पूर्णिया, मनोज कुमार। लॉकडाउन के बाद भी दूसरे प्रदेशों से प्रवासी मजदूरों का बिहार में आना जारी है। खासकर पूर्णिया में तो लॉकडाउन को ताख पर रख दिया गया है। सीमांचल के इस जिले में प्रवासी मजदूरों के आने का सिलसिला थम नहीं रहा है। इसके कारण पूर्णिया समेत सीमांचल के अन्य जिलों में कोरोना वायरस का चेन टूटने और उसका प्रकोप बढऩे की आशंका खड़ी हो गई है। जिला अधिकारी राहुल कुमार ने बताया कि बाहर से आए मजदूरों की लगातार मॉनीटरिंग की जा रही है। उनकी स्क्रीनिंग के बाद उन्हें क्वारंटाइन में रखा जा रहा है। अभी विद्यालयों में बने 45 क्वारंटाइन कैंपों में वैसे 795 लोग रखे गए हैं, जबकि 489 लोंगों को जांच के बाद वहां से मुक्त कर दिया गया है।
दिल्ली, पंजाब आदि से बड़ी संख्या में आ रहे लोग
जिले की बड़ी आबादी रोजी-रोटी की जुगाड़ के लिए दूसरे प्रदेशों में काम करते है। एक गैर सरकारी संस्था के आंकड़े के अनुसार यहां के 20 प्रतिशत युवा अपने और परिवार के भरण-पोषण के लिए बड़े महानगरों में काम कर रहे हैं। उनमें से अधिकांश लोग दिल्ली, पंजाब, एनसीआर, महाराष्ट्र आदि शहरों में प्रवास करते हैं। ये वे इलाके हैं, जो कोरोना संक्रमण के हॉट स्पॉट एरिया के रूप में चिह्नित हैं। उन इलाकों से बड़ी संख्या में मजदूर एवं अन्य लोग जैसे-तैसे पूर्णिया लौट रहे हैं।
दूसरे प्रदेश से 5000 तो विदेश से आए 136 लोग
जिला प्रशासन के अनुसार 25 मार्च से 12 अप्रैल के बीच 5052 लोग दूसरे प्रदेशों से ट्रक, पिकअप वैन, जुगाड़ गाड़ी, पैदल यहां पहुंचे हैं। उन लोगों को तो क्वारंटाइन कर दिया गया है। विदेशों से आए सभी लोगों को भी जांच पूरी होने तक क्वारंटाइन में रखा गया, लेकिन मजदूरों के आने का सिलसिला अभी तक थमा नहीं है। राज्य की सभी सीमाएं सील हैं। इसके बावजूद 11 अप्रैल को एक ट्रक पर सवार होकर 60 मजदूर यहां आए। 12 अप्रैल को राजस्थान से छह लोग कार से यहां पहुंचे। पुन: 14 अप्रैल को ट्रक से ही 71 मजदूर दिल्ली से पूर्णिया पहुंचे। कई लोग पैदल भी घर लौट रहे हैं। हालांकि ग्रामीणों की जागरूकता एवं जिला प्रशासन की सतर्कता से उन मजदूरों की जानकारी प्रशासन को मिल रही है। इसके बावजूद कई लोग अपने गांव जाने में सफल हो जा रहे हैं।