बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत ने सिर्फ बिहार की राजनीति का समीकरण नहीं बदला, बल्कि एनडीए के भीतर भी हलचल तेज कर दी है।बीजेपी के 30 साल पुराने गढ़ में मिली इस हार के बाद जेडीयू विधायक अनंत सिंह का बयान राजनीतिक मायने रखता है।
उन्होंने साफ कहा कि अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री रहते तो बांकीपुर का नतीजा अलग होता। उनके मुताबिक जनता को यह संदेश गया कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाया गया, जिससे मतदाताओं में नाराजगी दिखी। ऐसे में यह जीत अब एनडीए की अंदरूनी राजनीति पर भी सवाल खड़े कर रही है।
अनंत सिंह के बयान से एनडीए में नई बहस
बांकीपुर में बीजेपी की हार के बाद जेडीयू विधायक अनंत सिंह ने ऐसा बयान दिया, जिसने एनडीए की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी। उन्होंने कहा कि अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री रहते तो यह नतीजा नहीं आता। उनके अनुसार जनता के बीच यह धारणा बनी कि नीतीश कुमार को हटाया गया है, जबकि उन्होंने खुद पद छोड़ा था। अनंत सिंह का यह बयान सीधे तौर पर सत्ता परिवर्तन के राजनीतिक असर की ओर इशारा करता है।जनता की नाराजगी का दावा कितना बड़ा संकेत?
अनंत सिंह का कहना है कि जनता मालिक होती है और वही अंतिम फैसला करती है। उनके मुताबिक मतदाताओं ने यह संदेश दिया कि वे नीतीश कुमार के चेहरे पर वोट देकर आए थे, इसलिए नेतृत्व बदलने से नाराजगी स्वाभाविक थी। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वास्तविकता अलग है और नीतीश कुमार ने स्वयं मुख्यमंत्री पद छोड़ा था। बावजूद इसके, जनता की धारणा चुनावी नतीजों में असर डालती दिखाई दी।
बांकीपुर में बीजेपी का अभेद्य किला ढहा
बांकीपुर सीट लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है। इसी सीट पर जन सुराज के प्रशांत किशोर ने 19,324 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज कर राजनीतिक इतिहास रच दिया। उन्हें 64,151 वोट मिले, जबकि बीजेपी के नीरज सिन्हा 44,827 वोटों पर सिमट गए। वहीं राजद तीसरे स्थान पर रही। इस नतीजे ने साफ कर दिया कि राजधानी पटना की राजनीति में भी अब नए समीकरण बन रहे हैं।
प्रशांत किशोर की जीत को सिर्फ एक सीट की सफलता नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में नए विकल्प के उभरने के रूप में देखा जा रहा है। बीजेपी के मजबूत गढ़ में मिली इस जीत ने विपक्ष के साथ-साथ एनडीए की रणनीति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं अनंत सिंह के बयान ने इस बहस को और हवा दे दी है कि क्या नेतृत्व परिवर्तन का असर चुनावी नतीजों पर पड़ा। ऐसे में बांकीपुर का उपचुनाव आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।