इसके अलावा शादी समारोह, बाजार, वाहनों और सामाजिक आयोजनों में ऐसे गानों के प्रसारण पर भी चिंता जताई गई है. कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा लिखे गए पत्र में महिलाओं और बच्चों पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभाव का भी जिक्र किया गया है. बताया गया कि इन गानों से सामाजिक सौहार्द, भाईचारा और कानून-व्यवस्था पर खतरा बढ़ने का है.
'आपसी द्वेष को बढ़ावा देते ये गानें'
कला संस्कृति विभाग ने पत्र में कहा कि राज्य के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों, आयोजनों, बाजारों, वाहनों, विवाह समारोहों और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में अश्लील, दोहरे अर्थ गानों से समाज में कुटता बढ़ रही है. खुलेआम बजने पर ये गाने समाज में आपसी भाईचारा और सौहार्द के बदले अश्लीलता, हिंसक घटनाएँ, आपसी द्वेष, वैमनस्य को बढ़ावा देते हैं.
इन गानों के प्रसारण से समाज में आम लोग असहज महसूस करते है, विशेषकर महिलाओं एवं बच्चों के प्रति नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे सामाजिक एवं सांस्कृतिक वातावरण दूषित हो रहा है. ऐसे में बिहार की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपरा और लोक भाषाओं की गरिमा को बनाये रखना अत्यंत आवश्यक है.
इन गानों के प्रसारण पर रोक के लिए आवश्यक कार्रवाई की मांग
विभाग ने कहा कि अश्लील और द्वि-अर्थी गाने न केवल सामाजिक मूल्यों के विरूद्ध है, बल्कि सार्वजनिक शिष्टाचार और कानून व्यवस्था के दृष्टि से भी अनुचित है. यह एक गंभीर व बड़ी सामाजिक समस्या है, जो महिलाओं, बच्चों और संपूर्ण समाज को बुरी तरह दुष्प्रभावित कर रहा है. कला संस्कृति विभाग ने राज्य में अश्लील, द्वि-अर्थी और जातिसूचक भावनाओं को भड़काने वाले गानों के प्रसारण पर रोक के लिए आवश्यक कार्रवाई की मांग की है.
बता दें कि इससे पहले फरवरी महीने में डिप्टी सीएम रहते हुए सम्राट चौधरी ने सार्वजनिक स्थलों पर अश्लील और दोहरे अर्थ वाले गानों के प्रसारण पर कड़ा रुख अपनाया था. उन्होंने राज्यभर में पुलिस अधिकारियों को विशेष कैंपेन चलाकर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे.