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Saturday, May 2, 2020

BIHAR:आप्रवासी कामगारों व छात्रों के लिए जयपुर व कोटा से चल रहीं दो ट्रेनें, इसके पहले खूब हुई सियासत

Bihar Lockdown: बिहार की नीतीश कुमार सरकार (Nitish Kumar Government) ने लॉकडाउन (Lockdown) में देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे बिहार के कामगारों (Migrant Labourers) और छात्रों (Students) को वापस लाने के लिए स्पेशल ट्रेनें (Special Trains) चलाने की मांग की, जिसे केंद्र सरकार (Central Government)  ने मान लिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसके लिए विशेष ट्रेन (Special Train) चलाने का निर्देश दिया है।

लेकिन मुख्‍यमंत्री द्वारा आप्रवासियों को बसाें से नहीं लाने के फैसले से लेकर केंद्र सरकार द्वारा स्‍पेशल ट्रेनों के संचालन की अनुमति के बीच सियासत भी खूब हुई। बिहार विधानसभा (Bihar Assembly) में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) व राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) के बेटे तेजस्‍वी यादव (Tejashwi Yadav) ने सरकार पर जमकर तंज कसे।

बिहार सरकार ने सुझाया स्पेशल ट्रेन चलाने का उपाय

बुधवार को आप्रवासियों को वापस लाने के संबंध में केंद्र सरकार की अनुमति मिलने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा था कि उनके प्रस्ताव को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) ने स्वीकार कर लिया है। इसके बाद वापसी के तरीके और व्यवस्था को लेकर दिक्कतों का अनुमान लगाने के बाद गुरुवार को बिहार सरकार ने स्पेशल ट्रेन चलाने का उपाय सुझाया।

35 लाख लोगों को बसों से ले आना अव्यावहारिक

एक मोटे आकलन के अनुसार 35 से 40 लाख लोगों को बाहर से बिहार लाया जाना है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) की गाइडलाइन (Guideline) है कि लोगों को विभिन्न प्रदेशों से बसों से लाना होगा। बिहार सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस संबंध में मंथन किया और पाया कि इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए यह संभव नहीं कि इन्हें बसों से लाया जा सके। इसीलिए स्पेशल ट्रेन (Special Train) चलाने की मांग की गई। उपमुख्यमंत्री (Dy. CM) सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi) ने भी इस आशय का एक ट्वीट भी किया। पूर्व में भी मुंबई और अन्य जगहों से कोरोना काल में रेलवे ने दो विशेष ट्रेनें चलाई थीं। मुख्यमंत्री के कहने पर उनके ठहराव स्थल तय किए गए थे।

नोडल अफसर बनाकर दी गयी लाने की जिम्मेवारी

इस बीच आप्रवासियों को लाने की पूरी व्यवस्था के संचालन के लिए सरकार ने 19 नोडल अफसर बना कर उन्हें जिम्मेवारी सौंपी। अलग-अलग अधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेवारी दी गयी है। दो यह देखेंगे कि बाहर से आ रहे लोग किस तरह सीमा पर बने प्रमंडलस्तरीय सीमा राहत केंद्र में पहुंचेंगे। उन्हें सरकार के स्तर पर वाहन उपलब्ध कराकर सीमा राहत केंद्रों पर भेजा जाएगा। वहां उनकी जांच के लिए अलग से नोडल अफसर बनाए गए हैं। इसके बाद उन्हें प्रखंड स्तर पर बनाए गए स्मार्ट क्वरंटाइन सेंटरों पर भेज दिया जाएगा।

जयपुर व कोटा से चल रहीं दो स्‍पेशल ट्रेनें

इसके बाद शुक्रवार देर शाम खबर मिली कि केंद्र सरकार ने मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के स्‍पेशल ट्रेन के प्रस्‍ताव पर सहमति दे दी। बिहार सहित कई अन्‍य राज्यों ने भी ऐसा अनुरोध किया था। अब रेलवे बोर्ड और राज्य सरकारों के समन्वय से ट्रेनें चलेंगी। जयपुर-दानापुर श्रमिक स्पेशल ट्रेन जयपुर से शुक्रवार की रात 10 बजे खुल कर 02 मई को दोपहर 12.45 बजे दानापुर (पटना) पहुंचेगी। ट्रेन में स्लीपर क्लास के 18 तथा द्वितीय श्रेणी के चार कोच सहित कुल 24 कोच होंगे। शुक्रवार की रात 10 बजे कोटा से छात्रों के लिए एक स्‍पेशल ट्रेन भी चलेगी, जो शनिवार को दानापुर पहुंचेगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आप्रवासी कामगारों व छात्रों के लिए विशेष ट्रेन चलाए जाने को लेकर केंद्र सरकार को धन्यवाद दिया है।

