सुपौल में कोसी का कहर: बेला में 25 से ज्यादा घर नदी में समाए, 500 मीटर पक्की सड़क बही; बांस-सैंडबैग के सहारे कटाव रोकने की कोशिश
सुपौल। जिले के किशनपुर अंचल क्षेत्र की मौजहा पंचायत स्थित बेला गांव में कोसी नदी का कटाव लगातार तेज होता जा रहा है। तेज धारा के कारण गांव में हालात चिंताजनक हो गए हैं। पिछले कुछ दिनों में बेला और आसपास के सुजानपुर इलाके में 25 से ज्यादा घर नदी में समा चुके हैं, जबकि गांव को जोड़ने वाली करीब 500 मीटर लंबी पक्की सड़क भी कटाव की भेंट चढ़ गई है।
कटाव का असर इतना गंभीर है कि सड़क का कुछ हिस्सा अब भी जमीन से कटा हुआ हवा में पुल की तरह लटका दिखाई दे रहा है। सड़क के नीचे की मिट्टी तेज बहाव में पूरी तरह बह चुकी है। ग्रामीणों के मुताबिक नदी लगातार जमीन को काटते हुए आबादी की ओर बढ़ रही है, जिससे बचे हुए घरों पर भी खतरा मंडरा रहा है।
20-25 घर कटे, कई परिवार पलायन को मजबूर
बेला गांव निवासी महेश यादव ने बताया कि पिछले दो-चार दिनों में कटाव की रफ्तार काफी बढ़ गई है। उनके अनुसार, इलाके में अब तक करीब 20 से 25 घर कटकर नदी में समा चुके हैं। कई परिवार अपने घर और सामान को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कटाव से उन्हें भारी नुकसान हुआ है, लेकिन राहत और बचाव के इंतजाम पर्याप्त नहीं हैं। कटाव निरोधी काम शुरू किए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन काम लगातार नहीं चलने से लोगों में नाराजगी है।
500 मीटर पक्की सड़क नदी में बही
ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी परेशानी गांव को जोड़ने वाली सड़क के कट जाने से पैदा हुई है। रघुबीर झा के अनुसार, वह करीब 20 वर्षों से इलाके में रह रहे हैं। कुछ समय पहले तक गांव से पश्चिम की ओर करीब 500 मीटर तक पक्की सड़क थी, लेकिन अब इसका बड़ा हिस्सा कोसी नदी में बह चुका है।
सड़क के कट जाने से गांव के लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ है। आपात स्थिति में मरीजों और जरूरतमंद लोगों को बाहर ले जाना भी ग्रामीणों के लिए चुनौती बन गया है।
‘बांस के सहारे कोसी को रोकना मुश्किल’
सुजानपुर निवासी रामचंद्र साह ने बताया कि इस बार उनका अपना घर भी कोसी की धारा में बह गया। उन्होंने कहा कि घर कटने के बाद कुछ सरकारी अधिकारी मौके पर पहुंचे थे, लेकिन कटाव रोकने के लिए मुख्य रूप से बांस का सहारा लिया जा रहा है।
ग्रामीणों का सवाल है कि इतनी तेज धारा वाली कोसी नदी को कच्चे बांस के सहारे कब तक रोका जा सकेगा। उनका कहना है कि कटाव प्रभावित क्षेत्र में मजबूत और स्थायी तकनीकी उपायों की जरूरत है। अगर समय रहते प्रभावी काम नहीं किया गया तो आसपास के बड़े इलाके में भी कटाव का खतरा बढ़ सकता है।
सैंडबैग डाले गए, लेकिन कई खुले और खाली नजर आए
मौके पर जल संसाधन विभाग की ओर से कटाव निरोधी कार्य कराया जा रहा है। तेज बहाव वाले हिस्सों में सैंडबैग भी डाले गए हैं। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि काम की गति काफी धीमी है और कई जगह सिर्फ खानापूर्ति जैसी स्थिति दिखाई दे रही है।
मौके पर कुछ स्थानों पर कच्चे बांस लगाए गए हैं, जबकि कई सैंडबैग खुले और खाली नजर आए। ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की अस्थायी व्यवस्था से कोसी के तेज बहाव को रोकना मुश्किल है।
लगातार कट रही जमीन, बचे घरों पर भी खतरा
कोसी नदी के तेज बहाव के कारण जमीन लगातार कटकर नदी में समा रही है। जिन परिवारों के घर अभी बचे हुए हैं, वे भी दहशत में हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि अगर कटाव की यही रफ्तार रही तो आने वाले दिनों में और घर इसकी चपेट में आ सकते हैं।
ग्रामीण प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि केवल औपचारिकता पूरी करने के बजाय मजबूत तकनीकी उपायों के साथ लगातार कटाव निरोधी काम कराया जाए, ताकि बची हुई आबादी और घरों को सुरक्षित किया जा सके।
प्रशासन ने निगरानी के दिए निर्देश
जिला प्रशासन की ओर से जिले में बाढ़ और कटाव की स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। डीएम सावन कुमार ने संबंधित अधिकारियों और अंचलाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। जिले के विभिन्न बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासनिक स्तर पर निगरानी और बचाव कार्य भी चलाए जा रहे हैं।
हालांकि बेला गांव के ग्रामीणों का कहना है कि यहां स्थिति सामान्य नहीं है। जब तक कटाव वाले हिस्से में मजबूत और लगातार काम नहीं किया जाता, तब तक घर, सड़क और बची हुई जमीन को कोसी की तेज धारा से बचाना मुश्किल होगा।