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मधेपुरा । एनएच 106 पर 166 करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद एनएच की स्थिति में कोई सुधार नहीं है। टुकड़े-टुकड़े में किए गए कार्यों की वजह से लोगों को कोई राहत नही मिल पाई है। साढ़े तीन वर्ष पूर्व ही कार्य आवंटित करने और एकरारनामा करने के बावजूद निर्माणकर्ता एजेंसी द्वारा काफी धीमी गति से कार्य किया जा रहा है। हालात यह है कि कार्य समाप्ति के लिए निर्धारित छह माह का समय ही मात्र बचा हुआ है। जबकि 80 प्रतिशत से अधिक कार्य अभी भी बाकी है।
एनएच 106 को लेकर जब दैनिक जागरण ने आरटीआइ के माध्यम से जानकारी मांगी। तब यह बात सामने आई कि अब तक सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय द्वारा आइएलएफएस को 166 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इस एनएच को बनाये जाने का भार आइएलएफएस को सौंपा गया था। तीन अक्टूबर 2016 को ही कंपनी के साथ चार वर्षो में कार्य पूरा करने का एकरारनामा किया गया।
एकरारनामा के अनुसार अक्टूबर 2020 में कार्य को पूरी तरह समाप्त कर देना था। लेकिन अब महज छह माह शेष रहा है। ऐसे में समय पर कार्य पूरा करना मुश्किल है। 675 करोड़ से होना है कार्य
एनएच 106 में बीरपुर के पास से लेकर उदाकिशुनगंज तक के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने 675 करोड़ रुपये स्वीकृत किया है। इस राशि से सड़क, पुल पुलिया के निर्माण करना है। आइएलएफएस को 106 किलोमीटर एनएच और पुल पुलिया निर्माण का कार्य सौंपा गया। इसे दो अक्टूबर तक पूर्ण करना है। लेकिन कंपनी द्वारा 106 किलोमीटर सड़क निर्माण के विरुद्ध मात्र 21 किलोमीटर सड़क ही बना पाई है। हाई कोर्ट कर रही है निगरानी एनएच 106 के कार्यो की निगरानी हाई कोर्ट भी कर रही है। बीते वर्ष जनवरी में हाई कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायधीश मधेपुरा आए थे। उदाकिशुनगंज अनुमंडल न्यायालय निरीक्षण को मुख्य न्यायाधीश एनएच 106 के रास्ते उदाकिशुनगंज तक गए थे। सड़क की जर्जर हालत व उड़ते धूल को देखकर उन्होंने इस यात्रा को वैतरणी की यात्रा बताया था। यहां अधिकारियों को फटकार भी लगाई। पटना वापस जाते ही उन्होंने स्वत: संज्ञान लेकर मुकदमा चलाया। उसके बाद से लगातार हाई कोर्ट में इसकी सुनवाई हो रही है। हाई कोर्ट के कड़े रुख के बाद आइएलएफएस ने कार्य को तीन भाग में बांट कर दो भाग का कार्य किसी दूसरे कंपनी को दिया। यद्यपि इसके बाद भी बहुत फर्क नहीं पड़ा। कार्य की रफ्तार अत्यधिक धीमी ही है।
आइएलएफएस कर रही बहानेबाजी
निर्माणकर्ता एजेंसी बार-बार बहानेबाजी कर रही है। हाई कोर्ट ने जब निर्माण कार्य मे विलंब के लिए फटकार लगाई तो इन्होंने बताया कि अतिक्रमण के कारण कार्य नहीं कर पा रहे हैं। इस जबाब के बाद हाई कोर्ट ने एनएच के मुख्य अभियंता की अध्यक्षता में एक कमेटी बना दी। जिन्हें यह जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया कि अतिक्रमण कितने किलोमीटर में है। इस आदेश के आलोक में हाई कोर्ट द्वारा गठित कमेटी ने एक एवं दो मार्च को बीरपुर से उदाकिशुनगंज तक एनएच 106 का जाजया लिया। इसमें पाया गया कि महज दो किलोमीटर एनएच ही अतिक्रमित है जहां कार्य करने में कठिनाई है। कमेटी ने हाई कोर्ट को पांच मार्च को हुई सुनवाई के दौरान अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।
