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Saturday, August 22, 2026

PATNA:छात्र आंदोलन में एकजुटता की अपील, रौशन आनंद बोले- दो गुटों में न बंटें छात्र

गर्दनीबाग छात्र आंदोलन में एकजुटता की अपील, रौशन आनंद बोले- दो गुटों में न बंटें छात्र

पटना। बिहार में लंबित भर्ती परीक्षाओं और अभ्यर्थियों की विभिन्न मांगों को लेकर पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच शनिवार को रौशन आनंद अनशन पर बैठे छात्रों से मिलने पहुंचे। उनके साथ विपिन सर भी मौजूद रहे। रौशन आनंद ने आंदोलनरत छात्रों और छात्र नेताओं से अपील की कि वे अलग-अलग गुटों में न बंटें और अपनी मांगों को लेकर एक साझा मंच पर आएं।

उन्होंने कहा कि यदि छात्र और छात्र नेता एकजुट होकर आवाज उठाएंगे तो सरकार तक उनकी मांगें ज्यादा मजबूती से पहुंचेंगी। उन्होंने आंदोलन के नेतृत्व में बंटवारे को छात्रों के हित में नहीं बताया और सभी से एक साथ आने की अपील की।

हाथ में फाइल लेकर बोले- आयोग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी है

धरना स्थल पर रौशन आनंद ने हाथ में एक फाइल भी दिखाई। उन्होंने दावा किया कि फाइल में आयोग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मौजूद है और वह इसे शनिवार को सार्वजनिक करने वाले थे।

हालांकि, उन्होंने कहा कि जब तक सभी छात्र और छात्र नेता एक मंच पर नहीं आते, तब तक वह इस फाइल को सार्वजनिक नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि एकजुटता नहीं होने की स्थिति में वह दोबारा गर्दनीबाग नहीं आएंगे।

रौशन आनंद ने यह भी ऐलान किया कि यदि छात्र नेता एकजुट नहीं होते हैं तो वह खुद छात्रों का नेतृत्व करेंगे और उनके मुद्दों को लेकर आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे।

BPSC और BSSC घेराव की भी बात

रौशन आनंद ने छात्रों की मांगों को लेकर आगे BPSC और BSSC के घेराव की बात भी कही। इससे संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन और व्यापक हो सकता है।

उन्होंने छात्रों से अपील करते हुए कहा कि अलग-अलग मंचों से आवाज उठाने के बजाय सभी छात्र एक साथ आएं, ताकि उनकी मांगों का प्रभाव सरकार तक स्पष्ट रूप से पहुंचे।

छात्र नेता दिलीप से भी की एकजुट होने की अपील

धरना स्थल पर रौशन आनंद ने छात्र नेता दिलीप से भी बातचीत की। बातचीत के बाद उन्होंने दावा किया कि उन्होंने दिलीप से एक मंच पर आने की अपील की। रौशन आनंद के अनुसार, उन्होंने इसके लिए हाथ जोड़ने और यहां तक कि पैर पकड़ने की बात भी कही, लेकिन दिलीप ने एक मंच पर आने से इनकार कर दिया।

रौशन आनंद के इस बयान के बाद छात्र आंदोलन के भीतर अलग-अलग मंच और नेतृत्व को लेकर मतभेद की चर्चा तेज हो गई है।

हालांकि, दिलीप ने रौशन आनंद के साथ मंच साझा करने से इनकार क्यों किया, इसकी स्पष्ट वजह को लेकर उनकी ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में इसे किसी व्यक्तिगत विवाद या राजनीतिक कारण से जोड़ना फिलहाल उचित नहीं होगा।

TRE-4 समेत कई भर्ती परीक्षाओं के मुद्दे

दिलीप के नेतृत्व में चल रहा छात्र आंदोलन मुख्य रूप से BPSC TRE-4 के नोटिफिकेशन, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी मांगों को लेकर है।

आंदोलनकारियों की ओर से एकल परीक्षा प्रणाली लागू करने, नकारात्मक अंकन समाप्त करने और BSSC व दरोगा भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता समेत कई मांगें उठाई जा रही हैं। छात्रों की ओर से कथित पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच की मांग भी की जा रही है।

18 अगस्त से तेज हुआ छात्र आंदोलन

गर्दनीबाग में छात्र आंदोलन अगस्त के मध्य से लगातार तेज हुआ है। 18 अगस्त से ‘छात्र न्याय सत्याग्रह’ के तहत अभ्यर्थियों ने आंदोलन शुरू किया। छात्रों की प्रमुख मांगों में TRE-4 का नोटिफिकेशन जल्द जारी करना और लंबित भर्ती प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाना शामिल है।

छात्र नेता दिलीप कुमार के नेतृत्व में अभ्यर्थियों ने सरकार को समयसीमा देकर मांगों को पूरा करने की चेतावनी भी दी थी।

आंदोलन के दौरान TRE-4 के साथ-साथ BSSC, दरोगा भर्ती, परीक्षा में पारदर्शिता और कथित पेपर लीक की जांच जैसे मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए।

राजनीतिक मंच से दूरी की बात

आंदोलन के दौरान छात्र नेता दिलीप की ओर से राजनीतिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखने की बात भी सामने आई थी। 18 अगस्त को उन्होंने कहा था कि धरना स्थल पर बैठे छात्र किसी राजनीतिक पार्टी का हिस्सा नहीं हैं और वे अपने मुद्दों को लेकर अलग रहेंगे।

अब एकजुटता पर टिकी आंदोलन की अगली दिशा

शनिवार को रौशन आनंद के गर्दनीबाग धरना स्थल पहुंचने और छात्रों को एक मंच पर आने की अपील के बाद आंदोलन के भीतर नेतृत्व और एकजुटता का मुद्दा प्रमुख हो गया है।

फिलहाल दिलीप की ओर से रौशन आनंद के साथ मंच साझा नहीं करने की स्पष्ट वजह सार्वजनिक नहीं हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि छात्र नेता अलग-अलग मंचों से आंदोलन जारी रखते हैं या भर्ती परीक्षाओं और अभ्यर्थियों की मांगों को लेकर एक साझा मंच तैयार होता है।