मधेपुरा में सामाजिक पहल: चिकनोटवा गांव के 50 लोगों ने ली शपथ—न करेंगे, न खाएंगे मृत्यु भोज
मधेपुरा/प्रेस विज्ञप्ति।
मधेपुरा जिले के चिकनोटवा गांव में मृत्यु भोज प्रथा के खिलाफ एक अहम सामाजिक पहल की गई। गांव के करीब 50 लोगों ने सामूहिक रूप से शपथ लेते हुए कहा कि वे न तो मृत्यु भोज करेंगे और न ही उसमें शामिल होंगे।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे दिव्य चेतना जागृति संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष असंग स्वरूप साहब ने कहा कि मृत्यु भोज शोक की घड़ी में आयोजित किया जाता है, जबकि उस समय परिवार को सांत्वना और सहयोग की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि मृत्यु भोज खाना और खिलाना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है। कई स्थानों पर इस कुप्रथा को रोका गया है और प्रयास जारी है कि इसे हर जगह बंद किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि मृतक की स्मृति में वृक्षारोपण, पुस्तकालय की स्थापना या कोई अन्य सार्वजनिक कार्य किया जाना चाहिए।
बैठक में ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य शंभू क्रांति ने कहा कि मृत्यु भोज ब्राह्मणवादी व्यवस्था को बढ़ावा देने वाली प्रथा है और इसका सबसे अधिक बोझ दबे-कुचले तबकों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि कई परिवार कर्ज लेकर मृत्यु भोज करते हैं और बाद में उसे चुकाने के लिए पंजाब, दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों में मजदूरी करने को मजबूर हो जाते हैं।
इस अवसर पर उमाशंकर साहब, कृष्णा साहब, अनिल साहब, बिंदेश्वरी साहब, समिति साहब, मुखिया जी, चंदेश्वरी, आनंद मार्ग, सुरेश यादव, कुसुम लाल मेहता, आनंदी मेहता, सुरेश पासवान सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे। सभी ने एकजुट होकर संकल्प लिया कि वे मृत्यु भोज की प्रथा को अपने क्षेत्र से समाप्त करने का प्रयास करेंगे और इसकी शुरुआत चिकनोटवा गांव से ही होगी।