कोशी लाइव:By-दिनेश चौधरी
हमसब अभी आवारा पूंजीवाद के दौर से गुजर रहे हैं,बोलने और कहने में अजीब लगता हैं लेकिन यही सच है।भारत में जितने भी पूँजीपति हैं सब राजनितिक दलों को अनुदान देने में अपना व्यक्तिव बना लिए हैं वो ये भूल गए हैं ये दल चाहे वे कोई भी पार्टी हो सब इसका सही प्रयोग नहीं करते हैं, वे सिर्फ अपना मुनाफ़ा देख रहे हैं, ये पूँजीपति को आखिर कब समझ में आएगा कि मेरे कारण ही भारत का चुनाव दुनिया का सबसे महंगा चुनाव हो गया हैं।ये आवारा पूँजीवाद किसी भी बेजान ,बेजुवां व्यक्तिव को चाभी दे कर उड़ान भर देता हैं।अगर ये पूँजीपति अपने में सुधार कर ले तो भारत का चुनाव ना तो इतना महँगा होगा और ना ही कभी कोई राजनीतिक हत्या होगी।सबसे बड़ी बात वही पैसा जो राजनीतिक दल को दिया जाता हैं उसको भारत के आधारभूत संरचना पर खर्च कर तो भारत का नजारा ही कुछ ओर होगा।बेरोजगारी, गरीबी,शिक्षा,जल,पर्यावरण इत्यादि जो समस्या है उस पर कोई आज के पूँजीपति खर्च नहीं करते हैं अगर ये सब समस्या पर भारत के पूंजीपति खर्च करने लगे तो भारत में आर्थिक विषमता के साथ साथ जैव विविधता विषमता दूर हो जाएगा।
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| दिनेश चौधरी |
हमसब अभी आवारा पूंजीवाद के दौर से गुजर रहे हैं,बोलने और कहने में अजीब लगता हैं लेकिन यही सच है।भारत में जितने भी पूँजीपति हैं सब राजनितिक दलों को अनुदान देने में अपना व्यक्तिव बना लिए हैं वो ये भूल गए हैं ये दल चाहे वे कोई भी पार्टी हो सब इसका सही प्रयोग नहीं करते हैं, वे सिर्फ अपना मुनाफ़ा देख रहे हैं, ये पूँजीपति को आखिर कब समझ में आएगा कि मेरे कारण ही भारत का चुनाव दुनिया का सबसे महंगा चुनाव हो गया हैं।ये आवारा पूँजीवाद किसी भी बेजान ,बेजुवां व्यक्तिव को चाभी दे कर उड़ान भर देता हैं।अगर ये पूँजीपति अपने में सुधार कर ले तो भारत का चुनाव ना तो इतना महँगा होगा और ना ही कभी कोई राजनीतिक हत्या होगी।सबसे बड़ी बात वही पैसा जो राजनीतिक दल को दिया जाता हैं उसको भारत के आधारभूत संरचना पर खर्च कर तो भारत का नजारा ही कुछ ओर होगा।बेरोजगारी, गरीबी,शिक्षा,जल,पर्यावरण इत्यादि जो समस्या है उस पर कोई आज के पूँजीपति खर्च नहीं करते हैं अगर ये सब समस्या पर भारत के पूंजीपति खर्च करने लगे तो भारत में आर्थिक विषमता के साथ साथ जैव विविधता विषमता दूर हो जाएगा।
