कभी नहीं आया। कोआथ निवासी अच्छेलाल पासवान बताते हैं, 10 वर्षो से लौंडा नाच का हिस्सा हूं। नाच की कमाई से ही पत्नी व दो बच्चों की आजीविका आराम से चल जाती थी। कभी दूसरे काम की जरूरत नहीं पड़ी। पर, इस वर्ष दूसरे के घर में मजदूरी करना पड़ रहा। संझौली के बुचन राम, हसनाडीह के रविंद्र मल्लाह सहित कई कलाकारों ने बताया कि मार्च से मई तक करीब दो दर्जन सट्टा था। उससे 25 से 30 हजार तक की कमाई हो जाती। अब बेरोजगारी दूर करने को दूसरा काम तलाश रहे हैं। कोरोना संकट में नर्तकियां भी झेल रहीं बेरोजगारी की मार :

बिक्रमगंज अनुमंडल की नाच पार्टी से जुड़ीं नर्तकियां भी लॉकडाउन में बेरोजगारी की मार झेलने को विवश हैं। संझौली, बिक्रमगंज, दिनारा, गंजभड़सरा, नासरीगंज, अमियावर, मिश्रवालिया, इटिम्हा, बडीहां जैसे कस्बों में चार दर्जन से अधिक नाच पार्टियां हैं। जिसमें 400 से अधिक नर्तकियों की जीविका का आधार नृत्य-संगीत ही है। बरातों में नृत्य कला का जौहर दिखा ये अपनी आजीविका चलाती हैं। लेकिन लॉकडाउन से अब आजीविका चलाना मुश्किल हो गया है। कहती हैं प्रसिद्ध नृत्यांगना बिजली रानी :

अनुमंडल के नटवार बाजार की रहने वाली प्रसिद्ध नृत्यांगना बिजली रानी कहती हैं, लॉकडाउन से नाचने-गाने वाले कलाकारों के समक्ष रोजगार व जीविका की बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है। ऐसे में कलाकार क्या करें, क्या नहीं? वे समझ नही पा रहें हैं।