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Saturday, January 18, 2020

खबरें जरा हटके:जेएनयू : जिस पर हम सबको नाज है

कोशी लाइव_नई सोच नई खबर।

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)द्वारा आयोजित भारतीय आर्थिक सेवा (IES) परीक्षा-2019 के घोषित परिणाम काफी चर्चा में है।यह खबर इसलिए सुर्खियों में है कि केवल बत्तीस सीटों के लिए घोषित  सफल अभ्यर्थियों की सूची में अठारह अभ्यर्थी केवल जेएनयू के छात्र हैं। दिल्ली स्थित देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय न सिर्फ छात्र आंदोलन के लिए प्रसिद्ध है ब्लकि उच्च शिक्षा में भी अपना एक विशिष्ट स्थान रखती है। यहाँ से पढ़ाई कर चूके बहुत से स्टुडेंट्स देश सेवा से जुड़े अहम पदों पर कार्यरत हैं। इतना ही नहीं यहाँ से उत्तीर्ण विद्यार्थियों का एक बड़ा तबका विदेशों में भी अपनी प्रतिभा की छाप छोड़ रहे हैं। विडम्बना है कि कुछ विशेष विचारधारा के लोग इसे सहन नहीं कर पा रहे हैं और  लागातार इसे बदनाम करने के असफल प्रयासों में जुटी हैं। इस न्यूज ने उस मिथक को तोड़ दिया है जिसे हाल के दिनों में बढ़ा चढ़ाकर पेश करने की कोशिश की गई है। निःसंदेह यहाँ के छात्र,आंदोलन व विरोध प्रदर्शन के द्वारा सरकार के कुनीतियों के खिलाफ मुखरता से अपनी बात रखता रहा है और  लोकतांत्रिक देश में संविधान उन्हें यह हक भी देता है।यद्यपि सरकार और उसके समर्थक अपनी आलोचना सहन नहीं कर सकते और उसे दबाने का प्रयत्न भी करती है लेकिन अपने आलोचकों को दबाने के लिए अपने ही देश के प्रतिष्ठित संस्थान को बदनाम करने लगे यह कभी भी न्यायोचित नहीं है। मात्र 32 सीटों के लिए UPSC द्वारा आयोजित इंडियन इकोनॉमिक्स सर्विस (IES) की परीक्षा में जेएनयू के अठारह छात्रों का सफल होना इस बात की दलील है कि यहाँ के छात्र सिर्फ आंदोलनों में ही अपना समय बर्बाद नहीं करते ब्लकि वह अपनी पढ़ाई भी उसी लगन और परिश्रम के साथ करते हैं।बार बार टैक्स पेयर के पैसों की बर्बादी का तर्क देने वालों की आँखें आज भी न खुले तो इस से बड़ी विडम्बना और क्या होगी? यह खबर उन्हें भी झकझोर देने के लिए काफी है जो विश्वविद्यालय प्रशासन के फीस वृद्धि के फैसले को बिना सोच समझे जायज करार देते हैं।निःसंदेह फीस वृद्धि पर सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को गंभीरता से विचार कर अपने फैसले को वापस लेना चाहिए ताकि देश के उन छात्रों को भी उच्च शिक्षा का मौका मिल सके जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं।हमें देश के ऐसे शिक्षण संस्थानों पर गर्व है।

 

✒️मंजर आलम (स्वतंत्र टिप्पणीकार
)