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सहरसा। देश में नोवल कोरोना को राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया गया है परंतु सहरसा नगर परिषद ने इससे लोगों को बचाने व सर्तकता को लेकर अभी तक कोई खास पहल नहीं की है। इसका परिणाम है कि बस स्टैंड ही नहीं बल्कि शहर के तमाम हिस्सों में फैली गंदगी बीमारियों को आमंत्रित कर रही है।
हालांकि नगर परिषद ने शहर की साफ-सफाई का काम एनजीओ के हवाले कर दिया है। इसका लोगों ने पुरजोर विरोध भी किया था लेकिन इससे नप प्रशासन को कोई फर्क नहीं पड़ा। ऐसे में हर माह लाखों की राशि साफ-सफाई पर खर्च की जाने लगी। लेकिन शहर की सड़कों पर फैली गंदगी देखकर यह तो तय है कि कोरोना से लड़ने के लिए नगर परिषद तैयार नहीं है। बस पड़ाव में फैले कीचड़ व गंदगी के बीच से लोगों को गुजरने की मजबूरी बनी हुई है। बसों में क्षमता से अधिक सवारियों को ढोया जा रहा है। लेकिन बस में सैनिटाइजर की कोई व्यवस्था नहीं है यानि पूरी व्यवस्था भगवान के भरोसे है। वैसे, नप के अधिकारी साफ-सफाई का दावा करते हैं लेकिन उफनती नालियां, सड़क किनारे और कूड़ेदानों में पड़ी गंदगी, इनके दावों की पोल खोल रही है।
जागरूकता तक सिमटा है रेलवे
नोवल कोरोना से बचाव को लेकर भीड़भाड़ वाले इलाके में सैनिटाइजर के प्रयोग की योजना पूरी तरह से फ्लाप नजर आ रही है। रेलवे स्टेशन पर सिर्फ उद्घोषणा कर कोरोना से नहीं डरने की औपचारिकता पूरी की जा रही है। जाहिर है कि कोरोना स लड़ने को लेकर रेलवे प्रशासन भी अक्षम दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि रेलवे स्टेशन और उसके आसपास में कूड़े-कचरे का ढेर जमा है। वहीं ट्रेनों में गंदगी के बीच लोग यात्रा करने के लिए मजबूर हो रहे हैं। हालांकि रविवार को स्टेशन पर यात्रियों की तादाद कम दिखी परंतु इन्हें बचाव के लिए जानकारी के सिवा कुछ भी नहीं किया जा रहा है।
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सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाह
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कोरोना को लेकर सोशल मीडिया पर भी तरह-तरह की अफवाह फैलाई जा रही है। इससे बचाव के अलग-अलग तरीके भी सुझाए जा रहे हैं। लेकिन डर का माहौल भी बनाया जा रहा है। वैसे, सीएस डॉ. ललन प्रसाद सिंह की मानें तो इस इलाके में फिलहाल एक भी संदिग्ध मरीज नहीं आया है। लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। सामान्य खांसी होना कोरोना नहीं हो सकता है। यह मौसम का असर या फ्लू हो सकता है। इससे घबराएं नहीं बल्कि चिकित्सक से संपर्क कर अपना समुचित इलाज कराएं।
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मॉस्क की बढ़ी डिमांड
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शहर से लेकर गांव तक लोग मॉस्क लगाकर घूमने लगे हैं। जिस कारण इसकी डिमांड काफी बढ़ गई है। बाजार में जो मॉस्क बीस से तीस रुपये में मिलता था उसकी कीमत सौ से ड़ेढ़ सौ रुपये हो गई है। वैसे, जानकारों की मानें तो आम लोगों को मॉस्क लगाने की कोई जरूरत नहीं है। एन 95 नामक मॉस्क से इसका बचाव होता है लेकिन यह सिर्फ स्वास्थ्य कर्मियों व चिकित्सक के लिए चाहिए जो इस वायरस से प्रभावित लोगों का इलाज कर रहे हैं। बाकी लोगों को मॉस्क लगाने की अधिक आवश्यकता नहीं है।
