कोशी लाइव:@रितेश
सहरसा - शंकर चौक स्थित सब्जी मार्केट में धड़ल्ले से नकली पनीर की बिक्री की जा रही है जिसे कोई रोक टोक करने वाला नहीं है जिसके कारण नक्कालो की चाँदी कट रही है। वहीं आम आदमी सस्ता के चक्कर में नकली पनीर खरीद कर कई भयंकर बिमारियों से ग्रसित हो रहें है ।
एक तरफ अपने देश में दुधारू पशुओं की कमी देखी जा सकती है वही दुसरी तरफ दुग्ध निर्मित वस्तुओं की भरमार सी हो गई है। दुग्ध विक्रेता संघ के सचिव सुरेश यादव व उप सचिव महेश्वर यादव ने बताया कि बदलाघाट, धम्हारा धाट एवं कोपरिया क्षेत्र में एक समय मवेशियों की संख्या अधिक थीं जिसके कारण यहाँ के दुग्ध विक्रेता सहरसा, मधेपुरा, बनमंखी, पूर्णिया, सुपौल, राघोपुर तथा फारबिसगंज तक दुध की आपूर्ति करते थे। लेकिन वर्तमान समय में मवेशियों की संख्या घट जाने से अब केवल सहरसा तक ही कुछ सीमित मात्रा में ही दुध आपूर्ति की जाती है । अधिकांश घरों में सिन्थेटिक दूध की ही खपत हो रही है साथ ही नकली दुध निर्मित खोआ, मिठाई व पनीर का धड़ल्ले से प्रयोग किया जा रहा है। गौरतलब है कि पैकेट बंद दुध पचास रूपये लीटर बिक रही है वहीं पैकेट बंद दुध से निर्मित पनीर 250-300 रू किलों बिक रही है वहीं सब्ज़ी मार्कट में 150-200 रू किलों नकली पनीर बिक रही है। वहीं शहर के सभी होटलों व रैस्टोरेंट में भी नकली पनीर का उपयोग किया जा रहा है। डा० पंकज कुमार झा ने बताया कि नकली दुध व दुध निर्मित वस्तुओं का सेवन करने से शरीर की हड्डी कमजोर होती हैं। साथ ही शरीर के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती हैं । दुध या दुध निर्मित वस्तुओं के साथ कभी भी नमक मिलाकर नहीं खाना चाहिए क्योंकि नमक दुध का विजातीय पदार्थ है ।
सहरसा - शंकर चौक स्थित सब्जी मार्केट में धड़ल्ले से नकली पनीर की बिक्री की जा रही है जिसे कोई रोक टोक करने वाला नहीं है जिसके कारण नक्कालो की चाँदी कट रही है। वहीं आम आदमी सस्ता के चक्कर में नकली पनीर खरीद कर कई भयंकर बिमारियों से ग्रसित हो रहें है ।
एक तरफ अपने देश में दुधारू पशुओं की कमी देखी जा सकती है वही दुसरी तरफ दुग्ध निर्मित वस्तुओं की भरमार सी हो गई है। दुग्ध विक्रेता संघ के सचिव सुरेश यादव व उप सचिव महेश्वर यादव ने बताया कि बदलाघाट, धम्हारा धाट एवं कोपरिया क्षेत्र में एक समय मवेशियों की संख्या अधिक थीं जिसके कारण यहाँ के दुग्ध विक्रेता सहरसा, मधेपुरा, बनमंखी, पूर्णिया, सुपौल, राघोपुर तथा फारबिसगंज तक दुध की आपूर्ति करते थे। लेकिन वर्तमान समय में मवेशियों की संख्या घट जाने से अब केवल सहरसा तक ही कुछ सीमित मात्रा में ही दुध आपूर्ति की जाती है । अधिकांश घरों में सिन्थेटिक दूध की ही खपत हो रही है साथ ही नकली दुध निर्मित खोआ, मिठाई व पनीर का धड़ल्ले से प्रयोग किया जा रहा है। गौरतलब है कि पैकेट बंद दुध पचास रूपये लीटर बिक रही है वहीं पैकेट बंद दुध से निर्मित पनीर 250-300 रू किलों बिक रही है वहीं सब्ज़ी मार्कट में 150-200 रू किलों नकली पनीर बिक रही है। वहीं शहर के सभी होटलों व रैस्टोरेंट में भी नकली पनीर का उपयोग किया जा रहा है। डा० पंकज कुमार झा ने बताया कि नकली दुध व दुध निर्मित वस्तुओं का सेवन करने से शरीर की हड्डी कमजोर होती हैं। साथ ही शरीर के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती हैं । दुध या दुध निर्मित वस्तुओं के साथ कभी भी नमक मिलाकर नहीं खाना चाहिए क्योंकि नमक दुध का विजातीय पदार्थ है ।

