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मधेपुरा।,नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती वार्ड नंबर 13 मधेपुरा के द्वारिकाधीश छात्रावास में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया । आंतरिक परिवाद समिति सदस्य सह काउंसिल मेंबर स्नातकोत्तर विज्ञान संकाय भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा के बिट्टू कुमार की अध्यक्षता में मनाया गया ।इस मौके पर आंतरिक परिवाद समिति सदस्य सह काउंसिल मेंबर स्नातकोत्तर विज्ञान संकाय बिट्टू कुमार ने कहा कि- नेताजी सुभाष चंद्र बोस का नारा था । "तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा ।" जो उस समय अत्यधिक प्रचलन में आया । भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता, नेता जी थे । द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिए उन्होंने जापान के सहयोग से , जय हिंद फौज का गठन किया था । उनके द्वारा दिया गया "जय हिंद" का नारा भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया । नेता जी की 5 जुलाई 1943 को सिंगापुर के टाउन हॉल के सामने सुप्रीमो कमांडर के रूप में सेना को संबोधित करते हुए दिल्ली चलो का नारा दिया । नेताजी सुभाष चंद्र बोस सर्वकालिक नेता थे । जिनकी जरूरत कल भी थी, आज भी है और आने वाले पीढ़ी को भी होगी । वह ऐसे वीर सैनिक थे ,इतिहास जिनकी गाथा गाता रहेगा । उनके विचार ,कर्म और आदर्श अपनाकर राष्ट्र वह सब कुछ कर सकता है, जिसका वह हकदार है । नेता जी का कथन था - "मुझे यह नहीं मालूम कि स्वतंत्रता के इस युद्ध में हम में से कौन - कौन जीवित बचेंगे , परंतु मैं यह जानता हूं कि अंत में विजयी हमारी ही होगी । यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता का मोल खून से चुकाए ।"
इसी मौके पर भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के वाणिज्य संकाय के विभागीय परिषद सदस्य , प्रभु कुमार ने कहा - नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्वतंत्रता समर के अमर सेनानी, मां भारती के सच्चे सपूत थे ।नेताजी भारतीय स्वाधीनता संग्राम के उन योद्धाओं में से एक थे , जिनका नाम और जीवन आज भी करोड़ों देशवासियों को मातृभूमि के लिए समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा देता है । उनमें नेतृत्व के चमत्कारी गुण थे ,जिनके बल पर उन्होंने आजाद हिंद फौज की कमान संभाल कर अंग्रेजों को भारत से निकाल बाहर करने के लिए एक मजबूत सशस्त्र प्रतिरोध खड़ा करने में सफलता हासिल की थी । नेताजी के द्वारा कहे गए कथन - "एक ही इच्छा होनी चाहिए मरने की इच्छा, ताकि भारत जी सके। एक शहीद की मौत ,मरने की इच्छा ताकि स्वतंत्रता का मार्ग शहीदों के खून से प्रशस्त हो सके ।" उन्होंने यह भी कहा " मेरे पास एक लक्ष्य है, जिसे मुझे हर हाल में पूरा करना है । मेरा जन्म उसी के लिए हुआ है ।मुझे नैतिक विचारों की धारा में ही बहना है।"
इसी मौके पर टीपी कॉलेज के रसायन शास्त्र विभाग के युवा छात्र नेता अमित आनंद ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के कथन -"संघर्ष ने मुझे मनुष्य बनाया मुझमें आत्मविश्वास उत्पन्न हुआ जो पहले मुझ में नहीं था।" दोहराया।
वही टीपी कॉलेज के हिंदी विभाग के युवा छात्र नेता अभिषेक कुमार उर्फ मंटू यादव ने कहा कि राष्ट्रवाद मानव जाति के उच्चतम आदर्श सत्य शिव और सुंदर से प्रेरित है।जीवन में प्रगति का आशय यह है कि संघर्ष का संदेह उठते रहे और उनके समाधान का प्रयास क्रम चलता रहे ।
वहीं प्रमोद कुमार उर्फ बबलू कुशवाहा ने कहा कि नेताजी अपने परिवार के बारे में न सोच कर , पूरे देश के बारे में सोचा । नेता जी के जीवन के कई और पहलू हमें एक नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।
इस मौके पर उपस्थित छात्र नेता प्रभु कुमार, प्रमोद कुमार उर्फ बबलू कुशवाहा, ऋषभ सिंह ,भूषण कुमार ,अमित आनंद , सिकंदर कुमार ,मिथिलेश ,शशिकांत ,बाबुल ,शहजाद आलम आदि मौजूद थे।