मुद्दे पर गरमाई रही राजनीति, लालू-तेजस्‍वी ने किए हमले

मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा व्‍यावहारिक दिक्‍कतों के आधार पर बसों से आप्रवासियों को लाने से इन्‍कार तथा केंद्र सरकार द्वारा स्‍पेशल ट्रेनों की उनकी मांग मान लेने के बीच की अवधि में विपक्ष हमलावर रहा। आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव तथा उनके बेटे तेजस्‍वी यादव ने नीतीश कुमार पर जमकर तंज कसे।

बिहार सरकार को दो हजार बसें देने के लिए तैयार दिखे तेजस्वी

बाहर फंसे बिहारी कामगारों व छात्रों को बसों से लाने से मुख्‍यमंत्री के इन्‍कार पर तेजस्वी यादव ने अपनी ओर से दो हजार बसें देने की पेशकश की। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार के पास अगर संसाधनों की कमी है तो वे दो हजार बसें सौंपने के लिए तैयार हैं। नोडल और प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में सरकार इन बसों का इस्तेमाल कर सकती है। तेजस्वी ने यह भी पूछा कि सरकार बताए कि पटना से बसें कब भेजनी हैं। उन्‍होंने कहा कि अगर सरकार इसका श्रेय लेना चाहती है तो ले सकती है। यह सोचने का वक्त नहीं है। गरीबों की व्यथा सुनने का समय है। कोई किंतु-परंतु किए बगैर सरकार आगे बढ़े।

कसा तंज: बसें केवल 500, विज्ञापन खर्च 500 करोड़

इसके बाद तेजस्‍वी ने शुक्रवार को ट्वीट कर तंज कसा कि 15 सालों की नीतीश व भारतीय जनता पार्टी सरकार के पास बिहार में मात्र 600 बसें है। मगर सरकार का विज्ञापन खर्च 500 करोड़ है। उन्‍होंने एक अैर ट्वीट में यह भी लिखा कि सरकार 'जल-जीवन हरियाली' के नाम पर 24500 करोड़ खर्च करती है, लेकिन उसे लगभग 40 लाख आप्रवासी बिहारियों के जीवन की कोई चिंता नहीं है। सरकार के 15 साल के कथित विकास का भांडा फूट चुका है तथा सुशासनी दोहरापन उजागर हो चुका है।

कहा: अन्‍य राज्यों सरकारों से भाड़ा पर ले सकतें बसें

तेजस्‍वी ने ट्वीट में सवाल किया कि बिहार सरकार संबंधित राज्यों सरकारों से बातचीत कर उनकी बसों का प्रयोग क्यों नहीं करती? 55 घोटालों की रिकॉर्डधारी बिहार सरकार अगर उन्हें किराया देने में अक्षम है तो आरजेडी उन सरकारों को भाड़ा देगी। हरियाणा, मध्‍य प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात में इनकी ही सरकारें है, फिर परेशानी क्या है?

लालू बोले: आज वक्‍त आपका, कल जनता देगी जवाब

इस मुद्दे पर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने भी अपनी बात रखी। लालू ने गुरुवार को ट्वीट करके किसी का नाम लिए बगैर कहा कि आज आपका वक्त है, कल जनता जरूर जवाब देगी। लालू का इशारा मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार व राज्‍य सरकार की ओर था। अपनी बात कहने के लिए उन्होंने कबीर के दोहे का सहारा लिया। ट्वीट में लालू ने लिखा- माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रौंदे मोय, एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूंगी तोय। उन्‍होंने इशारे को समझाया है। उन्होंने लिखा कि कबीर के इस दोहे में मजदूरों की भावना और बिहार सरकार के लिए संदेश छिपा है। बिहार के बेटे-बेटियों के साथ जो रवैया राज्य सरकार अपना रही है, उस रवैये से करोड़ों दुखियारे इस सरकार के खिलाफ हो जाएंगे।