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Saturday, August 8, 2026

साइबर ठगी के पीड़ितों को बड़ी राहत: होल्ड रकम वापस और फ्रीज बैंक अकाउंट अनफ्रीज कराना होगा आसान, बिहार में MRM-GRM लागू

साइबर ठगी के पीड़ितों को बड़ी राहत: होल्ड रकम वापस और फ्रीज बैंक अकाउंट अनफ्रीज कराना होगा आसान, बिहार में MRM-GRM लागू

पटना। साइबर अपराध के शिकार लोगों के लिए राहत की खबर है। साइबर ठगी के बाद बैंक खाते में होल्ड की गई रकम वापस पाना और गलती से फ्रीज किए गए बैंक खाते को दोबारा चालू कराना अब पहले की तुलना में आसान होगा। इसके लिए नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) और ग्रिवांस रिड्रेसल मैकेनिज्म (GRM) व्यवस्था बिहार में लागू कर दी गई है।

साइबर अपराध एवं अनुसंधान इकाई (CCSU) के डीआईजी अवकाश कुमार ने शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था का उद्देश्य साइबर ठगी से जुड़ी शिकायतों में पीड़ितों को उनकी होल्ड रकम वापस दिलाने और गलती से फ्रीज हुए खातों की शिकायतों का व्यवस्थित तरीके से निस्तारण करना है।

14 अंकों की शिकायत संख्या से कर सकेंगे रिफंड का आवेदन

यदि साइबर ठगी की रकम किसी बैंक खाते में होल्ड कर दी गई है, तो पीड़ित अब MRM के माध्यम से रकम वापस पाने के लिए आवेदन कर सकता है। इसके लिए NCRP पर दर्ज साइबर शिकायत की 14 अंकों की शिकायत संख्या जरूरी होगी।

आवेदन के दौरान OTP के जरिए सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद रिफंड रिक्वेस्ट का विकल्प चुनकर आवश्यक जानकारी दर्ज करनी होगी। आवेदक को पैन कार्ड की डिजिटल कॉपी, बैंक का नाम, खाता संख्या और IFSC कोड जैसी जानकारी देनी होगी।

कोर्ट का आदेश या अन्य दस्तावेज भी कर सकेंगे अपलोड

रिफंड आवेदन के साथ यदि पीड़ित के पास न्यायालय का आदेश या मामले से संबंधित अन्य दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो उन्हें भी पोर्टल पर अपलोड किया जा सकेगा।

आवेदन और दस्तावेजों की जांच के बाद होल्ड की गई राशि वापस करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इससे साइबर ठगी के मामलों में जब्त या होल्ड की गई रकम को वास्तविक पीड़ित तक पहुंचाने की प्रक्रिया ज्यादा आसान और व्यवस्थित होने की उम्मीद है।

गलती से फ्रीज हुआ बैंक खाता भी हो सकेगा अनफ्रीज

नई व्यवस्था का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा GRM है। कई बार किसी व्यक्ति के बैंक खाते में अनजाने में साइबर ठगी से जुड़ी रकम पहुंच जाती है। ऐसे मामलों में पुलिस की कार्रवाई के दौरान संबंधित बैंक खाता फ्रीज हो सकता है।

अगर किसी व्यक्ति का खाता इसी वजह से फ्रीज हुआ है और वह खुद साइबर अपराध में शामिल नहीं है, तो वह GRM के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके लिए संबंधित बैंक शाखा में लिखित आवेदन देना होगा।

आवेदक को KYC और अन्य जरूरी दस्तावेजों के साथ संबंधित लेन-देन की तारीख, रकम और अन्य विवरण उपलब्ध कराने होंगे।

बैंक जांच के बाद पुलिस को भेजेगा रिपोर्ट

बैंक आवेदन में दिए गए दस्तावेजों और संबंधित लेन-देन की जांच करेगा। जांच के बाद बैंक अपनी रिपोर्ट संबंधित पुलिस को भेजेगा।

इसके बाद पुलिस का जांच पदाधिकारी मामले की जांच करेगा और आवश्यक कार्रवाई करेगा। जरूरत पड़ने पर आवेदक से अतिरिक्त दस्तावेज या जानकारी भी मांगी जा सकती है।

जांच में यदि यह स्पष्ट हो जाता है कि खाते को फ्रीज रखने की आवश्यकता नहीं है, तो खाते से रोक हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, पूरी प्रक्रिया में करीब 15 से 20 दिन लग सकते हैं।

शिकायतों के लिए साइबर हेल्पलाइन में बढ़ाई गई फोन लाइन

डीआईजी अवकाश कुमार ने बताया कि साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराने के लिए फोन लाइन की संख्या बढ़ाकर 50 कर दी गई है। इसे आगे बढ़ाकर 75 करने की योजना है।

शिकायत दर्ज कराने की सुविधाएं बढ़ने के कारण साइबर अपराध से संबंधित शिकायतों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।

2026 में जुलाई तक 1.15 लाख शिकायतें

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में 1.17 लाख साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज की गई थीं। वहीं, वर्ष 2026 में जुलाई तक ही करीब 1.15 लाख शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं।

साइबर ठगी की रकम को होल्ड कराने के मामले में भी पुलिस की कार्रवाई जारी है। पिछले वर्ष करीब 116 करोड़ रुपये की ठगी की राशि होल्ड कराई गई थी। वहीं, 2026 में जुलाई तक 104.05 करोड़ रुपये होल्ड कराए जा चुके हैं।

जून तक करीब 10 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस

साइबर ठगी के पीड़ितों को रकम वापस कराने में भी पुलिस ने कार्रवाई की है। वर्ष 2025 में कुल 15.62 करोड़ रुपये पीड़ितों को रिफंड किए गए थे।

वहीं, वर्ष 2026 में जून तक ही करीब 10 करोड़ रुपये की राशि साइबर ठगी के पीड़ितों को वापस कराई जा चुकी है।

नई व्यवस्था से पीड़ितों को मिलेगी राहत

MRM और GRM लागू होने के बाद साइबर ठगी से जुड़े मामलों में पीड़ितों के लिए दो बड़ी समस्याओं का समाधान आसान होने की उम्मीद है। एक तरफ ठगी की रकम होल्ड होने के बाद उसे वापस पाने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया उपलब्ध होगी, वहीं दूसरी तरफ साइबर अपराध से अनजाने में जुड़े लेन-देन के कारण फ्रीज हुए बैंक खातों को लेकर भी शिकायत और जांच की स्पष्ट प्रक्रिया होगी।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, नई व्यवस्था से साइबर अपराध के मामलों में रकम की रिकवरी, रिफंड और बैंक खातों से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद है।