सहरसा में पुलिस रेडियो ऑपरेटर परीक्षा के दौरान साल्वर गैंग के 3 सदस्य गिरफ्तार, ब्लैंक चेक और सर्टिफिकेट बरामद
सहरसा: बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और फर्जीवाड़े के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में रविवार को सहरसा में आयोजित बिहार पुलिस रेडियो ऑपरेटर भर्ती परीक्षा के दौरान पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए साल्वर गैंग के तीन संदिग्ध सदस्यों को हिरासत में लिया है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गई है।
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि परीक्षा केंद्रों के आसपास साल्वर गैंग सक्रिय है और परीक्षार्थियों की मदद के लिए अवैध तरीके अपनाए जा रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने त्वरित छापेमारी की, जिसमें तीन लोगों को हिरासत में लिया गया।
हिरासत में लिए गए लोगों में चंदन कुमार (पिता लक्ष्मी प्रसाद यादव), निवासी बनमा इटहरी शामिल है। पुलिस के अनुसार, वह पॉलीटेक्निक कैवेंडिश रेजिडेंशियल स्कूल में शिक्षक के पद पर कार्यरत है। उसके पास से ब्लैंक चेक, शैक्षणिक प्रमाणपत्र (सर्टिफिकेट) और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
दूसरे आरोपी की पहचान चंदन कुमार (पिता उपेंद्र यादव), निवासी सिमराहा के रूप में हुई है। वहीं तीसरे व्यक्ति विवेक कुमार, निवासी बरियाही, को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। तीनों से गहन पूछताछ की जा रही है।
साल्वर बनकर छात्रों की करते थे मदद
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गैंग प्रतियोगी परीक्षाओं में साल्वर के रूप में काम करता था। आशंका है कि ये लोग अभ्यर्थियों के बदले परीक्षा देने, प्रश्नपत्र हल करने या अन्य तकनीकी सहायता पहुंचाने के नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, शैक्षणिक प्रमाणपत्र, बैंक से जुड़े दस्तावेज और अन्य संदिग्ध कागजात भी बरामद किए हैं। बरामद सामग्री की जांच की जा रही है ताकि गैंग के पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।
डीएसपी कमलेश्वर प्रसाद सिंह, धीरेन्द्र पाण्डेय और थानाध्यक्ष अजय कुमार पासवान ने बताया कि मामले में लगातार छापेमारी जारी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गिरफ्तार किए गए लोग सीधे साल्वर थे या फिर परीक्षा धांधली के किसी अन्य रोल में शामिल थे।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।