टीचर के बेटे ने पहले रेलवे में की TC की नौकरी, फिर पास की UPSC परीक्षा; आज बिहार के औरंगाबाद में SP हैं IPS उपेंद्रनाथ वर्मा
बिहार के नवादा जिले के एक साधारण परिवार से निकलकर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) तक पहुंचने वाले उपेंद्रनाथ वर्मा की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत रेलवे में टिकट कलेक्टर (TC) के रूप में की थी। नौकरी की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और UPSC की परीक्षा पास कर IPS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया। वर्ष 2013 में भारतीय पुलिस सेवा में चयनित होने के बाद उन्होंने पुलिस विभाग में कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं। वर्तमान में वह बिहार के औरंगाबाद जिले में पुलिस अधीक्षक (SP) के पद पर तैनात हैं।
उनकी सफलता की कहानी बताती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे, तो नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच भी बड़े सपनों को पूरा किया जा सकता है।
नवादा के साधारण परिवार में हुआ जन्म
IPS उपेंद्रनाथ वर्मा बिहार के नवादा जिले के रहने वाले हैं। उनके पिता वीरेंद्र कुमार सेवानिवृत्त शिक्षक हैं, जबकि उनकी मां शकुंतला देवी गृहिणी हैं। पांच भाई-बहनों वाले परिवार में पले-बढ़े उपेंद्रनाथ ने सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षा और करियर के क्षेत्र में आगे बढ़ने का प्रयास जारी रखा।
उन्होंने वर्ष 2001 में नवादा के कन्हाई हाई स्कूल से दसवीं की परीक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने रोजगार की तलाश शुरू की और रेलवे में टिकट कलेक्टर के पद पर भर्ती के लिए परीक्षा दी। पहली ही कोशिश में उन्हें सफलता मिल गई। यह नौकरी उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई।
2004 में रेलवे में बने टिकट कलेक्टर
उपेंद्रनाथ वर्मा ने वर्ष 2004 में रेलवे के हावड़ा डिवीजन में टिकट कलेक्टर के रूप में योगदान दिया। नौकरी मिलने के बाद उनके पास एक स्थायी रोजगार था, लेकिन उनके सपने इससे कहीं बड़े थे। वह उच्च शिक्षा हासिल करना चाहते थे और सिविल सेवा में जाकर देश की सेवा करने की इच्छा रखते थे।
रेलवे की नौकरी के साथ पढ़ाई जारी रखना आसान नहीं था। ड्यूटी की जिम्मेदारियों के बीच समय निकालना और नियमित अध्ययन करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। इसके बावजूद उन्होंने आगे बढ़ने का फैसला नहीं बदला।
ड्यूटी के बाद पढ़ाई कर हासिल की स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्री
नौकरी करते हुए उपेंद्रनाथ वर्मा ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से इतिहास विषय में उच्च शिक्षा हासिल की। उन्होंने वर्ष 2007 में स्नातक और वर्ष 2010 में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की।
रेलवे में नौकरी करने के दौरान उन्होंने अपनी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के बीच संतुलन बनाए रखा। सीमित समय का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने नियमित अध्ययन पर ध्यान दिया। उनके लिए नौकरी केवल आजीविका का साधन थी, जबकि सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य लगातार बना रहा।
नौकरी के साथ UPSC की तैयारी, 2013 में बने IPS
UPSC जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए समय, धैर्य और निरंतर मेहनत की जरूरत होती है। उपेंद्रनाथ वर्मा ने नौकरी की जिम्मेदारियों के बावजूद अपनी तैयारी जारी रखी। उन्होंने पढ़ाई के लिए नियमित समय निकाला और स्वाध्याय पर भरोसा किया।
आखिरकार वर्ष 2013 में उन्होंने UPSC परीक्षा में सफलता हासिल की और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए चयनित हुए। इस उपलब्धि के साथ ही रेलवे में टिकट कलेक्टर के रूप में शुरू हुआ उनका सफर पुलिस सेवा तक पहुंच गया।
उनकी यह उपलब्धि उन युवाओं के लिए खास संदेश देती है, जो आर्थिक या पारिवारिक परिस्थितियों के कारण नौकरी करते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उपेंद्रनाथ वर्मा ने दिखाया कि जिम्मेदारियों के बीच भी लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ा जा सकता है।
बालिका गृहकांड की जांच से जुड़े रहे, चप्पल से मिला था अहम सुराग
IPS बनने के बाद उपेंद्रनाथ वर्मा ने बिहार पुलिस में विभिन्न पदों पर काम किया। वर्ष 2018 में मुजफ्फरपुर के सिटी एसपी रहते हुए वह चर्चित बालिका गृहकांड से जुड़े पुलिस कार्यों और जांच प्रक्रिया में शामिल रहे। यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बना था। इस मामले में उनकी जांच संबंधी भूमिका की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से सराहना किए जाने की बात भी सामने आई थी।
इसके बाद वर्ष 2019 में बक्सर के चर्चित काकुड़ा हत्याकांड की जांच के दौरान एक चप्पल को अहम सुराग के रूप में देखे जाने की चर्चा हुई। इस सुराग के आधार पर मामले की गुत्थी सुलझाने में मदद मिलने की बात सामने आई थी।
इन चर्चित मामलों के अलावा उन्होंने पुलिस सेवा में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उनके सेवाकाल के दौरान पश्चिमी चंपारण, बक्सर और बांका जैसे जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में काम करने का अनुभव भी रहा है।
फिलहाल औरंगाबाद के SP हैं उपेंद्रनाथ वर्मा
उपेंद्रनाथ वर्मा वर्तमान में बिहार के औरंगाबाद जिले में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात हैं। इस जिम्मेदारी के तहत जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखना, अपराध नियंत्रण और पुलिस व्यवस्था की निगरानी करना उनके प्रमुख दायित्वों में शामिल है।
नवादा के एक साधारण परिवार से निकलकर रेलवे में नौकरी करने और फिर UPSC पास कर IPS बनने तक का उनका सफर उनकी मेहनत और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।
युवाओं के लिए प्रेरणा है उनकी कहानी
IPS उपेंद्रनाथ वर्मा की सफलता की कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्होंने नौकरी मिलने के बाद अपनी पढ़ाई और आगे बढ़ने की इच्छा को नहीं छोड़ा। उन्होंने परिस्थितियों के अनुसार अपनी दिनचर्या बनाई और लगातार अपने लक्ष्य की दिशा में प्रयास करते रहे।
उनका सफर उन युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो नौकरी के साथ UPSC या दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि सफलता के लिए केवल संसाधन ही नहीं, बल्कि अनुशासन, धैर्य और निरंतर प्रयास भी जरूरी हैं।
रेलवे के टिकट कलेक्टर से लेकर बिहार के औरंगाबाद जिले के पुलिस कप्तान तक पहुंचने वाले उपेंद्रनाथ वर्मा की कहानी इस बात की मिसाल है कि इंसान अपनी वर्तमान परिस्थितियों से आगे बढ़कर भी अपने सपनों को साकार कर सकता है।