बिहार पुलिस में भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत तिरहुत क्षेत्र के पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG) चंदन कुशवाहा ने कार्रवाई की है। कर्तव्य में लापरवाही और अनैतिक आचरण के दोषी पाए गए पुलिस अवर निरीक्षक (SI) सदरे आलम को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
मामला साल 2021 का है, जब सदरे आलम मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाने में तैनात थे। अहियापुर थाना क्षेत्र के सिपाहीपुर निवासी तबस्सुम आरा ने पटना स्थित निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में भ्रष्टाचार की शिकायत दर्ज कराई थी।
आरोपों के सत्यापन के बाद, निगरानी विभाग की टीम ने 30 सितंबर 2021 को एक विशेष छापेमारी की। इस दौरान, सब-इंस्पेक्टर सदरे आलम को अहियापुर थाने के सामने एक चाय की दुकान से 11,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था। इस संबंध में निगरानी थाना कांड संख्या-04/21 दर्ज किया गया था।
पुलिस उपाध्यक्ष को सौंपी थी जांच की जिम्मेदारी
गिरफ्तारी के बाद सदरे आलम के खिलाफ विभागीय जांच (संचालन संख्या-117/21) शुरू की गई थी। इसकी जिम्मेदारी मुजफ्फरपुर के पुलिस उपाध्यक्ष (पूर्वी) को सौंपी गई थी।
विभागीय जांच का संचालन पदाधिकारी, अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी, मुजफ्फरपुर) श्री शहरयार अख्तर ने अपनी रिपोर्ट में सदरे आलम पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को पूरी तरह सही और प्रमाणित पाया।
डीआईजी कार्यालय की ओर से जारी बयान में स्पष्ट किया गया है कि पुलिस विभाग एक अनुशासित संगठन है। भ्रष्टाचार में लिप्त पुलिसकर्मियों का विभाग में बने रहना न केवल आम जनता के विश्वास को ठेस पहुंचाता है, बल्कि संगठन के अन्य कर्मियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
जांच प्राधिकारी के मंतव्य और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), मुजफ्फरपुर की अनुशंसा से सहमत होते हुए, डीआईजी चंदन कुशवाहा ने सदरे आलम को आज से सेवा से विमुक्त (Dismissed) करने का आदेश जारी किया है। इस कार्रवाई से संदेश साफ है कि भ्रष्टाचार करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मी को बख्शा नहीं जाएगा।