इसके तहत प्रपत्र क गठित करने से लेकर वेतन वृद्धि पर रोक या पदोन्नति भी रोकी जाएगी।
विभाग ने बीते दिनों जमीन से जुड़े कार्यों की राज्यस्तरीय समीक्षा की। विभाग ने म्यूटेशन डिफेक्ट चेक अप्लीकेशंस की समीक्षा के दौरान पाया कि कई अंचल में दाखिल-खारिज निबटारे की गति धीमी है। अंचल कार्यालय में बड़ी संख्या में या तो आवेदन लंबित हैं या अवैध कारणों से रिजेक्ट कर दिया गया है।
वहीं, म्यूटेशन अप्लीकेशंस की समीक्षा में पाया गया कि सीओ ने तय समय 90 दिनों में दाखिल-खारिज का निबटारा नहीं किया, जबकि दाखिल-खारिज के निबटारे का राज्यस्तरीय औसत 44 दिन है। विभाग ने ऐसे अंचलों की पहचान कर अंचलाधिकारियों से जवाब-तलब किया है। जिन्हें नोटिस दिया गया है, उनमें बारसोई, पूर्णिया ईस्ट, उदाकिशुनगंज, आरा, रानीगंज, शाहपुर, फारबिसगंज, गोरौल और दीदारगंज के अंचलाधिकारी शामिल हैं।
बैठक में नहीं आ रहे सीओ
आम लोगों का काम समय पर नहीं करने वाले अंचलाधिकारी विभागीय समीक्षा बैठक में भी नहीं आ रहे हैं। बीते दिनों हुई राज्यस्तरीय बैठक में 537 अंचलाधिकारियों में 529 आए और आठ अनुपस्थित रहे। रामपुर, मोकामा, मनेर, डिहरी, नौहट्टा, रोहतास, बेनीपट्टी और अरवल के सीओ ने बैठक में नहीं आने की सूचना पूर्व में विभाग को नहीं दी थी।
इसी तरह रोहतास, गया और शिवहर के अपर समाहर्ता, बनमनखी, जयनगर, महनार, बिक्रमगंज, डिहरी ऑन सोन, रजौली, मंझौल और बखरी के डीसीएलआर बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहे। विभाग ने इस पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए इन अधिकारियों से जवाब-तलब किया है।
गरीबों का घर बसाने की योजना में सुस्ती
भूमिहीन गरीबों को घर बनाने के लिए अभियान बसेरा के तहत सरकार वासयुक्त जमीन दे रही है, लेकिन सीओ नॉट फिट फॉर अलॉटमेंट कहकर योग्य आवेदकों को भी अयोग्य कर रहे हैं। पटना सिटी और जगदीशपुर में 98 प्रतिशत आवेदन इसी श्रेणी के तहत रद्द किए गए। इनके अलावा पाटलिपुत्र, पटना सदर, फतुहा, बेतिया, कटिहार, जगदीशपुर सदर, रक्सौल के सीओ से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
विभाग ने इन अंचलों में अनियमितता मानते हुए जांच का भी निर्णय लिया है। सरकारी भूमि के सत्यापन में लापरवाही में पटना सदर, पटना सिटी, सिमरी बख्तियारपुर, शाहपुर, बोधगया, बथानी, टनकुप्पा, नौहट्टा, पोठिया और बसंतपुर के सीओ से स्पष्टीकरण मांगी गया है।
परिमार्जन में भी सुस्ती बरत रहे हैं सीओ
जमाबंदी में कोई त्रुटि होने पर अंचल कार्यालय उसे सुधार (परिमार्जन) करने में भी लोगों को परेशान कर रहे हैं। जमाबंदी, म्यूटेशन, मापी, लगान और भूमि सम्परिवर्तन के लिए परिमार्जन का होना जरूरी है। अधिकतम 75 दिनों में काम पूरा करना है। लापरवाही बरतने वाले बोधगया, औरंगाबाद, पूर्णिया पूर्वी, बगहा-दो, फारबिसगंज, सासाराम, रानीगंज, अररिया के सीओ से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
जमीन की मापी में भी सीओ सुस्ती बरत रहे हैं। इसमें बेनीपट्टी, लखनौर, मधेपुर, गढ़हनी, मदनगंज, सिकटी, बाराचट्टी, सोनो और शाम्हो अकहा कुरहा के सीओ ने लापरवाही बरती है।