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ड्यूटी बेल्ट से गला घोंटकर RPF जवान की हत्या, पहचान मिटाने को शव पर डाला केमिकल; जांच में चौंकाने वाला खुलासा
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भागलपुर में ऑन-ड्यूटी RPF जवान धर्मेंद्र कुमार की हत्या के मामले में आरोपियों ने कबूला जुर्म, शव को नदी में फेंककर साक्ष्य मिटाने की थी कोशिश
भागलपुर:
भागलपुर में ऑन-ड्यूटी RPF जवान धर्मेंद्र कुमार की हत्या के मामले में जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया है कि जवान की हत्या उनकी ही ड्यूटी बेल्ट से गला घोंटकर की गई थी। हत्या के बाद पहचान छिपाने और साक्ष्य मिटाने के लिए शव पर केमिकल डाला गया तथा उसे सबौर थाना क्षेत्र के शंकरपुर पुल के पास कतरिया नदी में फेंक दिया गया।
हालांकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में डूबने से मौत की बात सामने आई है, लेकिन आरोपियों के बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने मामले को नया मोड़ दे दिया है। पुलिस अब वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करने में जुटी है।
दो दिन बाद मिला था जवान का शव
मृतक धर्मेंद्र कुमार (48) मालदा डिवीजन के भागलपुर-साहेबगंज रेलखंड स्थित लैलख ममलखा स्टेशन पर RPF जवान के पद पर तैनात थे। 25 मई की रात वह ड्यूटी पर थे। रात करीब 8 बजे उनकी पत्नी रानी देवी से आखिरी बार बातचीत हुई थी। उन्होंने बताया था कि स्टेशन पर उनकी अकेले ड्यूटी लगी है।
अगले दिन 26 मई को जब पत्नी ने फोन किया तो उनका मोबाइल बंद मिला। लगातार संपर्क नहीं होने पर परिजनों को अनहोनी की आशंका हुई। सूचना मिलने पर RPF अधिकारियों और परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की।
करीब दो दिन बाद 27 मई की शाम लैलख ममलखा स्टेशन से लगभग 3 से 3.5 किलोमीटर दूर एक तालाब से उनका शव बरामद किया गया। शव नग्न अवस्था में था। परिजनों ने चांदी की अंगूठी के आधार पर उनकी पहचान की।
वर्दी, मोबाइल और सोने की अंगूठी भी गायब
परिजनों के अनुसार शव मिलने के समय जवान की वर्दी, मोबाइल फोन और सोने की अंगूठी गायब थी। उनका आरोप है कि अपराधियों ने पहचान छिपाने के उद्देश्य से ये सामान गायब कर दिए। शव पर कई जगह चोट और गले पर जख्म के निशान भी मिले थे।
परिजनों का कहना है कि धर्मेंद्र कुमार का पहले अपहरण किया गया और फिर बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई।
पत्नी से वीडियो कॉल पर हुई थी आखिरी बातचीत
धर्मेंद्र कुमार की पत्नी रानी देवी ने बताया कि 25 मई की शाम वीडियो कॉल पर उनकी बातचीत हुई थी। उन्होंने बताया था कि वह ड्यूटी के लिए जा रहे हैं और पत्नी को खाना खाकर आराम करने की सलाह दी थी। इसके बाद उनका फोन नहीं लगा।
जब 26 मई को फोन स्विच ऑफ मिला तो परिवार की चिंता बढ़ गई। परिजनों ने रेलवे में कार्यरत रिश्तेदारों और RPF अधिकारियों को सूचना दी, जिसके बाद खोजबीन शुरू हुई।
परिवार ने विभाग पर लगाए लापरवाही के आरोप
मृतक की भाभी रेखा देवी ने आरोप लगाया कि घटना के बाद भी विभाग ने गंभीरता नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि तीन दिनों तक जवान का कोई पता नहीं चला और परिवार को भी संतोषजनक जानकारी नहीं दी गई।
परिजनों का आरोप है कि स्टेशन मास्टर और संबंधित अधिकारियों ने खोजबीन में अपेक्षित रुचि नहीं दिखाई। उन्होंने दोषी अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग की है।
गांव में नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई
जैसे ही धर्मेंद्र कुमार का शव उनके पैतृक गांव महमदा पहुंचा, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। तिरंगे में लिपटे शव को अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे। "भारत माता की जय" और "अमर रहे" के नारों के बीच उनका अंतिम संस्कार किया गया।
पति की मौत से पत्नी रानी देवी बेसुध नजर आईं, जबकि दो बच्चों के सिर से पिता का साया उठने के बाद परिवार गहरे सदमे में है। इकलौते भाई को खोने के बाद उनकी तीनों बहनों का भी रो-रोकर बुरा हाल है।
एक सप्ताह में खुलासे की मांग
परिजनों ने चेतावनी दी थी कि यदि एक सप्ताह के भीतर मामले का खुलासा कर दोषियों की गिरफ्तारी नहीं की गई तो वे रेल चक्का जाम आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि इस घटना की निष्पक्ष और गहन जांच होनी चाहिए।
अन्य आरोपियों की तलाश जारी
मामले की जांच कर रहे डीएसपी नवनीत कुमार ने बताया कि इस हत्याकांड में अन्य लोगों की भी संलिप्तता सामने आई है। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। उन्होंने कहा कि मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है और जल्द ही अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
पुलिस का दावा है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों और तकनीकी जांच के आधार पर पूरे हत्याकांड का पर्दाफाश किया जाएगा तथा दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जाएगी।