बिहार के कैमूर जिले के चार सरकारी कर्मियों के विरुद्ध भभुआ थाने में धोखाधड़ी कर 273 लाभुकों के नाम से फर्जी तरीके से शौचालय निर्माण की सरकारी राशि हड़पने का मुकदमा दर्ज कराया गया है।
बिहार के कैमूर जिले के चार सरकारी कर्मियों के विरुद्ध भभुआ थाने में धोखाधड़ी कर 273 लाभुकों के नाम से फर्जी तरीके से शौचालय निर्माण की सरकारी राशि हड़पने का मुकदमा दर्ज कराया गया है। प्रभारी थानाध्यक्ष संतोष कुमार ने बताया कि भभुआ बीडीओ मनोज कुमार अग्रवाल के आवेदन पर चार सरकारी कर्मियों के विरुद्ध धोखाधड़ी व सरकारी राशि गबन करने का मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि कर्मियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने के बाद आगे की कार्रवाई की जा रही है। बीडीओ द्वारा थाने में दिए गए आवेदन में लिखा गया है कि तत्कालीन जिला समन्वयक हेमन्त कुमार, तत्कालीन जिला सलाहकार यशवंत कुमार, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण कार्यालय में प्रतिनियुक्त कार्यपालक सहायक पंकज कुमार व भभुआ प्रखंड की महुआरी पंचायत के कार्यपालक सहायक नीतीश कुमार द्वारा तकनीक का दुरुपयोग कर दूसरे फेज में शौचालय निर्माण के 273 फर्जी लाभार्थियों का फर्जी भुगतान किया गया है।
आवेदन में यह भी लिखा गया है कि डीएम व डीडीसी के निर्देश पर जब उन्होंने मामले की जांच कराई तो इस बात का खुलासा हुआ। उन्होंने बताया कि इतना अगर हमने दूसरे फेज के शौचालय निर्माण की जांच ठीक से नहीं कराई होती तो लगभग 225 लाभ्यार्थियों का और फर्जी भुगतान कराने में यह लोग सफल हो जाते।
बीडीओ ने इन पदाधिकारियों को सौंपी प्रतिलिपि
बीडीओ ने कर्मियों के विरुद्ध मुकदमा के लिए थाने में दिए गए आवेदन की प्रतिलिपि करीब दर्जनभर वरीय अधिकारियों को सौंपी है। जिन अफसरों को आवेदन की प्रतिलिपि दी है, उनमें सरकार के मुख्य सचिव, ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री, विभाग के प्रधान सचिव, पटना प्रमंडल के आयुक्त, पुलिस महानिदेशक, मिशन निदेशक एलएसबीए, राज्य समन्वयक, डीएम, डीडीसी, एसपी, एसडीओ व एसडीपीओ शामिल हैं। बीडीओ ने बताया कि फर्जी लाभुकों को शौचालय निर्माण की राशि भुगतान करने का मामला बहुत बड़ा है।
कैमूर जिले में शौचालय निर्माण की राशि भुगतान में अनियमितता की शिकायत पहले भी सुर्खियों में रहा है। जानकार सूत्रों की माने तो एक परिवार में एक व्यक्ति के नाम से शौचालय का निर्माण कराया गया। जबकि परिवार के दो से तीन सदस्यों के नाम से योजना की राशि की निकासी की गई। सूत्रों की माने तो कुछ ऐसे भी लाभुक हैं, जो दूसरे के शौचालय के साथ अपनी फोटो खींचवाकर योजना की राशि की निकासी की गई है। अगर जिला प्रशासन द्वारा मामले की गहन जांच कराई जाय तो सबकुछ सामने आ जाएगा।