किशनगंज। 13 वर्षीय मेनका कुमारी की गुमशुदगी और मौत के मामले में किशनगंज पुलिस ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। पुलिस अधीक्षक ने लापरवाही बरतने के आरोप में किशनगंज थाना प्रभारी नेसार अहमद को लाइन क्लोज कर दिया है, जबकि मामले के अनुसंधानकर्ता पुलिस अवर निरीक्षक सुधीर कुशवाहा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
यह कार्रवाई किशनगंज थाना कांड संख्या 574/26 की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। मामला डुमरिया भट्टा निवासी 13 वर्षीय मेनका कुमारी की गुमशुदगी और बाद में रमजान नदी स्थित शिवगंगा छठ घाट के समीप शव बरामद होने से जुड़ा है।
पुलिस अधीक्षक ने 4 जून को स्वयं घटनास्थल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान यह तथ्य सामने आया कि किशोरी के परिजन जब गुमशुदगी की शिकायत लेकर थाना पहुंचे थे, तब पुलिस ने समय पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की। आरोप है कि आवेदन में संशोधन करवाकर मामला दर्ज करने में अनावश्यक देरी की गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीपीओ को विस्तृत जांच का निर्देश दिया गया। जांच में पाया गया कि मृतका के पिता लक्ष्मण कुमार साह के आवेदन पर एफआईआर दर्ज करने में जानबूझकर विलंब किया गया था।
जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रभारी थानाध्यक्ष नेसार अहमद को 7 जून से लाइन क्लोज कर दिया गया है। साथ ही उनसे सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि मामले के अनुसंधानकर्ता सुधीर कुशवाहा ने गुमशुदा किशोरी की तलाश के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं किए। उन पर परिजनों के साथ दुर्व्यवहार करने और जांच में केवल औपचारिकता निभाने का भी आरोप है। घटनास्थल से मिले महत्वपूर्ण साक्ष्य, मृतका के बालों के क्लचर, को समय पर जब्त नहीं करने की बात भी जांच में सामने आई है।
एसडीपीओ की रिपोर्ट में अनुसंधानकर्ता की कार्यशैली को गंभीर लापरवाही, स्वेच्छाचारिता और कर्तव्यहीनता का उदाहरण बताया गया। इसके आधार पर पुलिस अधीक्षक ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है तथा सात दिनों के भीतर जवाब मांगा है।
गौरतलब है कि मेनका कुमारी की गुमशुदगी और बाद में शव मिलने के मामले ने जिले में व्यापक चर्चा पैदा कर दी थी। परिजनों ने शुरू से ही पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। अब इस कार्रवाई को जवाबदेही तय करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।