बिहार के कटिहार जिले से पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हैरान करने वाला मामला सामने आया है। कटिहार पुलिस लाइन के अंदर एक फर्जी सैप (विशेष सहायक पुलिस) जवान पिछले 15 दिनों से बैरक में रह रहा था। वह पुलिसकर्मियों के साथ उठता-बैठता था, उनके साथ भोजन करता था और बैरक में ही सोता था। हैरानी की बात यह है कि इतने दिनों तक किसी को उसकी असलियत का पता नहीं चला। आखिरकार एक सतर्क सिपाही को उसकी गतिविधियों पर शक हुआ, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान 45 वर्षीय दीपक कुमार के रूप में हुई है। वह मूल रूप से सहरसा जिले का रहने वाला बताया जा रहा है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दीपक ने खुद को सैप जवानों की गाड़ी का चालक बताकर पुलिसकर्मियों को झांसे में रखा था। इसी पहचान के सहारे वह पुलिस लाइन के अंदर रह रहा था।
सिपाही के शक से खुला फर्जीवाड़े का राज
बताया जाता है कि पुलिस लाइन में तैनात एक सिपाही को दीपक की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। इसके बाद उसने मामले की जानकारी वरीय अधिकारियों को दी। सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारियों ने दीपक से पूछताछ शुरू की।
पूछताछ के दौरान जब उससे पहचान पत्र, नियुक्ति पत्र और अन्य वैध दस्तावेज मांगे गए तो वह कोई कागजात प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद उसकी असलियत सामने आ गई और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
किस मकसद से पुलिस लाइन में रह रहा था दीपक?
मामले की पुष्टि कटिहार के एसपी परिचय कुमार ने की है। एसपी के अनुसार, आरोपी से पूछताछ की जा रही है और उसके पुलिस लाइन में रहने के वास्तविक मकसद का पता लगाया जा रहा है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी का किसी आपराधिक गिरोह से संबंध तो नहीं है। इसके अलावा उसके पुराने आपराधिक इतिहास को भी खंगाला जा रहा है।
पुलिस लाइन की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
पुलिस लाइन एक संवेदनशील सरकारी परिसर है, जहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए। ऐसे में बिना किसी वैध पहचान पत्र और नियुक्ति संबंधी दस्तावेज के एक बाहरी व्यक्ति का 15 दिनों तक बैरक में रहना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
घटना के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। एसपी परिचय कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस लाइन की सुरक्षा व्यवस्था की नए सिरे से समीक्षा करने का निर्देश दिया है।
अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि दीपक आखिर किसके संपर्क से पुलिस लाइन में दाखिल हुआ और 15 दिनों तक वहां रहने के बावजूद किसी अधिकारी या कर्मी को इसकी भनक क्यों नहीं लगी।