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रितेश हन्नी।
_लम्बे समय से थे बीमार, दिल्ली के अस्पताल में ली अंतिम सांस, लीवर कैंसर से थे पीड़ित_
सहरसा :- बिहार के राजनीतिक गलियारे से इस वक्त की दुखद खबर सामने आ रही है। सहरसा जिले के महिषी विधानसभा क्षेत्र से विधायक व पुर्व मंत्री अब्दुल गफूर की मौत हो गई। वे आरजेडी के पुराने नेताओं में गिने जाते थे। अब्दुल गफूर पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की खबर मिलते ही क्षेत्र सहित जिले में शोक की लहर दौड़ पड़ी। आरजेडी विधायक अब्दुल गफूर पिछले कई दिनों से बीमार थे पहले उन्हें इलाज के लिए पटना के पारस हॉस्पिटल में भी भर्ती कराया गया था लेकिन तबीयत में सुधार नहीं होने के कारण बाद में उन्हें दिल्ली ले जाया गया। जहां इलाज के दौरान दिल्ली के अस्पताल में ही उन्होंने अंतिम सांस ली। बताते चलें कि आरजेडी विधायक अब्दुल गफ्फूर लिवर कैंसर से पीड़ित थे। लगातार उनका इलाज चल रहा था। 5 मई 1959 को उनका जन्म सहरसा जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था। सिमरी बख्तियारपुर से स्कूली शिक्षा पाने वाले डॉ० अब्दुल गफूर ने सहरसा कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली और फिर पटना विश्वविद्यालय से MA की पढ़ाई पूरी की उन्होंने उर्दू में पीएचडी की उपाधि भी ली। 1995 में अब्दुल गफूर ने कांग्रेस के दिग्गज नेता लहटन चौधरी को महिषी विधानसभा सीट पर मात देकर सनसनी फैला दी थी। जनता दल से अलग होकर लालू यादव ने जब राष्ट्रीय जनता दल का गठन किया तब अब्दुल गफूर उनके साथ आ गए। वह लगातार महिषी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे। बिहार में 2015 में बनी महागठबंधन की सरकार में अब्दुल गफूर अल्पसंख्यक विभाग के मंत्री भी रहे। उनकी मौत से कोसी ने एक नेता खो दिया जिसकी भरपाई निकट भविष्य में सम्भव नहीं है।
रितेश हन्नी।
आरजेडी विधायक अब्दुल गफूर का निधन, CM नीतीश ने जताया शोक, कहा- राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
_लम्बे समय से थे बीमार, दिल्ली के अस्पताल में ली अंतिम सांस, लीवर कैंसर से थे पीड़ित_
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जताया शोक
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पूर्व मंत्री अब्दुल गफूर के निधन पर गहरी शाेक संवेदना व्यक्त की है. मुख्यमंत्री ने अपने शाेक संदेश में कहा कि वे एक प्रख्यात राजनेता एवं प्रसिद्ध समाजसेवी थे. उनके निधन से राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में अपूरणीय क्षति हुई है. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ईश्वर से प्रार्थना है कि वे उन्हें जन्नत में अहम मकाम अता करे और उनके परिवार वालाें काे इस अपूरणीय क्षति काे सहन करने की ताकत दें. साथ ही मुख्यमंत्री ने अब्दुल गफूर का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किये जाने की घोषणा की है.
अब्दुल गफूर का जीवन वृत्त
अब्दुल गफूर का जन्म सहरसा जिले के एक छोटे से गांव में पांच मई, 1959 को हुआ था. उनके पिता का नाम मोहम्मद जमाल था. साल 1974 में मात्र 15 वर्ष की आयु में वह राजनीति में प्रवेश कर गये थे. साल 1995 में वह जेडीयू के टिकट पर महिषी से चुनाव लड़े थे. हालांकि, साल 1997 में वह आरजेडी में शामिल हो गये थे. इसके बाद साल 2000, 2010 और 2015 में महिषी से चुनाव जीते थे. हालांकि, 2005 में उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. मास्टर की डिग्री हासिल करने के बाद पीएचडी करनेवाले अब्दुल गफ्फूर 20 नवंबर, 2015 से 26 जुलाई 2017 तक बिहार सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री भी रहे.
सहरसा :- बिहार के राजनीतिक गलियारे से इस वक्त की दुखद खबर सामने आ रही है। सहरसा जिले के महिषी विधानसभा क्षेत्र से विधायक व पुर्व मंत्री अब्दुल गफूर की मौत हो गई। वे आरजेडी के पुराने नेताओं में गिने जाते थे। अब्दुल गफूर पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की खबर मिलते ही क्षेत्र सहित जिले में शोक की लहर दौड़ पड़ी। आरजेडी विधायक अब्दुल गफूर पिछले कई दिनों से बीमार थे पहले उन्हें इलाज के लिए पटना के पारस हॉस्पिटल में भी भर्ती कराया गया था लेकिन तबीयत में सुधार नहीं होने के कारण बाद में उन्हें दिल्ली ले जाया गया। जहां इलाज के दौरान दिल्ली के अस्पताल में ही उन्होंने अंतिम सांस ली। बताते चलें कि आरजेडी विधायक अब्दुल गफ्फूर लिवर कैंसर से पीड़ित थे। लगातार उनका इलाज चल रहा था। 5 मई 1959 को उनका जन्म सहरसा जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था। सिमरी बख्तियारपुर से स्कूली शिक्षा पाने वाले डॉ० अब्दुल गफूर ने सहरसा कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली और फिर पटना विश्वविद्यालय से MA की पढ़ाई पूरी की उन्होंने उर्दू में पीएचडी की उपाधि भी ली। 1995 में अब्दुल गफूर ने कांग्रेस के दिग्गज नेता लहटन चौधरी को महिषी विधानसभा सीट पर मात देकर सनसनी फैला दी थी। जनता दल से अलग होकर लालू यादव ने जब राष्ट्रीय जनता दल का गठन किया तब अब्दुल गफूर उनके साथ आ गए। वह लगातार महिषी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे। बिहार में 2015 में बनी महागठबंधन की सरकार में अब्दुल गफूर अल्पसंख्यक विभाग के मंत्री भी रहे। उनकी मौत से कोसी ने एक नेता खो दिया जिसकी भरपाई निकट भविष्य में सम्भव नहीं है।
