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आज आमआदमियों के लिए मतदाता सूची एक पहचान और नागरिकता का प्रमाण हो गया है ।जिससे एक अहम भूमिका लोकतंत्र की नींव रखने में की जाती है ।जो भारत की नई रूपरेखा तय करती है ।लेकिन इस में नाम अशुद्ध वर्तनी जैसे - मीरा कुमारी कुमारी , हीरा कुआर इत्यादि में रहते है ।वही अंग्रेजी नामों की वर्तनी लगभग ठीक रहती है ।इसी तरह अभ्यर्थी / पिता / पति के नाम या उपनाम की दोहरी प्रवृष्टि अधिकांशतः देखने को मिलती है।हालांकि आयोग ने शुद्धिकरण फॉर्म - 8 निकाला है ।लेकिन इसे भरने के बावजूद पूर्णतः शुध्द नहीं हो पाती है ।कुछ हद तक कहा जा सकता है कि नाम जोड़ने (फॉर्म संख्या 6)और सुद्धिकरण (फॉर्म संख्या - 8)की ऑनलाइन , ऑफलाइन प्रक्रिया में कर्मचारी अनमठे ढंग से कार्य करते है ।लेकिन इससे निःसंदेह आमजनों को काफी परेसानी उठानी पड़ती है ।इसमें या तो आधार पत्र को परिचय पत्र के अनुरूप या परिचय पत्र को आधार पत्र के अनुरूप करवाना पड़ता है और प्रखंड स्तर पर आधार पंजीकरण का सीमित हो जाने से पैसे के साथ आम जनों को अधिक कवायद करनी पड़ती है ।फिर भी असुद्धि रह ही जाती है।इस तरह से असुद्धि रह जाने के कारण बार - बार असुद्ध मतदाता सूची वा आधार की पुनरावृत्ति होती रहती है।वही एक मतदाताओं का दो से तीन जगहों पर नाम होना आम बात है जिससे बूथ एजेंट के मिली भगत से एक ही मतदाता (पार्टी विशेष को ) आसानी से दो से तीन वोट दे देते है ।उपरोक्त समस्या को निर्वाचन आयोग के सोशल मीडिया प्लेट फॉर्म पर शिकायत की जाने के बाद भी उचित प्रतिक्रिया नहीं मिल पाती है ।ऐसा प्रतीक होता है विभागीय अधिकारी का सोशल प्लेटफॉर्म होना केवल प्रचार प्रसार का माध्यम रह गया है ।जिसपर निर्वाचन आयोग को गहराई से विचार करते हुए इस समस्या पर बखूबी ध्यान देना चाहिए ।
(लेखक साहित्यकार , शिक्षक हैं )
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| : मनकेश्वर महाराज "भट्ट" |
आज आमआदमियों के लिए मतदाता सूची एक पहचान और नागरिकता का प्रमाण हो गया है ।जिससे एक अहम भूमिका लोकतंत्र की नींव रखने में की जाती है ।जो भारत की नई रूपरेखा तय करती है ।लेकिन इस में नाम अशुद्ध वर्तनी जैसे - मीरा कुमारी कुमारी , हीरा कुआर इत्यादि में रहते है ।वही अंग्रेजी नामों की वर्तनी लगभग ठीक रहती है ।इसी तरह अभ्यर्थी / पिता / पति के नाम या उपनाम की दोहरी प्रवृष्टि अधिकांशतः देखने को मिलती है।हालांकि आयोग ने शुद्धिकरण फॉर्म - 8 निकाला है ।लेकिन इसे भरने के बावजूद पूर्णतः शुध्द नहीं हो पाती है ।कुछ हद तक कहा जा सकता है कि नाम जोड़ने (फॉर्म संख्या 6)और सुद्धिकरण (फॉर्म संख्या - 8)की ऑनलाइन , ऑफलाइन प्रक्रिया में कर्मचारी अनमठे ढंग से कार्य करते है ।लेकिन इससे निःसंदेह आमजनों को काफी परेसानी उठानी पड़ती है ।इसमें या तो आधार पत्र को परिचय पत्र के अनुरूप या परिचय पत्र को आधार पत्र के अनुरूप करवाना पड़ता है और प्रखंड स्तर पर आधार पंजीकरण का सीमित हो जाने से पैसे के साथ आम जनों को अधिक कवायद करनी पड़ती है ।फिर भी असुद्धि रह ही जाती है।इस तरह से असुद्धि रह जाने के कारण बार - बार असुद्ध मतदाता सूची वा आधार की पुनरावृत्ति होती रहती है।वही एक मतदाताओं का दो से तीन जगहों पर नाम होना आम बात है जिससे बूथ एजेंट के मिली भगत से एक ही मतदाता (पार्टी विशेष को ) आसानी से दो से तीन वोट दे देते है ।उपरोक्त समस्या को निर्वाचन आयोग के सोशल मीडिया प्लेट फॉर्म पर शिकायत की जाने के बाद भी उचित प्रतिक्रिया नहीं मिल पाती है ।ऐसा प्रतीक होता है विभागीय अधिकारी का सोशल प्लेटफॉर्म होना केवल प्रचार प्रसार का माध्यम रह गया है ।जिसपर निर्वाचन आयोग को गहराई से विचार करते हुए इस समस्या पर बखूबी ध्यान देना चाहिए ।
(लेखक साहित्यकार , शिक्षक हैं )
