शराब के दो मामलों में दो दोषियों को 5-5 साल की सजा, एक-एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया
सुपौल। शराब के अवैध कारोबार से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में बुधवार को उत्पाद न्यायालय ने फैसला सुनाया। अनन्य विशेष न्यायाधीश उत्पाद न्यायालय-वन अभिषेक कुमार मिश्रा की अदालत ने दोनों मामलों में दोषियों को पांच-पांच साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोनों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर दोनों दोषियों को छह महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
पहला मामला: घर से मिली थी देसी शराब
पहला मामला जदिया थाना कांड संख्या 79/2017 से जुड़ा है। इसमें जदिया निवासी सिकंदर यादव को दोषी ठहराया गया।
पुलिस के अनुसार, 13 जून 2017 की शाम पुलिस टीम इलाके में गश्त कर रही थी। इसी दौरान अनंतपुर चौक के पास सूचना मिली कि सिकंदर यादव अपने घर से शराब बेचता है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने उसके घर पर छापेमारी की।
तलाशी के दौरान चौकी के नीचे काले पॉलिथीन में छिपाकर रखी 300 एमएल देसी शराब बरामद हुई। पुलिस ने शराब जब्त करने के बाद सिकंदर यादव के खिलाफ मामला दर्ज किया।
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने उसे बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम की धारा 30(ए) के तहत दोषी माना। अदालत ने सिकंदर यादव को पांच साल के सश्रम कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर छह महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
दूसरा मामला: स्कॉर्पियो से बरामद हुई थी 891 लीटर नेपाली शराब
दूसरा मामला किशनपुर थाना कांड संख्या 142/2025 का है। इसमें सरायगढ़ थाना क्षेत्र के मुरली वार्ड-5 निवासी मनीष कुमार को दोषी ठहराया गया।
पुलिस के अनुसार, 18 जुलाई 2025 की रात सहायक अवर निरीक्षक रामरतन मांझी पुलिस बल के साथ गश्त पर थे। इसी दौरान सूचना मिली कि मनीष कुमार स्कॉर्पियो से शराब की बड़ी खेप लेकर सुखासन गांव की ओर जा रहा है।
सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम सुखासन गांव स्थित पंचायत सरकार भवन के पास पहुंची। पुलिस को देखते ही वाहन में सवार कुछ लोग अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए।
पुलिस ने स्कॉर्पियो की तलाशी ली तो उसकी डिक्की से 33 प्लास्टिक बोरियां बरामद हुईं। इनमें कुल 891 लीटर नेपाली शराब रखी हुई थी। पुलिस की जांच में मनीष कुमार की इस मामले में संलिप्तता सामने आई।
मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने मनीष कुमार को भी बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम की धारा 30(ए) के तहत दोषी माना। उसे पांच साल के सश्रम कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। जुर्माना नहीं देने पर छह महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन और बचाव पक्ष ने रखा अपना पक्ष
दोनों मामलों में अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक विनय भूषण सिंह ने अदालत में पक्ष रखा। वहीं सिकंदर यादव की ओर से अधिवक्ता मनोज झा और मनीष कुमार की ओर से अधिवक्ता विमल झा ने बचाव पक्ष की ओर से बहस की।
अदालत के फैसले के बाद दोनों मामलों में दोषियों को निर्धारित सजा भुगतनी होगी।