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Wednesday, January 22, 2020

सहरसा।एनबीसीसी नवजातों के लिए साबित हो रहा संजीवनी

कोशी लाइव_नई सोच नई खबर।
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• हाइपोथर्मिया एवं एसफिक्सिया से बचाव में कारगर

• सदर अस्पताल में प्रसव कक्ष में स्थापित है एनबीसीसी

• स्वास्थ्य केंद्रों में नवजात शिशुओं की अब विशेष देखभाल

*रिपोर्ट - अमन कुमार, सहरसा*

22जनवरी / सहरसा - जन्म के तुरंत बाद नवजात को बेहतर देखभाल की जरूरत होती है. जन्म के पहले घंटे में पर्याप्त ऑक्सीजन की कमी से नवजात को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है. जिसे एसफिक्सिया कहा जाता है. साथ ही जन्म के तुरंत बाद शिशु को हाइपोथर्मिया(शरीर का तापमान अचानक गिर जाना) का भी ख़तरा होता है. लेकिन अब जिले के नवजातों को एसफिक्सिया एवं हाइपोथर्मिया के कारण स्वास्थ्य समस्या नहीं होगी. इसको लेकर जिला अस्पताल के प्रसव कक्ष में न्यू बोर्न केयर कार्नर (एनबीसीसी) स्थापित किया गया है. इसकी सहायता से 37 सप्ताह से पूर्व जन्म लिए बच्चे(प्री मैच्चोर बेबी), जन्म से कम वजन वाले बच्चे, हाइपोथर्मिया एवं एसफिक्सिया से ग्रसित बच्चों को नया जीवन दान मिल रहा है.
रेडिएंट वार्मर से लैस न्यू बोर्न केयर कार्नर :
न्यू बोर्न केयर कार्नर में बेबी वार्मर मशीन लगाई गयी है। साथ ही एसफिक्सिया से बचाव के लिए रिसस्टेशन की भी व्यवस्था की गयी है. बेबी वार्मर मशीन जहाँ नवजात के शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है. इससे नवजात को हाइपोथर्मिया से बचाव होता है. जन्म के तत्काल बाद नवजातों को निर्धारित तापमान उपलब्ध कराना जरूरी होता है। ऐसा न होने पर वे हाइपोथर्मिया एवं  निमोनिया जैसी घातक बीमारी के चपेट में आ जाते हैं।
स्तनपान को भी मिल रहा बढ़ावा :
केयर इंडिया के डीटीओ शिल्पा बहल ने बताया एनबीसीसी केंद्र की शुरुआत स्वास्थ्य विभाग की एक अच्छी पहल है. जन्म के बाद शिशुओं को गहन देखभाल की जरूरत होती है. इसलिए इस यूनिट के माध्यम से जरुरी देखभाल को प्रसव कक्ष के ही अंदर उपलब्ध करायी गयी है. शिशु जन्म के 1 घंटे के भीतर स्तनपान शुरुआत करने से शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है. इसे ध्यान में रखते हुए यह यूनिट हाइपोथर्मिया एवं एसफिक्सिया प्रबंधन के साथ शुरूआती स्तनपान में भी सहयोग करता है. यह नवजात मृत्यु दर में कमी लाने में कारगर साबित हो रहा है.   
नवजातों को मिल रहा बेहतर देखभाल:
लेबर रूम की  इंचार्ज ने बताया शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से प्रत्येक सरकारी स्वास्थ्य इकाई के प्रसव कक्ष में न्यू बोर्न केयर कार्नर बनाए गए हैं। यहां जोखिम हालातों में जन्म लेने वाले बच्चों का उपचार किया जाता है। प्रसव के बाद जो शिशु कम वजन अथवा गंभीर बीमारी से ग्रसित हैं, न्यू बोर्न के यर कार्नर पर जांच के दौरान इसका पता लगाकर उन्हें भर्ती कर उपचार किया जाता है। नवजात शिशु को ठंड से बचाव, नवजात शिशु में पीलिया का प्रबंधन, शिशु की श्वसन संबंधित समस्या का प्रबंधन , स्तनपान एवं फीडिंग सपोर्ट आदि सेवाएं न्यू बोर्न केयर कार्नर पर दी जाती हैं। 
क्या कहते सिविल सर्जन:
सिविल सर्जन डॉ. ललन प्रसाद सिह ने बताया नवजात शिशुओं को बेहतर देखभाल प्रदान करने के उद्देश्य से जिला अस्पताल सहित अन्य प्रखंडों के प्रसव कक्ष में एनबीसीसी यूनिट स्थापित की गयी है. साथ ही सभी क्रियाशील यूनिटों को और सुविधा युक्त करने की कोशिश भी की जा रही है. नवजात के लिए जन्म का पहला घंटा काफ़ी महत्वपूर्ण होता है. इस दौरान नवजात के शरीर के तापमान के साथ ऑक्सीजन की कमी होने पर प्रभावी रिसस्टेशन की जरूरत होती है ताकि नवजात को सुरक्षित किया जा सके. इस दिशा में न्यू बोर्न केयर कार्नर काफ़ी कारगर साबित हो रहा है.