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Monday, September 4, 2023

BIHAR/बच्चा हुआ तो नर्स बोली-ये तो एलियन जैसा है:पूर्णिया में बड़ी-बड़ी आंखें, बड़ा सा मुंह, निकाल रहा अजीब आवाजें, करीब जाने से डरा परिवार

 पूर्णिया में शनिवार को एक अजीब बच्चे का जन्म हुआ है। बच्चा हुआ तो नर्स ने कहा कि बच्चा तो एलियन जैसा दिख रहा है। बच्चा जन्म से ही अजीब आवाज निकाल रहा है। बच्चे का रंग-रूप ऐसा है कि उसकी मां और परिजन तक उसे देखकर डर जा रहे हैं। बच्चे का शरीर पूरी तरह सफेद है। उसकी स्किन जगह-जगह से फटी है। आंख और मुंह भी आम बच्चों से बड़ा है।

बच्चा तीन दिन का है। अमौर प्रखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नॉर्मल डिलीवरी से इस बच्चे का जन्म हुआ है। डॉक्टर बीमारी को लाइलाज बता रहे हैं।

डॉक्टर ने परिवार को इलाज के लिए बड़े अस्पताल रेफर किया है। पिता का कहना है कि उनके पास पैसे ही नहीं हैं। इसलिए वो बच्चे को घर लेकर चले गए हैं। पिता का कहना है कि जितने दिन वो जिंदा रहेगा हम उसकी सेवा करेंगे।

डॉक्टर्स का कहना है कि 3 लाख में बच्चों में से 1 बच्चे में ये बीमारी होती है। दुनिया में इस बीमारी के 300 केस हैं।

पूर्णिया के अमौर में जन्मा यह बच्चा काफी चर्चा में आ गया है।
पूर्णिया के अमौर में जन्मा यह बच्चा काफी चर्चा में आ गया है।

प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की जीएनएम अभिलाषा कुमारी ने बताया कि शनिवार करीब साढ़े ग्यारह बजे अमौर प्रखंड के चौका निवासी मो. अशफाक अपनी गर्भवती पत्नी रूबेदा के साथ अस्पताल आए। उसे भर्ती किया गया। करीब डेढ़ बजे महिला ने अजीब से दिखने वाले बच्चे को जन्म दिया।

बच्चे को देखते ही मां और परिजनों के होश उड़ गए। वे डर गए। बच्चे का शरीर पूरी तरह सफेद था। उसकी स्कीन जगह-जगह से फटी हुई थी। उसकी आंखें और मुंह बड़ा-बड़ा था।

जन्म के बाद से ही बच्चा अजीब तरह की आवाज निकाल रहा है। देखने में बच्चा पूरी तरह एलियन लग रहा था।

वहीं, बच्चे की हालत को देखते हुए डॉक्टर ने उसे रेफर कर दिया गया है। सिविल सर्जन डॉ. अभय प्रकाश चौधरी कहते हैं कि यह ‘कंजेटाइनल एनोमौली’ का मामला है। यह जन्मजात विकृति है और इस विकृति की वजह स्पष्ट नहीं है। ऐसे बच्चे अमूमन मानसिक रूप से अस्वस्थ होते हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बच्चे के आने पर उसे हर संभव चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

पिता बोले-पैसे नहीं..कैसे करवाऊं इलाज

बच्चे के पिता अशफाक और उनके घर वालों का कहना है कि डॉक्टरों ने उन्हें बताया है कि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं। बच्चे को अच्छे अस्पताल में ले जाने की सलाह दी गई है। वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं। किसी तरह मजदूरी कर घर का गुजारा करते हैं। बीमारी लाइलाज होने से वे चाहकर भी कुछ नहीं कर सकते। इसलिए बच्चे को घर ले आना उनकी मजबूरी थी। जब तक बच्चा जीवित है, वे उसका ख्याल रख रहे हैं।

बच्चे को देखने दूर -दूर से लोग पहुंच रहे हैं।
बच्चे को देखने दूर -दूर से लोग पहुंच रहे हैं।
डॉक्टर अभय प्रकाश ने बताया कि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है।
डॉक्टर अभय प्रकाश ने बताया कि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है।

डॉक्टर्स ने कहा-इस बीमारी का कोई इलाज नहीं

सिविल सर्जन डॉ. अभय प्रकाश चौधरी कहते हैं कि यह ‘कंजेटाईनल एनोमौली’ का मामला है। इस तरह के बच्‍चे दुर्लभ अनुवांशिक विकार (हार्लेक्विन इक्थियोसिस) से पीड़ित होते हैं। इस बीमारी में शरीर में तेल बनाने वाली ग्रंथियां नहीं होने से स्किन फटने लगती है। आंखों की पलके पलटने की वजह से चेहरा कुरूप लगने लगता है।

बीमारी की वजह पता करने के लिए स्किन बायोप्सी और केरिया टाइमिन जांच के लिए सैंपल लिया गया है। ऐसे बच्चे अमूमन मानसिक रूप से अस्वस्थ होते हैं। इसका अब तक मेडिकल साइंस में कोई इलाज नहीं।

पूरी दुनिया में अब तक इस बीमारी के लगभग तीन सौ मामले सामने आए हैं। ज्‍यादातर मामलों में जन्‍म के कुछ घंटे बाद ही बच्‍चे की मौत हो जाती है। अगर बच्चा जिंदा भी रह गया तो ज्‍यादा दिन जीने की संभावना नहीं रहती है, क्‍योंकि इसे लाइलाज माना जाता है।