डीआईजी चौक गोलीकांड: मुख्य आरोपी ऋषभ सिंह ने कोर्ट में किया सरेंडर, 6 सहयोगी गिरफ्तार; पुलिस ने कराया क्राइम सीन रिक्रिएट
पूर्णिया। शहर के वीआईपी इलाके डीआईजी चौक पर हुई गोलीबारी के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। गोलीकांड के मुख्य आरोपी ऋषभ सिंह ने पुलिस के लगातार बढ़ते दबाव के बाद न्यायालय में सरेंडर कर दिया। वहीं, पुलिस ने मुख्य आरोपी को भगाने, हथियार छिपाने और घटना में सहयोग करने के आरोप में उसके छह साथियों को भी गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों को घटनास्थल पर ले जाकर पूरे घटनाक्रम का क्राइम सीन रिक्रिएशन कराया। इस दौरान मुख्य आरोपी ऋषभ सिंह ने पुलिस के सामने बताया कि उसने किस स्थान से फायरिंग की, किस तरह घटनास्थल पर घूम-घूमकर गोलियां चलाईं और वारदात के बाद किस रास्ते से अपने साथी के साथ फरार हुआ।
डीआईजी चौक पर चली थीं तीन गोलियां
मामला 16 अगस्त की रात करीब 8 बजे का है। डीएम और एसएसपी आवास के समीप स्थित डीआईजी चौक के पास मोती महल के सामने अचानक तीन राउंड फायरिंग हुई थी। वीआईपी इलाके में हुई इस घटना के बाद आसपास के लोगों में दहशत फैल गई थी।
घटना के तुरंत बाद मुख्य आरोपी ऋषभ सिंह अपने साथी आयुष के साथ लाल रंग की अपाचे बाइक पर सवार होकर मौके से फरार हो गया था। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच शुरू की और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने के साथ तकनीकी अनुसंधान शुरू किया।
आधे घंटे में हुई आरोपी की पहचान
पूर्णिया एसएसपी डॉ. शौर्य सुमन के अनुसार, पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी अनुसंधान के आधार पर करीब आधे घंटे के अंदर आरोपी की पहचान कर ली थी। इसके बाद आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट, खासकर इंस्टाग्राम गतिविधियों और स्थानीय चश्मदीदों से मिली जानकारी का सत्यापन किया गया।
जांच में मुख्य आरोपी के रूप में ऋषभ सिंह का नाम सामने आया। पुलिस के अनुसार, ऋषभ डीआईजी चौक के आसपास का ही रहने वाला है। घटना के बाद वह अपने साथी आयुष के साथ बाइक से फरार होकर मालदा और कोलकाता तक पहुंच गया था।
पुलिस की लगातार छापेमारी और दबाव के चलते ऋषभ सिंह ने आखिरकार न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया।
पुलिस ने घटनास्थल पर कराया क्राइम सीन रिक्रिएशन
मुख्य आरोपी के सरेंडर के बाद पुलिस ने मामले में गिरफ्तार किए गए सहयोगियों को घटनास्थल पर पहुंचाया। सदर एसडीपीओ के नेतृत्व में दर्जनों पुलिस पदाधिकारी और भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा।
क्राइम सीन रिक्रिएशन के दौरान ऋषभ ने पुलिस को बताया कि उसने तीनों गोलियां किस स्थान से चलाई थीं। उसने यह भी बताया कि फायरिंग के दौरान वह किन-किन जगहों पर गया और वारदात के बाद अपने साथी आयुष के साथ बाइक से कैसे फरार हुआ।
पुलिस ने आरोपियों से उनकी-उनकी भूमिका भी स्पष्ट कराई। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया गया कि किस आरोपी ने हथियार छिपाने में मदद की और किसने मुख्य आरोपी को फरार होने में सहयोग किया।
हथियार, बाइक और चार मोबाइल बरामद
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से गोलीकांड में इस्तेमाल किया गया एक देसी कट्टा, मुख्य आरोपी के फरार होने में इस्तेमाल हुई लाल रंग की अपाचे बाइक और चार मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
पुलिस अब बरामद मोबाइल फोन की भी जांच कर रही है। इसके जरिए आरोपियों के बीच हुई बातचीत और घटना से पहले तथा बाद की गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
किशनगंज के रास्ते ट्रेन से भागने की तैयारी में थे साथी
पुलिस जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी के कुछ सहयोगी घटना के बाद किशनगंज के रास्ते ट्रेन से फरार होने की कोशिश में थे। पुलिस ने सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए उन्हें पकड़ लिया।
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शुभम कुमार सिंह उर्फ छोटू, निखिल कुमार, शुभम आनंद, अमित सागर और रंजीत कुमार साह के रूप में की है। इनके अलावा एक अन्य सहयोगी को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, इन सभी की भूमिका घटना के बाद आरोपी को भगाने, हथियार छिपाने और अन्य स्तर पर सहयोग करने में सामने आई है।
चाय की दुकान पर अक्सर जुटते थे आरोपी
एसएसपी डॉ. शौर्य सुमन ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपी करीब 20 से 26 वर्ष की उम्र के हैं। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि ये युवक अक्सर डीआईजी चौक के पास एक चाय की दुकान पर जमा होते थे।
पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में किसी बड़े संगठित आपराधिक मकसद की बात सामने नहीं आई है। युवकों ने कथित तौर पर जोश में गुंडागर्दी दिखाने, स्टाइल मारने और शहर में अपना खौफ तथा नाम बनाने के उद्देश्य से डीएम-एसएसपी आवास के पास फायरिंग की थी।
श्याम यादव से सोशल मीडिया संपर्क की भी जांच
जांच के दौरान पुलिस को पूर्व में जेल भेजे गए अपराधी श्याम यादव के साथ भी आरोपियों के सोशल मीडिया संपर्क के बारे में जानकारी मिली है। पुलिस अब इस कनेक्शन की भी जांच कर रही है कि आरोपियों का उससे किस तरह का संपर्क था और क्या गोलीकांड से पहले या बाद में उनके बीच कोई बातचीत हुई थी।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर घटना में इस्तेमाल हथियार, आरोपियों के बीच संपर्क और फायरिंग के पीछे की पूरी वजह से जुड़े अन्य तथ्यों को खंगाला जा रहा है।