बेगूसराय में अनोखी प्रेम कहानी: किन्नर युवती से प्यार, कोर्ट मैरिज के 3 साल बाद परिवार ने धूमधाम से कराई शादी
बेगूसराय: बिहार के बेगूसराय जिले से एक ऐसी प्रेम कहानी सामने आई है, जिसने लोगों का दिल जीत लिया है। कहते हैं कि जोड़ियां भगवान बनाकर भेजते हैं, और यह कहानी उसी कहावत को सच साबित करती है। एक शिक्षक के बेटे को एक किन्नर युवती से प्यार हुआ। समाज और परिवार के विरोध के बावजूद दोनों ने साथ नहीं छोड़ा। पहले कोर्ट मैरिज की और तीन साल बाद परिवार की सहमति से हिंदू रीति-रिवाज से धूमधाम से शादी हुई। अब दोनों की शादी का वीडियो सोशल Media पर तेजी से वायरल हो रहा है।
2022 में मंझौल गांव में हुई थी पहली मुलाकात
मामला बेगूसराय जिले के भगवानपुर थाना क्षेत्र के संजात गांव का है। यहां सरकारी शिक्षक अर्जुन ठाकुर के बेटे विकास ठाकुर एक डांस मंडली में काम करते थे। वर्ष 2022 में एक कार्यक्रम के सिलसिले में विकास मंझौल गांव पहुंचे थे। वहीं उनकी मुलाकात घनश्याम सहनी की किन्नर बेटी सुशीला कुमारी से हुई।
पहली मुलाकात के बाद दोनों ने एक-दूसरे का मोबाइल नंबर लिया और बातचीत शुरू हो गई। विकास का कमला गांव में रिश्तेदारी होने के कारण उस इलाके में उनका अक्सर आना-जाना लगा रहता था। इसी दौरान दोनों की मुलाकातें बढ़ीं और दोस्ती गहरी होती गई। धीरे-धीरे यह दोस्ती प्यार में बदल गई।
दोस्ती से प्यार तक पहुंचा रिश्ता
फोन पर लंबी बातचीत और लगातार मुलाकातों ने दोनों को एक-दूसरे के करीब ला दिया। कुछ ही महीनों में दोनों ने महसूस किया कि वे एक-दूसरे के बिना नहीं रह सकते। दोनों रिलेशनशिप में आ गए और साथ जीवन बिताने का फैसला कर लिया।
लेकिन जब उनके रिश्ते की जानकारी परिवार वालों को हुई तो विरोध शुरू हो गया। परिवार और समाज के कई लोगों ने इस रिश्ते को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। खासकर किन्नर से शादी को लेकर विकास को ताने सुनने पड़े।
2023 में कोर्ट मैरिज कर लिया
परिवार और समाज के दबाव के बावजूद विकास और सुशीला अपने फैसले पर अडिग रहे। दोनों ने एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा और वर्ष 2023 में कोर्ट मैरिज कर ली।
शादी के बाद भी दोनों परिवार इस रिश्ते को स्वीकार करने को तैयार नहीं थे। समाज के तानों और आलोचनाओं के बीच भी दोनों ने अपने रिश्ते को मजबूती से निभाया। उन्होंने हर मुश्किल का सामना साथ मिलकर किया।
तीन साल बाद परिवार का बदला दिल
समय के साथ परिवार ने देखा कि विकास और सुशीला का रिश्ता केवल आकर्षण नहीं बल्कि सच्चे प्रेम, समर्पण और भरोसे पर टिका है। दोनों तीन साल तक पति-पत्नी की तरह खुशहाल जीवन जीते रहे।
उनके अटूट प्यार और एक-दूसरे के प्रति समर्पण को देखकर आखिरकार दोनों परिवारों का दिल पिघल गया। परिवार ने रिश्ते को स्वीकार कर लिया और शादी कराने का फैसला किया।
17 अप्रैल 2026 को हुई धूमधाम से शादी
दोनों परिवारों की सहमति के बाद 17 अप्रैल 2026 को विकास ठाकुर बारात लेकर सुशीला के घर पहुंचे। पूरे हिंदू रीति-रिवाज और पारंपरिक रस्मों के साथ दोनों की शादी संपन्न हुई। शादी समारोह में परिजन, रिश्तेदार और स्थानीय लोग शामिल हुए।
सुशीला बोलीं— पहले दोस्ती हुई, फिर प्यार
शादी के बाद सुशीला ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि विकास उनके गांव कार्यक्रम में आए थे। गांव में उनकी रिश्तेदारी भी थी, जिससे मुलाकातें बढ़ीं। पहले दोस्ती हुई, फिर प्यार हो गया। करीब छह महीने रिलेशनशिप में रहने के बाद दोनों ने कोर्ट मैरिज की। तीन साल बाद जब परिवार तैयार हो गया, तब धूमधाम से शादी हुई।
यह प्रेम कहानी समाज को एक बड़ा संदेश देती है कि सच्चा प्यार पहचान, लिंग और सामाजिक सोच से कहीं ऊपर होता है।