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Saturday, October 31, 2026

बिहार में 30 साल से फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी कर रहा था शिक्षक, शिक्षा विभाग ने किया बर्खास्त; असली अभ्यर्थी रांची में हैं पुलिस इंस्पेक्टर

बांका में 30 साल से फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी कर रहा था शिक्षक, शिक्षा विभाग ने किया बर्खास्त; असली अभ्यर्थी रांची में हैं पुलिस इंस्पेक्टर

बिहार के बांका जिले में शिक्षा विभाग ने फर्जीवाड़े और जालसाजी के एक बड़े मामले का खुलासा किया है। बाराहाट प्रखंड के प्रोन्नत मध्य विद्यालय नगरी जानुकित्ता में करीब तीन दशकों से नौकरी कर रहे सहायक शिक्षक मनोज कुमार को जिला शिक्षा विभाग ने तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। विभागीय जांच में प्रमाणित हुआ कि शिक्षक ने वर्ष 1994 की शिक्षक भर्ती परीक्षा में सफल हुए एक दूसरे अभ्यर्थी के नाम और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर नौकरी हासिल की थी। हैरानी की बात यह है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे वह करीब 30 वर्षों तक सरकारी शिक्षक के पद पर कार्यरत रहा।

यह कार्रवाई बिहार सरकारी सेवक नियमावली, 2005 के तहत की गई है। विभाग ने बर्खास्तगी के साथ मामले में आगे कानूनी कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए हैं।

बीपीएससी के असली सफल अभ्यर्थी के दस्तावेजों का किया इस्तेमाल

विभागीय जांच में सामने आया कि आरोपी शिक्षक ने वर्ष 1994 में बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की ओर से आयोजित शिक्षक भर्ती परीक्षा में सफल हुए मूल अभ्यर्थी के दस्तावेजों का दुरुपयोग किया था। फर्जी शिक्षक ने असली अभ्यर्थी के नाम, पिता का नाम, पता, पैन कार्ड और शैक्षणिक प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल कर सरकारी नौकरी प्राप्त कर ली।

जांच में पता चला कि जिस मनोज कुमार के नाम पर शिक्षक ने नौकरी हासिल की थी, वह वर्तमान में झारखंड के रांची में पुलिस निरीक्षक के पद पर पदस्थापित हैं।

दारोगा की नौकरी मिलने के बाद खाली रह गया था शिक्षक का पद

जानकारी के अनुसार, बीपीएससी की परीक्षा में सफल मूल अभ्यर्थी मनोज कुमार ने शिक्षक पद पर योगदान नहीं दिया था। उन्होंने वर्ष 1994 में ही दारोगा के रूप में पुलिस सेवा ज्वाइन कर ली थी। उनके शिक्षक पद पर योगदान नहीं देने से रिक्त रह गए पद का फायदा उठाकर आरोपी ने वर्ष 1994-95 में शिक्षक के रूप में नियुक्ति प्राप्त कर ली।

इसके बाद वह पंजवारा और बाराहाट क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों में करीब 30 वर्षों तक शिक्षक के रूप में कार्य करता रहा। इतने लंबे समय तक किसी को इस फर्जीवाड़े की भनक तक नहीं लगी।

देवघर में दर्ज केस की जांच के दौरान खुला फर्जीवाड़ा

इस पूरे मामले का खुलासा झारखंड के देवघर जिले के मोहनपुर थाना कांड संख्या 216/23 के अनुसंधान के दौरान हुआ। इसके बाद देवघर पुलिस और बांका जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय ने संयुक्त रूप से मामले की जांच शुरू की।

जांच के दौरान विभाग ने आरोपी शिक्षक से वर्ष 1994 की बीपीएससी परीक्षा, मैट्रिक और इंटरमीडिएट के मूल प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने को कहा। लेकिन आरोपी मूल दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सका। उसने केवल डुप्लीकेट प्रमाण पत्र दिखाए।

वहीं, रांची में पुलिस निरीक्षक के पद पर कार्यरत मूल अभ्यर्थी मनोज कुमार के दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया तो उनके सभी मूल प्रमाण पत्र सही पाए गए। इससे फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई।

जांच से बचने के लिए देता रहा अलग-अलग बहाने

विभागीय कार्रवाई के दौरान आरोपी शिक्षक लगातार जांच से बचने की कोशिश करता रहा। स्पष्टीकरण मांगे जाने पर कभी कोलकाता में इलाज कराने तो कभी अन्य कारणों का हवाला देकर उपस्थित होने से बचता रहा। विभाग की ओर से भेजे गए निबंधित पत्र भी अपूर्ण पते के कारण वापस लौटते रहे।

अंततः जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) और संचालन पदाधिकारी की जांच रिपोर्ट में आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए गए। इसके बाद जिला शिक्षा विभाग ने मनोज कुमार को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया।

करीब 30 वर्षों तक फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी करने का यह मामला शिक्षा विभाग की नियुक्ति प्रक्रिया और दस्तावेजों के सत्यापन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।