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सुपौल : बिहार में सुपौल के त्रिवेणीगंज में साढ़े तीन लाख रुपये लूट की शिकायत करने पहुंचे फौजी को पुलिस ने न्याय देने के बजाय उल्टे उसे ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. कमाल की बात है कि फौजी को जेल भेजने में पुलिस द्वारा इतनी गोपनीयता व सतर्कता बरती गयी जैसे किसी आतंकवादी को जेल भेजा जा रहा हो. हालांकि, थानाध्यक्ष व अन्य पुलिसकर्मी द्वारा अब तक यह नहीं बताया जा रहा कि फौजी को किस मामले में जेल भेजा गया.
मामले को लेकर पुलिस ने पूरी तरह चुप्पी साध ली है. थानाध्यक्ष सुधाकर कुमार ने सिर्फ इतना कहा कि सुपौल भेजा गया है. जबकि, एसडीपीओ गणपति ठाकुर ने मारपीट मामले में जेल भेजे जाने की बात कही. लूट कांड के पीड़ित की मां ने अपने फौजी बेटे को जेल भेजे जाने की पुष्टि की है. हालांकि, उन्हें भी नहीं पता है कि उसके बेटे को किस आरोप में जेल भेजा गया है.
मालूम हो कि बीते मंगलवार को फौजी मनोज भवन निर्माण के लिए सामग्री खरीदने के लिये रुपये लेकर बाजार जा रहे थे. तभी टाउन हाल के समीप अपराधियों ने उसके रुपये लूट लिये. बताया जाता है कि घटना की लिखित शिकायत के बाद पुलिस ने त्वरित कार्यवाही करते हुए एक आरोपित की शिनाख्त की थी. लेकिन, बुधवार को पुलिस पीड़ित फौजी के पुत्र को पकड़ कर थाना ले आयी और एक कमरे में उसके साथ थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया.
पीड़ित फौजी को अपनी आंखों के सामने बेटे की पिटाई बर्दाश्त नहीं हुई. उन्होंने पुलिस से बेटे के पकड़ने और पीटने का कारण पूछा. जिसके बाद पुलिस ने मां और बेटे के सामने ही फौजी की जम कर पिटाई कर दी तथा हाजत में बंद कर दिया. हालांकि, कुछ लोगों का कहना है कि बेटे को बचाने के लिए फौजी ने कड़ा प्रतिरोध किया था. इसी बात को लेकर पुलिस ने इसे अपनी प्रतिष्ठा बनाते हुए गुरुवार को उन्हें जेल भेज दिया. बहरहाल पुलिस का यह अमानवीय व्यवहार लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है. हैरत की बात है कि पुलिस इस संबंध में मीडिया को भी कोई औपचारिक जानकारी नहीं दे रही है.
सुपौल : बिहार में सुपौल के त्रिवेणीगंज में साढ़े तीन लाख रुपये लूट की शिकायत करने पहुंचे फौजी को पुलिस ने न्याय देने के बजाय उल्टे उसे ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. कमाल की बात है कि फौजी को जेल भेजने में पुलिस द्वारा इतनी गोपनीयता व सतर्कता बरती गयी जैसे किसी आतंकवादी को जेल भेजा जा रहा हो. हालांकि, थानाध्यक्ष व अन्य पुलिसकर्मी द्वारा अब तक यह नहीं बताया जा रहा कि फौजी को किस मामले में जेल भेजा गया.
मामले को लेकर पुलिस ने पूरी तरह चुप्पी साध ली है. थानाध्यक्ष सुधाकर कुमार ने सिर्फ इतना कहा कि सुपौल भेजा गया है. जबकि, एसडीपीओ गणपति ठाकुर ने मारपीट मामले में जेल भेजे जाने की बात कही. लूट कांड के पीड़ित की मां ने अपने फौजी बेटे को जेल भेजे जाने की पुष्टि की है. हालांकि, उन्हें भी नहीं पता है कि उसके बेटे को किस आरोप में जेल भेजा गया है.
मालूम हो कि बीते मंगलवार को फौजी मनोज भवन निर्माण के लिए सामग्री खरीदने के लिये रुपये लेकर बाजार जा रहे थे. तभी टाउन हाल के समीप अपराधियों ने उसके रुपये लूट लिये. बताया जाता है कि घटना की लिखित शिकायत के बाद पुलिस ने त्वरित कार्यवाही करते हुए एक आरोपित की शिनाख्त की थी. लेकिन, बुधवार को पुलिस पीड़ित फौजी के पुत्र को पकड़ कर थाना ले आयी और एक कमरे में उसके साथ थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया.
पीड़ित फौजी को अपनी आंखों के सामने बेटे की पिटाई बर्दाश्त नहीं हुई. उन्होंने पुलिस से बेटे के पकड़ने और पीटने का कारण पूछा. जिसके बाद पुलिस ने मां और बेटे के सामने ही फौजी की जम कर पिटाई कर दी तथा हाजत में बंद कर दिया. हालांकि, कुछ लोगों का कहना है कि बेटे को बचाने के लिए फौजी ने कड़ा प्रतिरोध किया था. इसी बात को लेकर पुलिस ने इसे अपनी प्रतिष्ठा बनाते हुए गुरुवार को उन्हें जेल भेज दिया. बहरहाल पुलिस का यह अमानवीय व्यवहार लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है. हैरत की बात है कि पुलिस इस संबंध में मीडिया को भी कोई औपचारिक जानकारी नहीं दे रही है.
