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Wednesday, May 6, 2026

BIHAR NEWS:'पतियों के लिए न कानून, न आयोग'; पाेस्‍टर लेकर धरना पर बैठा प्रताड़‍ित पत‍ि, कहा-शादी मत करना

हाजीपुर में ‘प्रताड़ित पति’ का अनोखा धरना: “पतियों के लिए न कानून, न आयोग”

बिहार के Hajipur में एक मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां एक युवक अपनी पत्नी और ससुराल वालों से कथित प्रताड़ना से परेशान होकर बीच सड़क धरने पर बैठ गया।


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राजेंद्र चौक पर पोस्टर लेकर बैठा युवक

Rajendra Chowk Hajipur पर शैलेश कुमार नामक युवक हाथ में पोस्टर लेकर बैठ गया। पोस्टर में लिखा था:
“अगर पत्नी अच्छी मिले तो जीवन स्वर्ग, गलत मिले तो नरक… शादी मत करना।”

उसे देखने के लिए मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और मामला तेजी से चर्चा में आ गया।


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क्या है पूरा मामला?

पीड़ित शैलेश कुमार, जो मूल रूप से Muzaffarpur जिले के पताही का रहने वाला है, ने बताया कि उसकी शादी साल 2018 में हाजीपुर के पोखरा मोहल्ले में हुई थी।

शादी के शुरुआती एक साल तक सब ठीक रहा

इसके बाद पत्नी और ससुराल वालों द्वारा प्रताड़ना का आरोप

पत्नी उसके साथ रहने से इनकार करती है, कारण—आर्थिक स्थिति और पक्का मकान नहीं होना



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मारपीट और धोखे के आरोप

शैलेश के मुताबिक:

2023 में उसने Family Court India में केस किया

लेकिन समझौते के नाम पर धोखा दिया गया

पत्नी के भाइयों ने उसकी पिटाई करवाई

साझेदारी में खोली गई दुकान से उसे बाहर कर दिया गया


उसने यह भी आरोप लगाया कि उसकी पत्नी की पहले शादी हो चुकी थी, जिसे छिपाकर उससे विवाह कराया गया।


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“मरने की दुआ मांग रहा हूं”

शैलेश का कहना है कि वह पूरी तरह टूट चुका है और अब न्याय की गुहार लगा रहा है। उसने भावुक होकर कहा कि:

वह “मरने की दुआ” मांग रहा है

और अन्य पुरुषों से शादी न करने की अपील कर रहा है



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कानून पर उठे सवाल

शैलेश ने यह भी कहा कि:

महिलाओं के लिए कानून और आयोग मौजूद हैं

लेकिन पुरुषों के लिए वैसी व्यवस्था नहीं है


हालांकि, वास्तविकता यह है कि भारत में घरेलू विवादों के लिए अदालतें, पुलिस और कानूनी उपाय सभी पक्षों के लिए उपलब्ध हैं, लेकिन पुरुषों से जुड़े मामलों पर अलग संस्थागत ढांचे को लेकर बहस जरूर होती रही है।


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बड़ा सवाल

यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं, बल्कि समाज में बदलते पारिवारिक विवादों और कानूनी संतुलन पर भी सवाल खड़ा करता है—
क्या ऐसे मामलों में पुरुषों के लिए भी अलग सहायता तंत्र होना चाहिए?

अगर आप चाहें तो मैं इस विषय पर कानून, पुरुष अधिकारों और वास्तविक कानूनी विकल्पों को भी विस्तार से समझा सकता हूं।