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मधेपुरा के BRC कार्यालय में शराब पार्टी का भंडाफोड़: दो शिक्षक सस्पेंड, डेटा ऑपरेटर की सेवा समाप्ति की अनुशंसा
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चौसा प्रखंड के बीआरसी भवन में पुलिस की छापेमारी, तीन लोग नशे की हालत में गिरफ्तार; शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप
मधेपुरा। बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बावजूद सरकारी कार्यालयों में शराब सेवन के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला मधेपुरा जिले के चौसा प्रखंड स्थित ब्लॉक रिसोर्स सेंटर (BRC) भवन का है, जहां कुछ शिक्षक और कर्मी कथित तौर पर शराब पार्टी कर रहे थे। गुप्त सूचना के आधार पर चौसा थाना पुलिस ने बीआरसी भवन में छापेमारी की और तीन लोगों को शराब के नशे की हालत में गिरफ्तार कर लिया। इस घटना के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
गुप्त सूचना पर हुई छापेमारी
जानकारी के अनुसार, उत्पाद विभाग को सूचना मिली थी कि चौसा प्रखंड के बीआरसी भवन के अंदर कुछ लोग शराब पी रहे हैं। सूचना मिलते ही चौसा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और छापेमारी की। इस दौरान चार लोगों को हिरासत में लेकर उनकी ब्रेथ एनालाइजर से जांच कराई गई।
जांच में दो शिक्षकों और एक डेटा ऑपरेटर के शराब के नशे में होने की पुष्टि हुई, जबकि एक अन्य शिक्षक की रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
प्रधान शिक्षक समेत तीन लोग गिरफ्तार
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों में नवसृजित प्राथमिक विद्यालय कुल्हड़िया बासा के प्रधान शिक्षक कुन्दन कुमार, एनपीएस नरघू टोला के विशिष्ट शिक्षक राधेश्याम पासवान तथा बीआरसी के डेटा ऑपरेटर अरविंद कुमार शामिल हैं। तीनों के खिलाफ बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
दोनों शिक्षकों को तत्काल किया गया निलंबित
घटना की जानकारी मिलते ही जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) संजय कुमार ने दोनों शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। बीईओ चौसा की अनुशंसा पर जारी आदेश में कहा गया है कि निलंबन अवधि के दौरान दोनों शिक्षकों का मुख्यालय प्रखंड संसाधन केंद्र, कुमारखंड रहेगा। साथ ही दोनों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू करने के लिए प्रपत्र-क जारी करने का निर्देश भी दिया गया है।
बायोमैट्रिक हाजिरी के बाद ही मिलेगा भत्ता
डीईओ ने स्पष्ट किया है कि निलंबन अवधि में दोनों शिक्षकों को नियमित रूप से बायोमैट्रिक उपस्थिति दर्ज करानी होगी। जीवन निर्वाह भत्ता भी उपस्थिति और सत्यापन के बाद ही स्वीकृत किया जाएगा।
डेटा ऑपरेटर को सेवा से हटाने की अनुशंसा
शराब सेवन के आरोपी बीआरसी के डेटा ऑपरेटर अरविंद कुमार के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की गई है। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने संबंधित विभाग को उसकी सेवा समाप्त (टर्मिनेट) करने की अनुशंसा भेज दी है।
शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
शराबबंदी वाले बिहार में सरकारी शिक्षा कार्यालय के भीतर कथित शराब पार्टी का खुलासा होने से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकारी कार्यालय में ड्यूटी के दौरान शराब सेवन की घटना ने विभागीय अनुशासन और निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
अब सभी की निगाहें विभागीय जांच और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारियों पर और भी सख्त विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।