बगहा कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: मानव तस्करी मामले में मां-बेटे को उम्रकैद, एक-एक लाख रुपये का जुर्माना
बगहा। पश्चिम चंपारण के बगहा कोर्ट ने मानव तस्करी के एक गंभीर मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पश्चिम बंगाल के रहने वाले मां-बेटे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने की स्थिति में दोनों को तीन वर्ष का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
स्पीडी ट्रायल में 24 दिनों के भीतर आया फैसला
यह फैसला बगहा जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने नौरंगिया थाना कांड संख्या 05/2026 में सुनाया। दोषियों की पहचान पश्चिम बंगाल निवासी नियोति देवी (43 वर्ष) और उनके बेटे नागेश भुइयां (19 वर्ष) के रूप में हुई है। मामले की सुनवाई स्पीडी ट्रायल के तहत हुई, जिसमें 22 जून से गवाही शुरू हुई और 9 जुलाई को दोनों को दोषी ठहराया गया। इसके बाद 13 जुलाई को सजा सुनाई गई।
तीन नाबालिग बच्चियों को बंगाल ले जाकर बेचने की थी साजिश
अभियोजन के अनुसार, 22 जनवरी 2026 को मानव व्यापार निरोधक इकाई को सूचना मिली थी कि एक महिला और एक युवक तीन नाबालिग बच्चियों को बहला-फुसलाकर पश्चिम बंगाल ले जा रहे हैं। सूचना के आधार पर नौरंगिया थाना पुलिस और मानव व्यापार निरोधक इकाई ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए हल्दिया चट्टी के पास दोनों आरोपियों को तीनों बच्चियों के साथ गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ और जांच में खुलासा हुआ कि बच्चियों को पश्चिम बंगाल ले जाकर बेचने की साजिश रची गई थी। आरोपियों के पास से दो मोबाइल फोन और बगहा से आसनसोल तक के रेलवे टिकट भी बरामद किए गए थे।
पांच गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध
अभियोजन पक्ष ने अदालत में पांच गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। अदालत ने माना कि तीनों पीड़ित बच्चियां नाबालिग थीं और उन्हें मानव तस्करी के उद्देश्य से बिहार से पश्चिम बंगाल ले जाया जा रहा था। इसके आधार पर दोनों आरोपियों को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धारा के तहत दोषी ठहराया गया।
अदालत ने मानव तस्करी को बताया गंभीर अपराध
फैसले में अदालत ने कहा कि मानव तस्करी केवल किसी एक व्यक्ति के खिलाफ अपराध नहीं, बल्कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 और 23 के तहत मिले जीवन, गरिमा और स्वतंत्रता के अधिकार पर सीधा हमला है। इसलिए ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है, ताकि समाज में स्पष्ट संदेश जाए।
अभियोजन पक्ष ने फैसले को बताया ऐतिहासिक
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता जितेंद्र भारती ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह बिहार में मानव तस्करी के मामले में आजीवन कारावास की सजा का पहला मामला माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि महज 24 दिनों के स्पीडी ट्रायल में सुनवाई पूरी कर अदालत ने दोषियों को उम्रकैद और एक-एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई, जो मानव तस्करी के खिलाफ न्यायपालिका के सख्त रुख को दर्शाता है।