भागलपुर/नवगछिया: बिहार के जिले से पुलिस विभाग को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। क्षेत्र में पेट्रोलिंग टीम पर एक ट्रक ड्राइवर से अवैध वसूली, मारपीट और झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर पैसे ऐंठने का गंभीर आरोप लगा है। शिकायत के बाद पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गश्ती दल का नेतृत्व कर रहे एसआई धर्मेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया है।
इसके अलावा ड्यूटी पर तैनात तीन होमगार्ड को छह महीने के लिए ड्यूटी से हटा दिया गया है, जबकि पेट्रोलिंग वाहन के संविदा चालक की सेवा भी समाप्त कर दी गई है।
ट्रक रोककर सुनाई हादसे की झूठी कहानी
शिकायतकर्ता ट्रक ड्राइवर सुरेंद्र यादव, के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि रविवार रात वह से ट्रक खाली कर लौट रहे थे।
रात करीब 11:30 बजे जब उनका ट्रक क्षेत्र से गुजर रहा था, तभी पुलिस पेट्रोलिंग टीम ने वाहन रोक लिया। ड्राइवर के अनुसार पुलिसकर्मियों ने कहा कि उनके ट्रक से एक बाइक का एक्सीडेंट हुआ है और बाइक सवार ट्रक के नीचे फंसा हुआ है।
सुरेंद्र यादव ने जब इस आरोप से इनकार किया तो मामला अचानक गंभीर हो गया।
रेप और हत्या के प्रयास में फंसाने की धमकी
ड्राइवर के मुताबिक, पुलिसकर्मी उन्हें ट्रक से नीचे उतारकर सड़क किनारे ले गए। थोड़ी देर बाद एक कार वहां पहुंची, जिसमें एक युवती बैठी थी।
ड्राइवर का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने ऐसा माहौल बनाया कि उन्हें युवती के साथ आपत्तिजनक स्थिति में दिखाया जा सके। इसके बाद उन पर दबाव बनाया गया कि उनके खिलाफ दुष्कर्म, हत्या के प्रयास और अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर जेल भेज दिया जाएगा।
सुरेंद्र यादव लगातार खुद को निर्दोष बताते रहे, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई।
गंगा किनारे ले जाकर की मारपीट
ड्राइवर ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी उन्हें गंगा किनारे एक सुनसान जगह पर ले गए, जहां उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई।
उनका कहना है कि कॉलर पकड़कर घसीटा गया, बेल्ट और डंडे से पीटा गया। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी ने सरकारी पिस्टल निकालकर उसमें मैगजीन लोड की और गोली मारने की धमकी दी।
ड्राइवर के अनुसार, पुलिसकर्मी ने कहा कि यदि उनकी बात नहीं मानी तो वहीं खत्म कर दिया जाएगा और किसी को भनक भी नहीं लगेगी। इस धमकी के बाद वह पूरी तरह डर गए।
1 लाख से शुरू हुई डील, 18 हजार पर खत्म
सुरेंद्र यादव के अनुसार, शुरुआत में उनसे 1 लाख रुपए मांगे गए। रकम धीरे-धीरे 50 हजार, फिर 40 हजार और आखिरकार 18 हजार रुपए पर तय हुई।
ड्राइवर के पास केवल 8 हजार रुपए थे। बाकी रकम के लिए उन्हें ट्रक मालिक को फोन करना पड़ा। पुलिसकर्मियों के कहने पर उन्होंने मालिक से झूठ बोला कि ट्रक हादसे का शिकार हो गया है और तुरंत पैसों की जरूरत है।
मालिक ने 10 हजार रुपए की व्यवस्था कर दी। इसके बाद पुलिसकर्मी उन्हें एटीएम ले गए, लेकिन वहां पैसा नहीं निकला। फिर उन्हें एक पेट्रोल पंप ले जाया गया, जहां उनसे करीब 300 रुपए का डीजल भी भरवाया गया।
ड्राइवर का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने मोबाइल का पासवर्ड लेकर क्यूआर कोड स्कैन कराया और कुल 18 हजार रुपए ट्रांसफर करवा लिए। उनके पास ट्रांजेक्शन का स्क्रीनशॉट भी मौजूद है।
शिकायत के बाद हरकत में आया प्रशासन
घटना के बाद सुरेंद्र यादव ने अपने ट्रक मालिक को पूरी जानकारी दी। मामला धीरे-धीरे स्थानीय स्तर पर फैल गया और सोशल मीडिया पर भी चर्चा शुरू हो गई।
शिकायत, पेमेंट स्क्रीनशॉट और अन्य जानकारी सामने आने के बाद हरकत में आई। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर तत्काल प्रारंभिक जांच कराई गई।
SI सस्पेंड, 3 होमगार्ड हटाए गए
प्रारंभिक जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर गश्ती दल का नेतृत्व कर रहे एसआई धर्मेंद्र कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
साथ ही तीन होमगार्ड को छह महीने के लिए ड्यूटी से वंचित कर दिया गया और पेट्रोलिंग गाड़ी के संविदा चालक सौरभ कुमार की सेवा समाप्त कर दी गई।
SP बोले— कानून से ऊपर कोई नहीं
के एसपी ने कहा कि पुलिस विभाग में अवैध वसूली, पद के दुरुपयोग और आम नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार के लिए कोई स्थान नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और उपलब्ध सभी साक्ष्यों की जांच की जा रही है। यदि आरोप पूरी तरह सही पाए गए तो संबंधित सभी लोगों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
यह घटना पुलिस की कार्यशैली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।