Kosi Live-कोशी लाइव SUPAUL:फर्जी सर्टिफिकेट पर बनी नौकरी, सुपौल के पूर्व CO प्रिंस राज बर्खास्त - Kosi Live-कोशी लाइव

KOSILIVE BREAKING NEWS

Saturday, February 21, 2026

SUPAUL:फर्जी सर्टिफिकेट पर बनी नौकरी, सुपौल के पूर्व CO प्रिंस राज बर्खास्त

हेडलाइन:
फर्जी सर्टिफिकेट पर बनी नौकरी, सुपौल के पूर्व CO प्रिंस राज बर्खास्त 🚫📄: दो नाम और दो जन्मतिथि से परीक्षा देने का खुलासा


पटना। जाली शैक्षणिक प्रमाण-पत्र के आधार पर सरकारी सेवा पाने के मामले में सुपौल सदर के पूर्व अंचलाधिकारी (सीओ) प्रिंस राज को राज्य सरकार ने बर्खास्त कर दिया है। मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने उनकी सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर दिया।

उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री ने कहा कि सरकार फर्जीवाड़े के मामलों में शून्य सहनशीलता की नीति अपना रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और धोखाधड़ी कर नौकरी पाने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।

दो नाम और दो जन्मतिथि से परीक्षा देने का खुलासा 📑

विभागीय अभिलेखों के अनुसार प्रिंस राज ने वर्ष 2006 की माध्यमिक परीक्षा का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया था। उन्होंने यह परीक्षा मधुबनी जिले के एसटीएसवाई हाई स्कूल, मनमोहन से उत्तीर्ण बताई थी।

जांच में खुलासा हुआ कि वर्ष 2004 में उन्होंने धर्मेंद्र कुमार नाम से मैट्रिक परीक्षा पास की थी। दो अलग-अलग नाम और जन्मतिथि से परीक्षा देने का मामला विशेष निगरानी जांच में सामने आया।

विशेष निगरानी इकाई द्वारा दर्ज कांड संख्या 04/2025 में यह तथ्य प्रमाणित हुआ। आरोप है कि वर्ष 2006 के प्रमाण-पत्र का उपयोग आयु और शैक्षणिक योग्यता सिद्ध करने के लिए किया गया था।

प्रमाण-पत्र रद्द होने के बाद कार्रवाई 📄

जांच में निर्णायक मोड़ तब आया जब ने 1 अगस्त 2025 को वर्ष 2006 का अंकपत्र और प्रमाण-पत्र रद्द कर दिया। समिति ने प्रमाण-पत्र को जाली और कूटरचित पाया।

इसके बाद विभाग ने से मंतव्य मांगा। आयोग ने प्रक्रिया पूरी कर विभाग को चयनमुक्त करने के लिए स्वतंत्र बताया।

नियुक्ति अधिसूचना में स्पष्ट प्रावधान था कि गलत प्रमाण-पत्र पाए जाने पर सेवा समाप्त की जा सकती है। इसी आधार पर सेवा समाप्ति का निर्णय लिया गया।

बीपीएससी परीक्षा से हुआ था चयन 🏢

प्रिंस राज का चयन बीपीएससी की 60-62वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से हुआ था। वर्ष 2019 में नियुक्ति के बाद उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त किया।

उनकी पहली पदस्थापना पश्चिम चंपारण के चनपटिया में राजस्व अधिकारी के रूप में हुई थी। बाद में विभिन्न पदों पर स्थानांतरण के बाद वे सुपौल सदर के अंचलाधिकारी बने। वर्ष 2023 में उनकी सेवा संपुष्ट भी कर दी गई थी, लेकिन प्रमाण-पत्र रद्द होने के बाद नियुक्ति की वैधता समाप्त हो गई।

मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद बर्खास्तगी ⚖️

मंत्रिपरिषद से अनुमोदन मिलने के बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से पद से बर्खास्त कर दिया गया।

मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि यह कार्रवाई प्रशासनिक शुचिता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने दोहराया कि फर्जी प्रमाण-पत्र पर नौकरी पाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

सरकार ने साफ संकेत दिया है कि प्रशासन में ईमानदारी सर्वोपरि है और धोखाधड़ी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। ⚠️