तमिलनाडु में मजदूरी कर रहे 23 वर्षीय युवक की हार्ट अटैक से मौत: परिवार का सहारा बनने गया था शाहिद, शव पहुंचते ही गांव में पसरा मातम
जदिया (सुपौल)। परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने और अपनों का सहारा बनने तमिलनाडु में मजदूरी कर रहे 23 वर्षीय मो. शाहिद खान की अचानक मौत से सुपौल के बघेली गांव में मातम पसर गया। 30 अगस्त की शाम तमिलनाडु में काम के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उसकी मौत हो गई। परिजनों के अनुसार, शाहिद की मौत हार्ट अटैक से हुई। मौत की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई।
शाहिद बघेली पंचायत के वार्ड नंबर 13 निवासी जसीम खान का पुत्र था। कम उम्र में ही उसने परिवार की जिम्मेदारी संभालने का फैसला किया था। इसी वजह से वह घर से दूर तमिलनाडु में रहकर एक टी-शर्ट कंपनी में मजदूरी कर रहा था। परिवार को उम्मीद थी कि उसकी मेहनत से घर की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी, लेकिन अचानक हुई मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
काम के दौरान अचानक बिगड़ी तबीयत
परिजनों के अनुसार, 30 अगस्त की शाम करीब चार बजे तमिलनाडु में काम करने के दौरान शाहिद की अचानक तबीयत बिगड़ गई। आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले ही उसकी मौत हो गई। परिजनों को जानकारी मिली कि मौत हार्ट अटैक के कारण हुई है।
शाहिद के लिए तमिलनाडु जाना सिर्फ रोजगार का जरिया नहीं था। वह परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने और अपने माता-पिता का सहारा बनने के लिए हजारों किलोमीटर दूर गया था। कम उम्र में ही उसने परिवार की जिम्मेदारियों को समझते हुए मजदूरी करने का फैसला किया था।
मंगलवार देर रात गांव पहुंचा शव
शाहिद की मौत की खबर मिलते ही उसके पैतृक गांव बघेली में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों ने शव को गांव लाने की व्यवस्था शुरू की। मंगलवार देर रात शाहिद का शव जब गांव पहुंचा तो घर का माहौल पूरी तरह गम में बदल गया।
शव देखते ही मां-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। जिस बेटे से परिवार को भविष्य में सहारे की उम्मीद थी, उसकी अचानक मौत ने सभी को तोड़ दिया। परिजनों की चीख-पुकार सुनकर बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके घर पहुंच गए और परिवार को ढांढस बंधाया।
गमगीन माहौल में हुआ अंतिम संस्कार
बुधवार सुबह गमगीन माहौल में शाहिद को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में रिश्तेदार, परिजन और ग्रामीण पहुंचे। कम उम्र में हुई इस अचानक मौत से पूरे बघेली गांव में शोक की लहर है।
पंसस अब्दुल रहमान ने बताया कि शाहिद अपने परिवार की आर्थिक मदद के लिए तमिलनाडु में मजदूरी करता था। कम उम्र में ही उसने परिवार की जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया था। उन्होंने कहा कि शाहिद की अचानक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
परिवार की उम्मीदें मातम में बदलीं
शाहिद की मौत ने उस परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है, जिसका युवा सदस्य रोजी-रोटी के लिए अपने घर से हजारों किलोमीटर दूर गया था। परिवार को उम्मीद थी कि शाहिद मेहनत कर घर की आर्थिक स्थिति संभालेगा और अपनों के लिए बेहतर भविष्य तैयार करेगा।
लेकिन 30 अगस्त की शाम आई उसकी मौत की खबर ने परिवार की सारी उम्मीदों को मातम में बदल दिया। गांव के लोग भी इस घटना से स्तब्ध हैं और शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त कर रहे हैं।