मधेपुरा।,नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती वार्ड नंबर 13 मधेपुरा के द्वारिकाधीश छात्रावास में पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया । आंतरिक परिवाद समिति सदस्य सह काउंसिल मेंबर स्नातकोत्तर विज्ञान संकाय भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा के बिट्टू कुमार की अध्यक्षता में मनाया गया ।इस मौके पर आंतरिक परिवाद समिति सदस्य सह काउंसिल मेंबर स्नातकोत्तर विज्ञान संकाय बिट्टू कुमार ने कहा कि- नेताजी सुभाष चंद्र बोस का नारा था । "तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा ।" जो उस समय अत्यधिक प्रचलन में आया । भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता, नेता जी थे । द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिए उन्होंने जापान के सहयोग से , जय हिंद फौज का गठन किया था । उनके द्वारा दिया गया "जय हिंद" का नारा भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया । नेता जी की 5 जुलाई 1943 को सिंगापुर के टाउन हॉल के सामने सुप्रीमो कमांडर के रूप में सेना को संबोधित करते हुए दिल्ली चलो का नारा दिया । नेताजी सुभाष चंद्र बोस सर्वकालिक नेता थे । जिनकी जरूरत कल भी थी, आज भी है और आने वाले पीढ़ी को भी होगी । वह ऐसे वीर सैनिक थे ,इतिहास जिनकी गाथा गाता रहेगा । उनके विचार ,कर्म और आदर्श अपनाकर राष्ट्र वह सब कुछ कर सकता है, जिसका वह हकदार है । नेता जी का कथन था - "मुझे यह नहीं मालूम कि स्वतंत्रता के इस युद्ध में हम में से कौन - कौन जीवित बचेंगे , परंतु मैं यह जानता हूं कि अंत में विजयी हमारी ही होगी । यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता का मोल खून से चुकाए ।"
इसी मौके पर भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के वाणिज्य संकाय के विभागीय परिषद सदस्य , प्रभु कुमार ने कहा - नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्वतंत्रता समर के अमर सेनानी, मां भारती के सच्चे सपूत थे ।नेताजी भारतीय स्वाधीनता संग्राम के उन योद्धाओं में से एक थे , जिनका नाम और जीवन आज भी करोड़ों देशवासियों को मातृभूमि के लिए समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा देता है । उनमें नेतृत्व के चमत्कारी गुण थे ,जिनके बल पर उन्होंने आजाद हिंद फौज की कमान संभाल कर अंग्रेजों को भारत से निकाल बाहर करने के लिए एक मजबूत सशस्त्र प्रतिरोध खड़ा करने में सफलता हासिल की थी । नेताजी के द्वारा कहे गए कथन - "एक ही इच्छा होनी चाहिए मरने की इच्छा, ताकि भारत जी सके। एक शहीद की मौत ,मरने की इच्छा ताकि स्वतंत्रता का मार्ग शहीदों के खून से प्रशस्त हो सके ।" उन्होंने यह भी कहा " मेरे पास एक लक्ष्य है, जिसे मुझे हर हाल में पूरा करना है । मेरा जन्म उसी के लिए हुआ है ।मुझे नैतिक विचारों की धारा में ही बहना है।"
इसी मौके पर टीपी कॉलेज के रसायन शास्त्र विभाग के युवा छात्र नेता अमित आनंद ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के कथन -"संघर्ष ने मुझे मनुष्य बनाया मुझमें आत्मविश्वास उत्पन्न हुआ जो पहले मुझ में नहीं था।" दोहराया।
वही टीपी कॉलेज के हिंदी विभाग के युवा छात्र नेता अभिषेक कुमार उर्फ मंटू यादव ने कहा कि राष्ट्रवाद मानव जाति के उच्चतम आदर्श सत्य शिव और सुंदर से प्रेरित है।जीवन में प्रगति का आशय यह है कि संघर्ष का संदेह उठते रहे और उनके समाधान का प्रयास क्रम चलता रहे ।
वहीं प्रमोद कुमार उर्फ बबलू कुशवाहा ने कहा कि नेताजी अपने परिवार के बारे में न सोच कर , पूरे देश के बारे में सोचा । नेता जी के जीवन के कई और पहलू हमें एक नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।
इस मौके पर उपस्थित छात्र नेता प्रभु कुमार, प्रमोद कुमार उर्फ बबलू कुशवाहा, ऋषभ सिंह ,भूषण कुमार ,अमित आनंद , सिकंदर कुमार ,मिथिलेश ,शशिकांत ,बाबुल ,शहजाद आलम आदि मौजूद थे।
