लॉकडाउन के बीच 22 मई को वट सावित्री का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की दीघार्यु और परिवार की सुख शांति के लिए वट सावित्री की पूजा करती हैं। पर्व को लेकर तैयारियां शुरू हो गई है।
हालांकि लॉकडाउन की वजह से बाजार बंद होने के कारण लोगों को कपड़े सहित अन्य सामान की खरीदारी करने में परेशानी हो रही है। पर्व को लेकर बांस से बने पंखे की बिक्री शुरू हो गई है। इसके अलावा फुटपाथ पर कुछ चूड़ियों व अन्य सामग्रियों की दुकानें सजी हुई हैं। शंकर चौक, दहलान चौक व आसपास के जगहों पर बांस से बने पंखे, चूड़ियां, बिंदी की दुकानें सज गई हंै। जहां लोग धीरे-धीरे खरीदारी करने में जूटे हैं। पर्व में वट और सावित्री दोनों का खास महत्व माना गया है। पीपल की तरह वट या बरगद के पेड़ का भी विशेष महत्व है। पुराणों के अनुसार वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु व महेश तीनों का वास होता है। व्रत में बरगद पेड़ के चारों ओर घूमकर रक्षा सूत्र बांधकर आशीर्वाद मांगा जाता है । सुहागिनों एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं।
सत्यवान और सावित्री की कथा सुनती हैं : पुजारी से सत्यवान और सावित्री की कथा सुहागिन सुनती हैं। वट सावित्री में बरगद पेड़ के नीचे बैठकर पूजन, व्रत कथा सुनने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। वट वृक्ष के नीचे बैठकर ही सावित्री ने अपने पतिव्रत से पति सत्यवान को दोबारा जीवित कर लिया था। एक अन्य कहानी में मार्कण्डेय ऋषि को भगवान शिव के वरदान से वट वृक्ष के पत्ते में पैर का अंगूठा चूसते बाल मुकुंद के दर्शन हुए थे।