पटना। राज्य सरकार ने फसलों को बचाने के लिए घोड़परास को मारने का कानून तो बना दिया, लेकिन राज्य में शूटरों की बेहद कमी है।हजारों घोड़परास को मारने के लिए केवल 13 पंजीकृत शूटर हैं।
भाजपा विधायक रजनीश कुमार ने पिछले दिनों विधानसभा में यह मामला उठाया था।
मंगलवार को विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. प्रेम कुमार ने अपने कक्ष में इसकी समीक्षा के लिए बैठक बुलाई। इसमें वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर, प्रधान उच्च वन संरक्षक प्रभात कुमार गुप्ता, कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल एवं पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार भी शामिल हुए।
किसानों को बताएं मुआवजे के बारे में
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि शूटरों की संख्या चार सौ तक बढ़ाई जाए। शूटरों की कुल संख्या, आखेट हेतु आवेदन की प्रक्रिया, आखेटकों को दी जाने वाली भुगतान राशि, भुगतान की प्रक्रिया का प्रचार प्रसार किया जाए।
किसानों को यह भी बताया जाए कि घोड़परास के कारण होने वाली फसलों की क्षति का मुआवजा कितना और कैसे मिलेगा?
किसानों की शिकायत है कि उन्हें मुआवजे की राशि नहीं मिल रही है। डा. कुमार ने कहा कि घोड़परास के मामले में कृषि विभाग समन्वयक की भूमिका निभाए।
सांप को वन्यजीव घोषित कर 10 लाख करें मुआवजा
भाजपा के जीवेश कुमार के सर्पदंश से होने वाली मौतों के मामले में मुआवजे के बार में भी विस अध्यक्ष ने सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया।
समीक्षा में पाया गया कि सर्प दंश से हुई मृत्यु या क्षति पर वर्तमान में आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा चार लाख रुपया मुआवजा का प्रावधान है।
वन्यजीव से हुई मृत्यु/क्षति पर 10 लाख रुपया दिया जाता है। विस अध्यक्ष ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि सांप को वन्यजीव घोषित कर सर्प दंश से हुई मृत्यु/क्षति पर वन्यजीव से हुई मृत्यु/क्षति के समान 10 लाख रुपया मुआवजा देने के लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी करें।
बैठक में विधायक जीवेश मिश्र, रजनीश कुमार और मिथिलेश तिवारी के अलावा विस की प्रभारी सचिव ख्याति सिंह सहित अन्य अधिकारी शामिल थे।