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Saturday, April 4, 2026

BIHAR:महिला दारोगा की धमकी, 7500 रुपये लिए और झूठा नाम जोड़ने की कोशिश, ऑडियो क्लिप आई सामने

जमुई। जमुई जिले के खैरा थाना क्षेत्र में कानून और भरोसे के लिए गंभीर चुनौती पेश करने वाली घटना सामने आई है। खैरा थाना कांड संख्या 85/26 में पीड़ित श्यामदेव गोस्वामी को धमकी दी गई कि अगर वह कांड से अलग रहना चाहते हैं तो उन्हें 8,000 रुपये का भुगतान करना होगा, अन्यथा उनके नाम को कांड में जोड़ दिया जाएगा।पीड़ित श्यामदेव गोस्वामी, जो हरियाडीह गांव के निवासी हैं, इस धमकी से हक्का-बक्का रह गए। उन्होंने इस मामले में मध्यस्थ बिचौलिया अमित कुमार की सलाह मानी और सिक्कू कुमार नामक व्यक्ति के मोबाइल नंबर पर 7,500 रुपये फोन पे के माध्यम से भेज दिए। बाद में बिचौलिया ने महिला दारोगा जयश्री को पैसा मिलने की पुष्टि की।

इस पूरे घटनाक्रम का ऑडियो क्लिप भी सामने आया है, जिसमें महिला दारोगा जयश्री की धमकी और बिचौलिया द्वारा पैसे लेने की पुष्टि स्पष्ट रूप से सुनाई देती है। मामला तेजी से फैलते ही पुलिस महकमे में हलचल मच गई। ऑडियो क्लिप के वायरल होने के बाद महिला दारोगा ने मामले को दबाने की कोशिश की, लेकिन तब तक घटनाक्रम व साक्ष्य वरीय पुलिस पदाधिकारी तक पहुँच चुके थे।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिवक्ता एवं राजद के प्रदेश सचिव गोल्डन आंबेडकर ने शनिवार को एसपी विश्वजीत दयाल को व्हाट्सएप के जरिए शिकायत भेजी। शिकायत में उन्होंने ऑडियो क्लिप को भी संलग्न किया और त्वरित कार्रवाई की मांग की।

गोल्डन आंबेडकर के अनुसार, जिस दिन घटना हुई थी, यानी 3 मार्च को श्यामदेव गोस्वामी जमुई में थे और घटना स्थल से दूर थे। इसके बावजूद महिला दारोगा जयश्री ने उन्हें धमकी दी और कांड में नाम जोड़ने के लिए पैसे की मांग की। इस धमकी और बिचौलिया के माध्यम से पैसे लेने का पूरा साक्ष्य मौजूद है।

घटना में चौकीदार आशीष तांती की भी संलिप्तता सामने आई है। ऑडियो क्लिप में स्पष्ट रूप से सुना जा सकता है कि महिला दारोगा ने बिचौलिया को सीधे पैसे लेने के लिए कहा। यह घटनाक्रम न सिर्फ व्यक्तिगत सुरक्षा बल्कि कानून व्यवस्था पर सवाल उठाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामले कानून व्यवस्था की चुनौती हैं। जहां पुलिस और थाने के अधिकारी कानून के नाम पर धमकी और पैसे की मांग करें, वहां आम नागरिक का विश्वास कमजोर होता है। अधिकारियों की संलिप्तता की वजह से ही इस तरह के घिनौने कृत्य सामने आते हैं।

श्यामदेव गोस्वामी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि वह घटना के समय स्थल पर नहीं थे और यह पूरी तरह से झूठी धमकी थी। इस झूठी धमकी और पैसे की मांग की वजह से उन्हें मानसिक पीड़ा भी हुई।

घटना ने यह दिखा दिया है कि पुलिस महकमा में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत कितनी महत्वपूर्ण है। ऑडियो क्लिप के सार्वजनिक होने के बाद मामले की जांच वरीय अधिकारियों तक पहुंच गई है और अब यह देखना बाकी है कि आरोपी महिला दारोगा और अन्य संलिप्त लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होती है या नहीं।

गोल्डन आंबेडकर ने जनता से अपील की है कि अगर किसी को भी इस तरह की धमकी या उत्पीड़न का सामना करना पड़े, तो उसे तुरंत दर्ज कराकर और साक्ष्य जमा करवा कर शिकायत करनी चाहिए। इस मामले ने साबित कर दिया कि कानूनी प्रक्रिया में साक्ष्य की महत्ता अत्यधिक है और आम नागरिक भी इसे सही तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं।

यह मामला जमुई जिले में पुलिस और जनता के बीच भरोसे की स्थिति पर सवाल उठाता है और साथ ही यह भी दिखाता है कि समय पर कानूनी कार्रवाई व सावधानी ही किसी भी नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है।

मामला मेरे संज्ञान में आया है। एसडीपीओ को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद जल्द ही कार्रवाई होगी।

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विश्वजीत दयाल, एसपी, जमुई

मेरे ऊपर लगाए आरोप निराधार और बेबुनियाद है।

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जयश्री, पुअनि. खैरा थाना।