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पटना निगरानी कोर्ट का बड़ा फैसला: गया के थानाध्यक्ष लाल बाबू प्रसाद भ्रष्टाचार मामले में दोषी, 3-3 साल की सजा
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पटना स्थित निगरानी न्यायालय ने भ्रष्टाचार के एक अहम मामले में गया जिले के अतरी थाना प्रभारी लाल बाबू प्रसाद को दोषी करार दिया है। माननीय न्यायाधीश मो० रूस्तम ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 एवं धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(डी) के तहत सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।
यह मामला निगरानी थाना कांड संख्या 62/2006 (विशेष वाद संख्या 54/2006) से जुड़ा है। परिवादी धनंजय सिंह (ग्राम- गेहरौल, थाना- अतरी, जिला- गया) ने आरोप लगाया था कि आरोपी थाना प्रभारी ने उनके भाई और चाचा को झूठे केस में फंसाने की धमकी दी थी और केस से बरी करने के एवज में 8,000 रुपये रिश्वत की मांग की थी।
निगरानी टीम ने 13 अक्टूबर 2006 को लाल बाबू प्रसाद को 6,000 रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया था। मामले की जांच तत्कालीन पुलिस निरीक्षक रणवीर सिंह (निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना) ने की और समय पर आरोप-पत्र दाखिल किया। वहीं, बिहार सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक किशोर कुमार सिंह ने प्रभावी पैरवी कर दोष सिद्ध कराया।
अदालत ने आरोपी को धारा 7 के तहत 3 वर्ष सश्रम कारावास एवं 25,000 रुपये अर्थदंड तथा धारा 13(2) सहपठित 13(1)(डी) के तहत भी 3 वर्ष सश्रम कारावास एवं 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
गौरतलब है कि वर्ष 2026 में अब तक कुल 7 भ्रष्टाचार मामलों में न्यायालय द्वारा सजा सुनाई जा चुकी है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है।