Kosi Live-कोशी लाइव सहरसा।गर्भावस्था पूर्व से लेकर प्रसव के बाद तक बेहतर देखभाल से नवजात मृत्यु दर में कमी संभव* - Kosi Live-कोशी लाइव

KOSILIVE BREAKING NEWS

Wednesday, January 29, 2020

सहरसा।गर्भावस्था पूर्व से लेकर प्रसव के बाद तक बेहतर देखभाल से नवजात मृत्यु दर में कमी संभव*

कोशी लाइव_नई सोच नई खबर।

99% बेहतर देखभाल से 63% शिशु मृत्यु दर एवं 55% नवजात मृत्यु दर में लायी जा सकती है कमी

• घर पर देखभाल से मिल सकता है बेहतर परिणाम

• गर्भावस्था से पूर्व भी बेहतर स्वास्थ्य देखभाल की होती है जरूरत

• व्यवहार परिवर्तन नवजात देखभाल में महतवपूर्ण कड़ी

रिपोर्ट - अमन कुमार, सहरसा

सहरसा/29जनवरी- नवजात को स्वस्थ जीवन प्रदान करने में चिकित्सकीय सेवाओं के साथ परिवार एवं समुदाय की भी भूमिका अहम् होती है. नवजात के बेहतर स्वास्थ्य में माता का भी स्वास्थ्य जुड़ा होता है. इसलिए गर्भावस्था से पूर्व भी माताओं को अपने बेहतर स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की जरूरत होती है. इसमें माता एवं नवजात के स्वास्थ्य को लेकर व्यवहार परिवर्तन भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है. लेंसेट की एक रिपोर्ट के मुताबिक गर्भावस्था के पूर्व से लेकर प्रसव के बाद तक जरुरी देखभाल के सभी मानकों को 99% अनुकरण करने से शिशु मृत्यु दर में 63% एवं नवजात मृत्यु दर में 55% तक की कमी लायी जा सकती है.
गर्भावस्था से पूर्व ही ध्यान रखना शुरू करें:
राज्य बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. वीपी राय ने बताया नवजात का स्वास्थ्य माता के स्वास्थ्य से जुड़ा होता है. इसलिए माता को गर्भधारण करने से पूर्व ही अपने स्वास्थ्य को लेकर सचेत होना चाहिए. महिलाओं में प्रत्येक माह माहवारी होने से शरीर में खून की कमी होने का ख़तरा बना रहता है. इसके लिए गर्भावस्था से पूर्व आयरन युक्त आहार के साथ आयरन फ़ोलिक एसिड की गोली का सेवन भी जरुरी होता है. गर्भावस्था के दौरान 4 प्रसव पूर्व जाँच एवं टेटनस का टीका सुरक्षित प्रसव के लिए जरुरी होता है. इसके अलावा प्रसव के बाद भी नवजात को बेहतर देखभाल की जरूरत होती है. जिसमें 1 घंटे के भीतर स्तनपान की शुरुआत ,6 माह तक केवल स्तनपान, कंगारू मदर केयर एवं निमोनिया का प्रबंधन मुख्य रूप से नवजात के बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरुरी होता है.
घर पर भी बेहतर देखभाल की जरुरत:
नवजात देखभाल में परिवार की अहम भूमिका होती है. प्रसव के बाद अस्पताल से घर पहुँचने पर नवजात देखभाल की जिम्मेदारी घर वालों के ही ऊपर होती है. इसमें घर वालों की सजगता से नवजात को होने वाले स्वास्थ्य समस्याओं से बचाया जा सकता है. यदि नवजात में कोई गंभीर लक्षण दिखाई दे तब नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जरुर संपर्क करें. 
जिला प्रोग्राम पदाधिकारी राहुल किशोर ने बताया कि-
इन लक्षणों को देखकर हो जायें सजग:

• बच्चे को साँस लेने में यदि समस्या हो रही हो
• बच्चा स्तनपान नहीं कर पा रहा हो
• बच्चा शारीरिक तापमान बनाये रखने में असमर्थ हो( हाइपोथर्मिया)
• बच्चा सुस्त हो गया हो एवं शारीरिक गतिविधि कम कर रहा हो
प्रसव के बाद नवजात की ऐसे करें देखभाल:
• जन्म के शुरूआती 1 घन्टे में स्तनपान की शुरुआत एवं अगले 6 माह तक केवल स्तनपान
• बच्चे को गर्म रखने एवं वजन में वृद्धि के लिए कंगारू मदर केयर
• गर्भ नाल को सूखा रखें. ऊपर से कुछ भी ना लागएं
• 6 माह के बाद स्तनपान के साथ शिशु को सम्पूरक आहार
• निमोनिया एवं डायरिया होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह
• बच्चे में किसी भी खतरे के संकेत मिलने पर तुरंत चिकित्सक की सलाह