पटना। तांती-ततवा जाति को अनुसूचित जाति में शामिल करने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के निर्णय पर फिर से विचार किए जाने को ले राज्य सरकार रिव्यू में गई हुई है। सोमवार को विधानसभा में इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता सहित एक दर्जन से अधिक पक्ष व विपक्ष के विधायकों द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण के जवाब में संसदीय कार्य मंत्री विजय चौैधरी ने यह जानकारी दी।
विजय चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार के अधिकार में यह नहीं है कि वह किसी जाति को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करे। सरकार ने यह कहा था कि पान जाति पहले से अनुसूचित जाति की सूची में है। उसी वर्ग में तांती-ततवा को शामिल किए जाने का निर्णय लिया गया था।
उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा तांती-ततवा को अनुसूचित जाति का दर्जा दिए जाने की थी तभी तो सरकार ने यह निर्णय लिया था। राज्य सरकार ने यह निर्णय सामाजिक अध्ययन के बाद लिया था।
इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद पहले से अनुसूचित जाति के आरक्षण पर नियुक्त तांती-ततवा समाज के लोगों को अति पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में डाला जा रहा है। इस कोटे के तहत जो नामांकन हुए हैं उन्हें निकाला जा रहा है।
मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि नामांकन के बाद निकाले जाने की सूचना सरकार को नहीं है। वहीं, राजद विधायक आलोक मेहता ने कहा कि जिस समय इस श्रेणी के अभ्यर्थियों की नौकरी या फिर नामांकन की प्रक्रिया आरंभ हुई थी उस समय वे अनुसूचित जाति में थे। ऐसी संख्या लाखाें में है।