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अक्की।
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मधेपुरा। पर्यवेक्षण रिपोर्ट के जरिए गुनाहगारों को बचाने की तरकीब साहब बखूबी जानते हैं। मगर एसडीपीओ के द्वारा भेजी गई रिपोर्ट को देखते ही न केवल एसपी भड़क गए बल्कि उन्होंने एसडीपीओ को झूठी बताते हुए कार्रवाई किए जाने की चेतावनी भी दी है।
जानकारी के मुताबिक, पर्यवेक्षण रिपोर्ट को लेकर उदाकिशुनगंज के एसडीपीओ सीपी यादव इनदिनों खासे सुर्खियों में है। पिछले दिनों सीआईडी की टीम एसडीपीओ के कारनामे की जांच कर गए। सीआइडी की टीम जदयू नेता हलधरकांत मिश्रा की शिकायत पर पहुंचे थे। जिसमें दर्जनभर प्राथमिकी का जिक्र है। इसमें गलत पर्यवेक्षण रिपोर्ट की शिकायत की गई। वहीं एक मामला उदाकिशुनगंज थाना क्षेत्र के महेशुआ का सामना आया है। इस गांव में एक नौ वर्षीय किशोरी का अपहरण कर बंद कमरे में पिटाई के मामले को एसडीपीओ ने अपने पर्यवेक्षण रिपोर्ट में असत्य साबित कर दिया। इससे नाराज परिजन ने मुख्यमंत्री और डीजीपी से शिकायत की। जहां राज्य पुलिस मुख्यालय ने मधेपुरा एसपी को पुन: जांच का आदेश दिया। एसपी ने कांड के वादनी मनिया देवी पति योगेंद्र मुखिया के शिकायत पर दिनांक 24 मई को वादी एवं गवाहों के समक्ष अनुसंधान किया। इसमें मामला आरोपित के बहन को किशोरी तेजस्वनी कुमारी द्वारा कागज पर लिखे मोबाइल नंबर दिए जाने का बताया गया। अनुसंधान में एसपी ने किशोरी के साथ मारपीट की घटना को सही पाया।
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राज्य पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर एसपी ने की जांच
एसपी ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किए गए साक्ष्यों के बयान से स्पष्ट हुआ कि वादनी मनिया देवी के देवर दिनेश मुखिया गांव में कोचिग चलाते हैं। इसी बीच आरोपित संतोष यादव और कोचिग संचालक के बीच विवाद हुआ। इसका लेकर दोनों पक्षों के बीच तनाव हुआ। तत्पश्चात पंचायत हुई। मगर पंचायत में मामले को लेकर सुलह नहीं होने पर मनिया देवी ने थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई। वहीं किशोरी का इलाज परिजन ने निजी अस्पताल में कराया। अनुसंधान टिप्पणी में एसपी ने डीएसपी के निष्कर्ष को गलत ठहराया। वहीं एसपी ने भविष्य में इस तरह की गलती नहीं दुहराने के लिए एसडीपीओ को चेतावनी दी। एसपी तीनों आरोपितों के खिलाफ सुसंगति धाराओं की प्राथमिकी को सत्य करार दिया है। यह भी उल्लेख किया गया है कि अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय में समर्पित किया जा चुका है। ऐसी स्थिति में थानाध्यक्ष व अनुसंधानकर्ता को निर्देश दिया कि न्यायलय से अग्रतर आदेश प्राप्त करें। यह भी उल्लेख है कि अनुसंधानकर्ता रामनिवास सिंह का स्थानांतरण शंकरपुर हो गया है।
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नामजद आरोपियों के गिरफ्तारी का दिया निर्देश :
इस मामले मे अन्य पदाधिकारी को प्राथमिकी की जिम्मेदारी दी गई। वहीं नामजद अभियुक्तों के गिरफ्तारी के निर्देश दिए गए। फरार होने की स्थिति में कुर्की जब्ती के आदेश दिए गए। एसडीपीओ को निर्देश दिया गया कि आदेश का अनुपालन कराते हुए अगला प्रतिवेदन समर्पित करें। एसपी के निर्गत आदेश को पांच माह बीत गए। यद्यपि पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। जिससे खिन्न परिजन ने पुन: एसपी मधेपुरा और डीजीपी पटना को शिकायत आवेदन भेजा है। इसमें स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए गए हैं।
